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पाकिस्तान जल रहा आसिम मुनीर, पहले अपने घर को देखो.... फिर शांति दूत बनो

भारत और पाकिस्तान की निगरानी संस्थाओं के डेटा के मुताबिक, पाकिस्तान के दो सबसे बड़े प्रांतों, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विद्रोह पिछले एक दशक में अपने उच्चतम स्तर पर है.

पाकिस्तान जल रहा आसिम मुनीर, पहले अपने घर को देखो.... फिर शांति दूत बनो
पाकिस्तानी सेना के लिए सबसे गंभीर खतरा खैबर पख्तूनख्वा से है.
  • पाकिस्तान अंदर से जल रहा है और आसिम मुनीर दुनिया में शांतिदूत बनने में लगे हुए हैं
  • आसिम 25 मार्च को जब चीनी राष्ट्रपति से बातचीत कर रहे थे,तब BLA ने उनके जवानों की ट्रेन को उड़ा दिया.
  • पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बलूचों का विद्रोह पिछले एक दशक में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है.

जब अपना घर जल रहा हो तो शांतिदूत बनना कहां की समझदारी है? ये बात पाकिस्तान पर बिल्कुल सटीक बैठती है. पाक सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, आजकल दुनिया भर में घूम-घूमकर इस्लामाबाद की छवि को 'जिहादी आतंकवाद फैलाने वाले' देश से बदलकर 'शांतिदूत' के तौर पर पेश करने की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन उनके अपने देश के कई हिस्से इन दिनों उग्रवादी हिंसा की आग में जल रहे हैं.

शांतिदूत बन रहे थे मुनीर, पाक में हो गया बड़ा हमला

आसिम 25 मार्च को जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत करनेे में व्यस्त थे तो उस दौरान बलूच अलगाववादियों ने उनकी सिक्योरिटी फोर्स को लेकर जा रही एक ट्रेन को बम से उड़ा दिया. इस हमले में 47 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए. कई लोगों का ऐसा मानना है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ये हमला जान-बूझकर ऐसे समय में किया ताकि बीजिंग में जनरल मुनीर को शर्मिंदा किया जा सके. बता दें कि BLA अक्सर बलूचिस्तान में चीनी कर्मचारियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाती रही है. भारत और पाकिस्तान की निगरानी संस्थाओं के डेटा के मुताबिक,  पाकिस्तान के दो सबसे बड़े प्रांतों, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बलूचों का विद्रोह पिछले एक दशक में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है.

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  • इस्लामाबाद स्थित 'सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज़' (CRSS) के मुताबिक, 2025 में 1,272 उग्रवादी हमलों में 3,400 से ज़्यादा लोग मारे गए.
  •  'साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल' (SATP) के मुताबिक, 2026 के शुरुआती 5 महीनों में ये आंकड़ा 1,700 को पार कर चुका है.
  • सुरक्षा बलों के बीच भी मरने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. यह आंकड़ा 2019 में 195 से बढ़कर 2025 में 650 हो गया.
  • पाकिस्तान का मुख्य फोकस BLA को खत्म करने पर रहा है, क्योंकि यह संगठन 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) के लिए खतरा है, जिस पर विकास और आर्थिक तरक्की के लिए पाकिस्तान बहुत ज़्यादा निर्भर है.
  •  पाकिस्तान की 'नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी' (NACTA) के मुताबिक,  बलूच अलगाववादियों ने 2021 और 2024 के बीच CPEC प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाकर किए गए हमलों में करीब 20 चीनी नागरिकों की हत्या की और 34 अन्य को घायल किया.

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BLA चीनी हितों पर क्यों कर रहा हमला?

 चीनी हितों पर BLA के हमलों का मकसद है बलूचिस्तान में विदेशी निवेश को रोकना और इस्लामाबाद में बैठे शासकों को शर्मिंदा करना. BLA का तर्क है कि बलूचिस्तान में चल रहे चीनी प्रोजेक्ट्स स्थानीय लोगों को सही फ़ायदा पहुंचाए बिना पाकिस्तान की पंजाबी और सिंधी आबादी के लिए वहां के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं.पाकिस्तान ने 2024 के मध्य में विद्रोह को रोकने के लिए एक नया सैन्य अभियान शुरू किया, लेकिन उसे बहुत ज्यादा सफलता इसमें नहीं मिली. इसके उलट, उस पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं और लोगों को जबरन गायब करने के आरोप लगे.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी नागरिकों पर हुए हमलों से CPEC की प्रगति भी भारी दबाव में आई है. जिसके बाद चीन मांग कर रहा है कि वह पाकिस्तान में अपने सैनिक तैनात करना चाहता है. वहीं पाक ने बीजिंग की चिंताओं को दूर करने के लिए हाल ही में देश में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक नया सुरक्षा बल तैनात किया है.

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पाकिस्तानी सेना को सबसे बड़ा खतरा किससे?

पाकिस्तानी सेना को खैबर पख्तूनख्वा से सबसे गंभीर खतरा है. इस इलाके में 2021 में अफ़गान तालिबान के अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) या पाकिस्तान तालिबान ने अपने हमले तेज़ किए हैं. उसके लगभग 6,000 लड़ाके अफ़गानिस्तान की तरह ही उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में भी अपना इस्लामिक शासन बनाना चाहते हैं.

TTP लड़ाके सोशल मीडिया वीडियो में पाकिस्तानी सरकार को 'गैर-इस्लामिक' बताकर उसकी आलोचना करते हैं. SATP के आंकड़ों के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा में TTP की हिंसा पिछले 10 से ज़्यादा सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर है. साल 2016 में ये हमले 93 थे जो बढ़कर 2025 में 545 तक पहुंच गए हैं. अकेले इस साल ये हमले 198 तक पहुंच चुके हैं.

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पाकिस्तान-अफगानिस्तान के रिश्तों को नुकसान

पाकिस्तान बार-बार अफगान तालिबान पर TTP लड़ाकों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाता रहा है. दरअसल इन लड़ाकों की हिंसा की वजह से पाकिस्तान-अफगानिस्तान के रिश्तों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है. इस तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच सीमा-पार हमले भी हुए.  इस्लामाबाद ने सीमावर्ती इलाकों और अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पास कई हवाई हमले किए हैं.

पाकिस्तानियों का कत्ल कर रहे TTP के लड़ाके

इस्लामाबाद ने इस साल फरवरी में अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान किया था. लेकिन हाल के महीनों में पाकिस्तान ने संयम बरता, जबकि TTP के लड़ाके पाकिस्तानी नागरिकों और सुरक्षा बलों की हत्याएं करते रहे हैं. बात अगर मई की करें तो  जब जनरल मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने में मशरूफ थे तब TTP ने 37 हमले किए और 200 से ज़्यादा लोगों की हत्या कर दी. ये पाकिस्तान की बाहरी छवि और उसकी आंतरिक सुरक्षा की हकीकत के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है.

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