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This Article is From Mar 27, 2023

VIDEO: भारत की बेटी ने बनाया कमाल का मोबाइल ऐप, कैमरे पर आंख दिखाते ही बता देगी बीमारी

Tremendous Mobile App: हाल ही में 11 वर्षीय लीना ने 'लहनास' नाम से एक वेबसाइट तैयार की है. इसके अलावा उन्होंने 'ओग्लर आईस्कैन' नामक एआई-आधारित ऐप भी बनाया है, जिसको आईफोन के इस्तेमाल से एक अनूठी स्कैनिंग प्रक्रिया के माध्यम से आंखों की बीमारियों और स्थितियों का पता लगाया जा सकता है.

VIDEO: भारत की बेटी ने बनाया कमाल का मोबाइल ऐप, कैमरे पर आंख दिखाते ही बता देगी बीमारी

Indian Girl Creates AI-based App: भारत में टैलेंटेड लोगों की कोई कमी नहीं है, इसका अंदाजा हाल ही में चर्चा में आए इस लिंक्डइन पोस्ट को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें भारत की एक बेटी द्वारा तैयार किए गए एक कमाल के सुपर मोबाइल ऐप के बारे में बताया गया है, जिसके बाद आपको शायद डॉक्टर के पास जाने की जरूरत न पड़े. दरअसल, हाल ही में 11 वर्षीय लीना ने  'लहनास' नाम से एक वेबसाइट तैयार की, जो बच्चों को जानवरों, रंगों और शब्दों के बारे में जानने में मदद करती है. इसके अलावा उन्होंने 'ओग्लर आईस्कैन' नामक एआई-आधारित ऐप भी बनाया है, जो की बड़े काम का बताया जा रहा है.

क्या आपको 9 साल की हाना रफीक याद हैं, जिन्होंने सबसे कम उम्र की आईओएस ऐप डेवलपर बनने के चलते चर्चा में थीं. इसके अलावा हाना ने एप्पल के सीईओ टिम कुक से भी पहचान हासिल की थी. हाल ही में उनकी बड़ी बहन लीना ने 'लहनास' नाम से एक वेबसाइट तैयार की, जो बच्चों को जानवरों, रंगों और शब्दों के बारे में जानने में मदद करती है. इसके अलावा उन्होंने 'ओग्लर आईस्कैन' नामक एआई-आधारित ऐप भी बनाया है, जिसको आईफोन के इस्तेमाल से एक अनूठी स्कैनिंग प्रक्रिया के माध्यम से आंखों की बीमारियों और स्थितियों का पता लगाया जा सकता है.

यहां देखें पोस्ट

11 वर्षीय लीना ने ऐप स्टोर में अपना ऐप सबमिट करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अपनी उपलब्धि शेयर की है, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देते हुए तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, 'एआई मोबाइल ऐप बनाने की आपकी उपलब्धि के बारे में सुनना प्रभावशाली है, जो संभावित नेत्र रोगों और स्थितियों का निदान कर सकता है.' एक अन्य यूजर ने लिखा, 'लीना, आप बहुत बधाई की पात्र हैं. 10 साल की उम्र में इतना कमाल का काम.'

बताया जा रहा है कि, लीना ने आर्कस, मेलेनोमा, टेरिगियम और मोतियाबिंद के साथ ही संभावित नेत्र रोगों या स्थितियों का निदान करने के लिए प्रशिक्षित मॉडल का उपयोग किया है. इसके साथ ही ऐप किस तरह काम करता है, इस बारे में भी जानकारी शेयर की है. उन्होंने अपने इस लिंक्डइन पोस्ट में बताया है कि, जब वह 10 साल की थीं तब से ही उन्होंने इस पर काम करना शुरू कर दिया था.

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शालिनी सेंगर
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