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नार्वे ने समंदर में 600 मीटर अंदर क्यों लगाई ये मशीन, आने वाले वक्त में दुनिया बोलेगी थैंक्यू

जब सरकारें पानी पर बहस कर रही हैं, तब इंजीनियर समंदर की तह में हल ढूंढ लाए हैं. नॉर्वे के तट के नीचे एक स्टील कैप्सूल बिना शोर मचाए खारे पानी को मीठा बना देगा, वो भी कम बिजली में.

नार्वे ने समंदर में 600 मीटर अंदर क्यों लगाई ये मशीन, आने वाले वक्त में दुनिया बोलेगी थैंक्यू
समंदर की गहराई से निकलेगा पीने का पानी, नॉर्वे में शुरू हो रही है दुनिया की पहली अंडरवॉटर फैक्ट्री

Water Crisis Solution : नॉर्वे के पश्चिमी तट पर मोंगस्टाड के पास एक अनोखी शुरुआत होने जा रही है. Flocean One नाम का यह प्रोजेक्ट 300 से 600 मीटर गहराई में समंदर के नीचे लगाया जाएगा. दावा है कि यह दुनिया का पहला पूरा अंडरवॉटर डिसेलिनेशन प्लांट होगा, जो 2026 में काम शुरू करेगा. TIME मैगजीन ने इसे 2025 की बेस्ट इन्वेंशन्स में भी शामिल किया है.

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समंदर के नीचे छिपी पानी की फैक्ट्री (Underwater Desalination Technology)

इतनी गहराई पर पानी का दबाव बहुत ज्यादा होता है. आम प्लांट्स में यही दबाव मशीनों से बनाया जाता है, जिसमें भारी बिजली लगती है. Flocean इसी नेचुरल प्रेशर का इस्तेमाल करता है. इससे बिजली की खपत करीब 30 से 50 फीसदी तक कम हो सकती है ऊपर से धूप नहीं पहुंचती, तो काई और बैक्टीरिया भी कम होते हैं.

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एक कैप्सूल, हजारों लोगों का पानी (Capacity and Output of Flocean One)

एक स्टील कैप्सूल रोज करीब 1000 क्यूबिक मीटर मीठा पानी बना सकता है, जो लगभग 37,500 लोगों के लिए काफी है. कई यूनिट्स मिलकर 50,000 क्यूबिक मीटर रोजाना पानी दे सकती हैं. खास बात ये है कि तट पर कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं दिखेगी, सिर्फ पाइपलाइन से पानी पहुंचेगा.

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क्यों जरूरी है ये तकनीक (Why This Matters for Global Water Crisis)

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2030 तक दुनिया में पानी की मांग 40 फीसदी ज्यादा हो जाएगी. ऐसे में कम जमीन, कम बिजली और कम नुकसान वाली तकनीक बहुत अहम है. Flocean जैसे अंडरवॉटर प्लांट तटीय शहरों और द्वीपों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. '

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समंदर अब सिर्फ खारा पानी नहीं, बल्कि भविष्य का मीठा समाधान बनता दिख रहा है. अगर ये प्रयोग सफल रहा, तो पानी की जंग में इंसान को एक मजबूत हथियार मिल जाएगा.

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