- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन और टोल वसूली के लिए फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण का गठन किया है
- नए नियम के तहत जहाजों को ट्रांजिट ऑथोराइजेशन और टोल का भुगतान प्राप्त करना अनिवार्य होगा
- टोल वसूली चीनी मुद्रा युआन में होगी जिससे ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और चीन से मजबूत संबंध मिल सकते हैं
एक शिपिंग जर्नल ने शुक्रवार को बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन को मंजूरी देने और जहाजों से टोल वसूलने के लिए एक प्राधिकरण का गठन किया है. शिपिंग और समुद्री व्यापार पर समाचार और जानकारी प्रदान करने वाली उद्योग पत्रिका लॉयड्स लिस्ट ने कहा, "फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण ने पहले ही एक नया ढांचा पेश किया है, जिसके तहत जहाजों को ट्रांजिट ऑथोराइजेशन प्राप्त करना और रवाना होने से पहले टोल का भुगतान करना अनिवार्य है."
ईमेल से भेजे जाते हैं नियम
प्राधिकरण द्वारा भेजे गए एक फॉर्म का हवाला देते हुए इसमें आगे कहा गया है कि "जहाजों को स्वामित्व, बीमा, चालक दल का विवरण और इच्छित ट्रांजिट मार्ग का विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करना आवश्यक है".मंगलवार को, ईरानी अंग्रेजी भाषी प्रसारक प्रेस टीवी ने कहा कि ईरान ने "होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता का प्रयोग करने के लिए एक प्रणाली" बनाई है और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को info@PGSA.ir ईमेल से "नियम" भेजे जाते हैं. यह नया तंत्र ऐसे समय आया है जब ईरान ने बार-बार संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहता है, जिसके तहत वह गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाता है और राजस्व को ओमान के साथ साझा करता है.
चीन की मुद्रा में लेगा टोल टैक्स
यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो इससे ईरान को हर साल लगभग 40 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर की आय हो सकती है. इससे वह अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क चीनी मुद्रा युआन में वसूला जाएगा, न कि अमेरिकी डॉलर में. इससे ईरान और चीन के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है.

रिपोर्टों के अनुसार, चीन, भारत और जापान की ओर जाने वाले जहाजों द्वारा पहले ही इस तरह के भुगतान किए जा चुके हैं, और ईरान की संसद इस प्रक्रिया को औपचारिक बनाने पर काम कर रही है. ईरान ने क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान स्वीकार करना भी शुरू किया है.
डॉलर का दबदबा क्या समाप्त हो जाएगा
यदि ईरान यह शुल्क वसूलना जारी रखता है, तो इससे क्षेत्रीय प्रभाव अमेरिका से हटकर चीन और एशिया की ओर स्थानांतरित हो सकता है और वैश्विक तेल व्यापार में अमेरिकी डॉलर (पेट्रोडॉलर) की ऐतिहासिक श्रेष्ठता कमजोर हो सकती है.
पेट्रोडॉलर व्यवस्था की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, जब अमेरिका ने सऊदी अरब से सैन्य सहायता के बदले तेल को केवल अमेरिकी डॉलर में मूल्यांकित करने को कहा था. धीरे-धीरे यह व्यवस्था ओपेक देशों में फैल गई और वैश्विक तेल व्यापार का मानक बन गई.

इससे अमेरिकी डॉलर वैश्विक रिज़र्व मुद्रा बन गया और अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति मजबूत हुई. तेल निर्यातक देशों के पास बड़े पैमाने पर डॉलर का भंडार जमा हुआ, जिसे उन्होंने अमेरिकी प्रतिभूतियों और वैश्विक निवेशों में लगाया. इससे अमेरिका के वित्तीय घाटे को भी मदद मिली और उसकी उधारी लागत कम रही.
क्या नया वैश्विक आर्थिक मॉडल उभर रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश ईरान को “पेट्रोयुआन” (चीनी युआन में भुगतान) में शुल्क देते हैं, तो यह पेट्रोडॉलर व्यवस्था के धीरे-धीरे कमजोर होने का संकेत होगा.
अर्थशास्त्री एंटोनियो भारद्वाज के अनुसार, यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक वैकल्पिक ढांचे की ओर बदलाव का संकेत हो सकता है, जिसमें युआन एक प्रमुख मुद्रा बन सकती है.

कुछ विश्लेषकों के अनुसार, इससे वैश्विक तेल बाजार दो हिस्सों में बंट सकता है—एक ओर युआन आधारित व्यापार और दूसरी ओर डॉलर आधारित व्यापार, जिसमें लागत अधिक होगी.
इस बदलाव का असर अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों जैसे पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, जापान और फिलीपींस पर भी पड़ सकता है, जो पहले से ही खाड़ी क्षेत्र के संकट से आर्थिक दबाव में हैं.
सोने का भंडार बढ़ा रही दुनिया
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि ईरान की यह नीति वैश्विक “डी-डॉलराइजेशन” की शुरुआत है, लेकिन यह अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट की दिशा में एक कदम जरूर हो सकता है. यदि देश डॉलर से दूरी बनाते हैं, तो यह अमेरिका पर वित्तीय और राजनीतिक निर्भरता कम करने जैसा होगा और चीन की मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में मदद करेगा.

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रिपोर्ट के अनुसार, 1996 के बाद पहली बार वैश्विक केंद्रीय बैंकों के पास अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की तुलना में अधिक सोना भंडार है. ब्रिक्स संगठन में शामिल देशों के भीतर भी अमेरिका पर निर्भरता कम करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है. चीन, भारत और ब्राज़ील ने 2025 में अपने अमेरिकी निवेशों में कमी की है. कुल मिलाकर, यदि ईरान द्वारा युआन में टैरिफ लागू किया जाता है, तो यह संकेत होगा कि वैश्विक व्यवस्था धीरे-धीरे बहुध्रुवीय हो रही है, जिसमें अमेरिका का वर्चस्व पहले जैसा नहीं रह जाएगा. इससे देशों को अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता मिलेगी, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी बढ़ सकती है.
युद्धविराम के बाद फिर हमला
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने बताया कि खाड़ी में रात भर हुई झड़पों में ईरानी सेना ने तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नौकाएं दागीं, लेकिन उनमें से कोई भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ. अमेरिकी सेना ने आने वाले खतरे को नष्ट कर दिया और ईरान में जमीनी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की. वहीं ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ने इसका खंडन करते हुए कहा कि यह झड़प तब शुरू हुई जब अमेरिकी जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर जा रहे एक ईरानी नागरिक टैंकर को निशाना बनाया.
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