- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दीपक की FIR रद्द करने की मांग खारिज कर दी है. उन्हें फटकार भी लगाई है
- कोर्ट ने सवाल उठाया कि एक आरोपी पुलिस सुरक्षा कैसे मांग सकता है. पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई पर भी आड़े हाथ लिया
- कोर्ट ने दीपक को जांच जारी रहने तक सोशल मीडिया पर बेवजह कमेंट न करने का निर्देश भी दिया है
'मोहम्मद दीपक'. उत्तराखंड के कोटद्वार में जिम चलाते हैं. 26 जनवरी को एक मुस्लिम दुकानदार और हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद के चलते सुर्खियों में आए थे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद उन्हें '10 जनपथ' बुलाकर गले लगाया था. कहा था कि दीपक ने जो किया, उससे बड़ी देशभक्ति कुछ और नहीं है. अब दीपक नई मुश्किल में हैं. अपने खिलाफ दर्ज मुकदमा खारिज कराने उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचे दीपक को अदालत ने कड़ी फटकार लगाई. याचिका तो खारिज हो कर ही दी, उनके खिलाफ 'गैग ऑर्डर' भी जारी कर दिया. आखिर ये नौबत आई कैसे, आइए समझते हैं.
'मोहम्मद दीपक' पर क्या आरोप हैं?
'मोहम्मद दीपक' के खिलाफ 26 जनवरी को हुई घटना के संबंध दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांत भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित करने के आरोप में एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है. दीपक ने एफआईआर रद्द कराने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया. याचिका में अपने व परिवार की पुलिस सुरक्षा की मांग की, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पक्षपात के आरोप में जांच कराने और नफरती भाषण देने वालों पर एफआईआर की भी मांग की.

हाईकोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए दीपक की एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी. इसके अलावा उन्हें फटकार लगाते हुए पूछा कि एक आरोपी पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है. पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे अनुरोध पर भी आड़े हाथ लिया. कोर्ट का कहना था कि ये सब जांच को प्रभावित करने की कोशिश लगती है. इतना ही नहीं, कोर्ट ने दीपक को जांच पूरी होने तक सोशल मीडिया पर बेवजह ऐसे कमेंट नहीं करने का भी आदेश दिया, जिससे जांच प्रभावित हो.
कोर्ट ने चंदे का हिसाब भी मांगा
इससे पहले, हाईकोर्ट की राकेश थपलियाल की बेंच ने दीपक के खाते में आ रहे चंदे का भी हिसाब मांगा. दीपक का कहना है कि 26 जनवरी की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें 100 से 500 रुपये तक का चंदा मिल रहा है. उनके खाते में करीब 80 हजार रुपये आए हैं. ये पैसा देशभर से उन्हें मिले सपोर्ट की वजह से लोगों ने खुद दिया था, उन्होंने नहीं मांगा था. कोर्ट ने इस लेन-देन का पूरा ब्योरा तलब किया है.

दीपक कैसे बने 'मोहम्मद दीपक'?
दीपक कुमार 26 जनवरी को उस वक्त चर्चा में आए थे, जब कोटद्वार में अपने दोस्त के पिता वकील अहमद की 'बाबा स्कूल गारमेंट्स' दुकान का नाम बदलने को लेकर उनकी हिंदूवादी कार्यकर्ताओं से बहस हुई थी. कार्यकर्ता दुकान के नाम से बाबा शब्द हटाने का दबाव डाल रहे थे. दीपक ने विरोध किया. जब लोगों ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने कहा- मोहम्मद दीपक. ये मामला बहुत गरमाया. कोटद्वार में कई दिनों तक तनाव रहा. दीपक का वीडियो जमकर वायरल हुआ. यह राजनीतिक मुद्दा भी बन गया.
करोड़ों भारतीयों के दिलों में सद्भाव और मोहब्बत की विचारधारा है, मगर मन में भय भी है - दीपक ने उन सभी को अपने साहस से राह दिखाई है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 25, 2026
जो लोग नफ़रत फैलाकर समाज को डराने की कोशिश करते हैं, वो दरअसल कायर होते हैं - उनसे कभी भी डरो मत।
दीपक ने हमारे तिरंगे और संविधान की रक्षा की है।… pic.twitter.com/lk3IMlk8x8
राहुल गांधी ने खुद की थी तारीफ
खुद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोहम्मद दीपक की तारीफ की. उन्हें दिल्ली में 10 जनपथ बुलाकर मुलाकात की. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से भी मिलवाया. राहुल ने खुद दीपक से मुलाकात का वीडियो जारी करते हुए कहा कि दीपक नफरत के सामने डटकर खड़े हुए, कमज़ोर की हिफ़ाज़त की, इससे बड़ी देशभक्ति नहीं होती. राहुल ने दीपक की जिम की मेंबरशिप लेने की बात कही.
जिम का खर्च निकालना भी मुश्किल
'मोहम्मद दीपक' इस पूरे मामले की वजह से कई लोगों के लिए सोशल मीडिया पर हीरो भले ही बन गए, लेकिन उनकी खुद की स्थिति डांवाडोल हो रही है. दीपक कोटद्वार में बदरीनाथ रोड पर हल्क जिम चलाते हैं. विवाद से पहले उनके जिम में करीब 150 मेंबर थे, जिनकी संख्या अब घटकर 15 से भी कम रह गई है. कमाई कम हो गई है और खर्च पूरे हैं. जिस फ्लोर पर दीपक का जिम है, उसके लिए उन्हें 40 हजार रुपये मंथली किराया देना होता है. 16 हजार की होम लोन की किश्त अलग से है. ऐसे में उनका परिवार 70 वर्षीय मां की चाय की दुकान के भरोसे आ गया है.
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