- पाकिस्तान की शाहीन 3 मिसाइल 2,750 किलोमीटर तक मार कर सकती है और भारत के कई दूरस्थ स्थानों को कवर करती है
- अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के लिए न्यूनतम मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर होती है
- तुलसी गैबार्ड ने पाकिस्तान को ऐसे देशों में शामिल किया, जो अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें विकसित कर रहे हैं
पाकिस्तान को लेकर अब अमेरिका सतर्क हो गया है. उसकी आतंकवाद वाली नीति को तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन अब उसकी मिसाइलों को भी अमेरिका अपने लिए खतरा मानने लगा है. पाकिस्तान की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल शाहीन 3 है, जो 2,750 किलोमीटर तक के टारगेट को बर्बाद कर सकती है. शाहीन 3 की यह मारक क्षमता पाकिस्तान को भारत के प्रमुख शहरों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित पोर्ट ब्लेयर जैसे दूरस्थ स्थानों को कवर करती है.
फिर भी शाहीन 3 एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) नहीं है. किसी बैलिस्टिक मिसाइल को आईसीबीएम कहलाने के लिए उसकी न्यूनतम मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होनी चाहिए. अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की दूरी 11,000 किलोमीटर से अधिक है.
फिर अमेरिका को क्या डर
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड ने पाकिस्तान को रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ उन देशों की श्रेणी में रखा है, जो महाद्वीपीय अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम मिसाइलें विकसित कर रहे हैं.

तुलसी ने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के समक्ष 2026 के वार्षिक खतरे के आकलन के दौरान यह घोषणा की. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम की समय-सीमा के डिटेल्स नहीं दी, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने अलग से कहा है कि पाकिस्तान की एक कारगर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने और तैनात करने की क्षमता अभी कई साल से लेकर एक दशक तक दूर है.
पाकिस्तान का जवाब
इस्लामाबाद का आधिकारिक रुख उसके लगातार दोहराए जा रहे इस कथन से नहीं बदला है कि उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भारत का सामना करने के लिए है. 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड के गठन की घोषणा की थी, जो अन्य छोटे देशों की आस-पास के देशों पर हमले की रणनीति है. पाकिस्तानी एक्सपर्ट इस दावे का खंडन करते हैं. परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञ राबिया अख्तर ने अल जजीरा को बताया कि गैबर्ड के बयान में अमेरिकी खतरे के आकलन की एक पुरानी खामी है, क्योंकि इसमें ठोस विश्लेषण की जगह सबसे खराब स्थिति की अटकलों को आधार बनाया गया है.

पाकिस्तान क्यों कर सकता है ऐसा
डिफेंस एक्सपर्ट विपिन नारंग और प्रणय वड्डी ने जून 2025 में कहा था कि पाकिस्तान का मौजूदा शस्त्रागार क्षेत्रीय परमाणु या पारंपरिक हमले को रोकने के लिए पहले से ही पर्याप्त है, इसलिए एक आईसीबीएम एक अलग उद्देश्य की पूर्ति करेगा. ये अमेरिका को पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार के खिलाफ प्रिवेंटिव स्ट्राइक (ईरान पर जैसे किया जा रहा) शुरू करने से रोकना, या भविष्य के संघर्ष में भारत के पक्ष में सैन्य हस्तक्षेप करने से रोकने में मदद करेगा.
उत्तर कोरिया को भी अमेरिका एक खतरा मानता है और पाकिस्तान की ही तरह उसके पास भी परमाणु हथियार हैं, जबकि ईरान के पास नहीं हैं. उत्तर कोरिया लगातार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें टेस्ट करता रहता है, इसलिए वो बचा हुआ है. मगर ईरान के पास ना तो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और ना ही परमाणु हथियार. यही कारण कि अमेरिका बगैर किसी डर के उस पर बम बरसा रहा है. पाकिस्तान इसी से बचने की तैयारी कर रहा है.
फिर अमेरिका क्यों डर रहा
अमेरिकी आकलन में अब भी इस बात पर जोर दिया गया है कि पाकिस्तान के घोषित विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (doctrine of credible minimum deterrence) के सिद्धांत में वैश्विक शक्ति प्रदर्शन का तत्व शामिल है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस्लामाबाद ने अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम आईसीबीएम विकसित करने के कार्यक्रम को ना तो स्वीकार किया है और ना ही अस्वीकार किया है.

पाकिस्तान के पास फिलहाल कोई ऐसी मिसाइल नहीं है, जो अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता के करीब हो. इसकी सबसे एडवांस एमआईआरवी (बहु-वारहेड) सिस्टम अबाबील की दावा की गई मारक क्षमता 2,200 किलोमीटर है, जिसका अर्थ है कि शाहीन 3 पाकिस्तान के पास मौजूद सबसे लंबी मारक क्षमता वाली मिसाइल है. मगर अमेरिका ने अगर पाकिस्तान को खतरा माना है तो जाहिर है उसकी ठोस वजह होगी. अमेरिका नहीं चाहता कि उत्तर कोरिया की तरह पाकिस्तान भी उस तक पहुंचने वाली मिसाइलें बनाएं और उस पर परमाणु बमों के जरिए हमला करने वाले एक और देश का इजाफा हो. फिलहाल, रूस और चीन ही अमेरिका की जमीन पर हमला करने में सक्षम हैं. उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर अभी संदेह है.
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