
पाकिस्तानी नाइटकल्ब 'हार्ड रॉक कैफे' के मालिक अकील अख़्तर प्रस्तुति देते हुए
कराची:
क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा और विविधता से भरा शहर कराची किसी ज़माने में अपनी शानदार नाइटलाइफ के लिए जाना जाता था। एक ऐसा शहर जहां शराब की नदियां बहती थीं और जैज़ की दुनिया के जाने माने नाम हज़ारों की तादाद में आए संगीत के दीवानों का मन बहलाते थे।
यह शहर एक बार फिर अपने दादा-नाना की इस पुरानी परंपरा को जीवित करना चाहता है लेकिन इस बार बंद दरवाज़ों के भीतर। 2 करोड़ की आबादी वाले शहर कराची में हिंसा, राजनीतिक उठापटक और खून खराबे की कमी नहीं है लेकिन आधी रात होते ही यहां निजी दावतों का दौर शुरू हो जाता है। सौ से भी ज्यादा मेहमानों से भरे एक होटल के कमरे में लोग तेज़ संगीत पर थिरक रहे हैं और बार का मज़ा उठा रहे हैं।
टैटू से सजी हुई एक महिला डीजे ने संगीत की कमान संभाल रखी है। सूट और टाई पहने पुरुष सिगरेट का धुंआ उड़ाने में व्यस्त हैं, वहीं डांस फ्लॉर पर बेपर्दा लड़कियों ने कब्ज़ा जमा रखा है। इस पार्टी में शिरकत करने वाले युवा एक अलग ही परिवेश के हैं, यह विदेशी युनिवर्सिटी में पढ़ाई कर चुके हैं और पाकिस्तान लौटने से पहले दुनिया भर की सैर कर चुके हैं।
बाहर से गुज़रने वाले किसी शख्स को अंदाज़ा भी नहीं हो सकता है कि अंदर कोई पार्टी चल रही है, दरअसल आत्मघाती हमलावर और कट्टरपंथियों से बचने के लिए ऐसी दावतों को छुपकर किया जाता है। लेकिन 70 के दशक में इस्लामीकरण के धीरे धीरे पैठ बनाने से पहले पाकिस्तान की नाइटलाइफ के चर्चे दूर दूर तक हुआ करते थे।
50 के दशक में पार्टियों का यह सुनहरा दौर शुरू हुआ था जो 1977 में निषेध लागू होने तक जारी रहा लेकिन इसके बाद इस्लामिक नीतियों ने इस समाज में भारी बदलाव लाकर रख दिए। आलम यह था कि प्लेबॉय, ओएसिस और समर जैसे क्लब कराची के युवाओं को रिझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते थे।
उस ज़माने के मशहूर मेट्रोपोल होटल के मैनेजर इम्तियाज़ मुग़ल उस दौर को याद करते हुए बताते हैं उनकी एक शानदार नाइटलाइफ हुआ करती थी जहां बैंड, ड्रिंक्स और नाच गाने की कोई कमी नहीं थी। आज यह होटल काफी अस्त-व्यस्त हालत में है और इसे एक मरम्मत की सख्त ज़रूरत है। इम्तियाज़ कहते हैं कि किसी ज़माने का यह मशहूर होटल आज एक भूतिया घर जैसा हो गया है। होटल के कार पार्क की तरफ देखकर इम्तियाज़ ने कहा कि उस दौर को याद करके भी दिल दुखता है।
यह शहर एक बार फिर अपने दादा-नाना की इस पुरानी परंपरा को जीवित करना चाहता है लेकिन इस बार बंद दरवाज़ों के भीतर। 2 करोड़ की आबादी वाले शहर कराची में हिंसा, राजनीतिक उठापटक और खून खराबे की कमी नहीं है लेकिन आधी रात होते ही यहां निजी दावतों का दौर शुरू हो जाता है। सौ से भी ज्यादा मेहमानों से भरे एक होटल के कमरे में लोग तेज़ संगीत पर थिरक रहे हैं और बार का मज़ा उठा रहे हैं।
टैटू से सजी हुई एक महिला डीजे ने संगीत की कमान संभाल रखी है। सूट और टाई पहने पुरुष सिगरेट का धुंआ उड़ाने में व्यस्त हैं, वहीं डांस फ्लॉर पर बेपर्दा लड़कियों ने कब्ज़ा जमा रखा है। इस पार्टी में शिरकत करने वाले युवा एक अलग ही परिवेश के हैं, यह विदेशी युनिवर्सिटी में पढ़ाई कर चुके हैं और पाकिस्तान लौटने से पहले दुनिया भर की सैर कर चुके हैं।
बाहर से गुज़रने वाले किसी शख्स को अंदाज़ा भी नहीं हो सकता है कि अंदर कोई पार्टी चल रही है, दरअसल आत्मघाती हमलावर और कट्टरपंथियों से बचने के लिए ऐसी दावतों को छुपकर किया जाता है। लेकिन 70 के दशक में इस्लामीकरण के धीरे धीरे पैठ बनाने से पहले पाकिस्तान की नाइटलाइफ के चर्चे दूर दूर तक हुआ करते थे।
50 के दशक में पार्टियों का यह सुनहरा दौर शुरू हुआ था जो 1977 में निषेध लागू होने तक जारी रहा लेकिन इसके बाद इस्लामिक नीतियों ने इस समाज में भारी बदलाव लाकर रख दिए। आलम यह था कि प्लेबॉय, ओएसिस और समर जैसे क्लब कराची के युवाओं को रिझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते थे।
उस ज़माने के मशहूर मेट्रोपोल होटल के मैनेजर इम्तियाज़ मुग़ल उस दौर को याद करते हुए बताते हैं उनकी एक शानदार नाइटलाइफ हुआ करती थी जहां बैंड, ड्रिंक्स और नाच गाने की कोई कमी नहीं थी। आज यह होटल काफी अस्त-व्यस्त हालत में है और इसे एक मरम्मत की सख्त ज़रूरत है। इम्तियाज़ कहते हैं कि किसी ज़माने का यह मशहूर होटल आज एक भूतिया घर जैसा हो गया है। होटल के कार पार्क की तरफ देखकर इम्तियाज़ ने कहा कि उस दौर को याद करके भी दिल दुखता है।
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