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चीन के समुद्री तटों से मछली पालन केंद्र क्यों गायब हो रहे हैं जबकि भारत के दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहे?

यह डेटासेट विश्व के तटीय मछलीपालन तालाबों का अपनी तरह का पहला मानचित्र प्रस्तुत करता है, जिसमें उनके वार्षिक विस्तार और परिवर्तन का दस्तावेजीकरण किया गया है. अध्ययन के अनुसार, समुद्री भोजन की बढ़ती मांग के चलते भारत इस क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि का स्रोत रहा.

चीन के समुद्री तटों से मछली पालन केंद्र क्यों गायब हो रहे हैं जबकि भारत के दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहे?
भारत में मछली पालन केंद्र लगातार बढ़ रहे हैं.
  • 2022 में भारत में तटीय मछलीपालन का क्षेत्र सबसे तेज़ी से बढ़ा, 2017 से 2022 के बीच 19 प्रतिशत की वृद्धि
  • चीन के पर्यावरणीय नीतियों के कारण तटीय मछलीपालन क्षेत्र में 2016 से 2022 के बीच 18.1 प्रतिशत की गिरावट आई
  • शोध में सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग कर 1990 से तटीय मछलीपालन के विस्तार और परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया
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दुनिया में मछली पालन के एक नए व्यापक विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर के किसी भी देश की तुलना में भारत में सबसे तेज़ गति से मछली पालन का विस्तार हो रहा है. ये निष्कर्ष 2022 में दुनिया भर के तटीय मछली पालन के लाखों उपग्रह स्नैपशॉट से संकलित एक नए डेटासेट पर आधारित हैं. 1990 से 2016 तक, मछली पालन के लिए दुनिया भर में तालाब क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ. 2017 के बाद, कुल क्षेत्र में गिरावट आई, लेकिन विभिन्न देशों में बदलाव अलग-अलग थे. यह कार्य चीनी विज्ञान अकादमी के पूर्वोत्तर भूगोल और कृषि पारिस्थितिकी संस्थान के शोधकर्ताओं और ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित विभिन्न देशों की टीमों द्वारा किया गया था. परिणाम 15 अप्रैल को अकादमिक पत्रिका साइंस बुलेटिन में प्रकाशित हुए थे.

क्यों चीन पीछे हुआ

यह डेटासेट विश्व के तटीय मछलीपालन तालाबों का अपनी तरह का पहला मानचित्र प्रस्तुत करता है, जिसमें उनके वार्षिक विस्तार और परिवर्तन का दस्तावेजीकरण किया गया है. अध्ययन के अनुसार, समुद्री भोजन की बढ़ती मांग के चलते भारत इस क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि का स्रोत रहा, जहां 2017 से 2022 के बीच 676 वर्ग किलोमीटर या 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई. हालांकि, लगभग इसी अवधि में - 2016 से 2022 के बीच - चीन के तटीय मछलीपालन क्षेत्र में सबसे अधिक, यानी 18.1 प्रतिशत की गिरावट आई. यह गिरावट तटीय आर्द्रभूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए बनाई गई पर्यावरणीय नीतियों के कारण हुई, हालांकि चीन में अभी भी विश्व स्तर पर मछली फार्मों का सबसे सघन नेटवर्क मौजूद है.

कैसे पता चला

शोध पत्र के प्रथम लेखक माओ देहुआ ने 20 अप्रैल को चाइना न्यूज सर्विस को दिए एक साक्षात्कार में बताया, “शोध दल ने 10 मीटर (33 फीट) के रिजॉल्यूशन वाले मछलीपालन तालाबों का वैश्विक वितरण मानचित्र बनाने के लिए 40 लाख से अधिक सेंटिनल-2 सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग किया और इसे संग्रहित लैंडसैट 9 तस्वीरों के साथ मिलाकर 1990 से तटीय मछलीपालन निगरानी और परिवर्तन विश्लेषण की समय श्रृंखला का पता लगाया,” सेंटिनल-2 यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा पृथ्वी की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली बहु-स्पेक्ट्रल सैटेलाइट तस्वीरों को कैप्चर करने के लिए संचालित एक मिशन है, जबकि लैंडसैट 9 नासा और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा संचालित एक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट है.

संकलित आंकड़ों के अनुसार, 59 देशों में कुल 34,674 वर्ग किलोमीटर में फैले तटीय मछलीपालन तालाब थे, जिनमें से 98 प्रतिशत विकासशील देशों में थे.

कुल क्षेत्रफल का लगभग एक चौथाई हिस्सा – 8,500 वर्ग किलोमीटर से अधिक – चीन में था, इसके बाद वियतनाम का स्थान था, जहां लगभग 17 प्रतिशत तालाब थे. हालांकि, तटरेखा की लंबाई के हिसाब से देखा जाए तो बांग्लादेश और वियतनाम में जलीय कृषि तालाबों का घनत्व अधिक था. दुनिया भर में जलीय कृषि तालाबों की संख्या में गिरावट के प्रमुख कारणों में से एक आर्द्रभूमि का संरक्षण रहा है, क्योंकि कुछ देश तटरेखाओं और वहां के समुदायों की सुरक्षा के महत्व को समझते हैं.

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