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दुनिया के नक्शे पर शियाओं का वो आधा चांद, जिसके लिए ईरान सुप्रीम है और इजरायल दुश्मन नंबर-1!

Shia Crescent Explained: ईरान अमेरिका जंग के बीच समझिए कि शिया क्रिसेंट क्या है और क्यों दुनिया के कुछ पॉवरफुल देशों को ये आतंकी लगता है?

दुनिया के नक्शे पर शियाओं का वो आधा चांद, जिसके लिए ईरान सुप्रीम है और इजरायल दुश्मन नंबर-1!
Shia Crescent Explained: शिया क्रिसेंट क्या है
  • अमेरिका, इजरायल और यूरोप इन संगठनों को आतंकवादी मानते हैं जबकि रूस, चीन और कुछ अन्य देश ऐसा नहीं करते
  • शिया क्रिसेंट रणनीति के तहत ईरान शिया आबादी वाले क्षेत्रों को एक पावर ब्लॉक में बदलकर ताकत बढ़ाना चाहता है
  • 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया, जिसे ईरान ने समर्थन और सराहना दी थी
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लड़ाई ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल लड़ रहे हैं. ईरान की मिसाइल इजरायल में गिर रही है. इजरायल के बम ईरान में गिर रहे हैं. ईरान की मिसाइल अमेरिकी अड्डे उड़ा रही है. अमेरिका की मिसाइल ईरान में फट रही है... लेकिन यमन का आसमान नारों से क्यों गूंज रहा है? लेबनान में लगातार धमाके क्यों हो रहे हैं? इराक की जमीन बारूद से क्यों जल रही है? जॉर्डन में बेचैनी क्यों है? सीरिया में हड़कंप क्यों है..? इन सवालों के जवाब पर आने से पहले, जरा ये लिस्ट पढ़िए

  • कुद्स फोर्स
  • हमास
  • हिजबुल्लाह
  • कतैब हिजबुल्लाह
  • फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद
  • असैब अहल अल-हक
  • हरकत हिजबुल्लाह अल-नुजाबा
  • कतैब सैय्यद अल-शुहादा
  • बद्र संगठन
  • अल-अश्तर ब्रिगेड
  • सराया-अल-मुख्तार
  • हूती
  • जैनूबियन ब्रिगेड
  • फतेहमियून ब्रिगेड
  • इराक़ी शिया मिलिशिया
  • NDF
  • ब्रिगेड 313

इन सब नामों के पीछे एक नाम कॉमन है. और वो है ईरान. यूरोप, अमेरिका और इजरायल इन संगठनों को आतंकवादी कहते हैं. जबकि रूस, चीन और दुनिया के कुछ और देश इन संगठनों को आतंकवादी नहीं मानते हैं. इन सब नामों को अगर दुनिया के नक्शे में डालें तो एक नया शब्द सामने आता है... शिया क्रिसेंट. ये क्या है और क्यों दुनिया के कुछ पॉवरफुल देशों को ये आतंकी लगता है? आपको बताएंगे लेकिन पहले दुनिया के नक्शे पर आतंक का आधा चांद बनाने वाले इसे पूरे सिस्टम को देख लेते हैं.

ईरान और उसके समर्थन से चलने वाले संगठनों के नेटवर्क को आतंकवादी कहा जाता है. लेकिन ईरान और उसके समर्थन से चलने वाले संगठन इस दावे पर ध्यान नहीं देते हैं. वो पलट कर हर उस देश को आतंकी कहते हैं जो उन्हें आतंकियों की लिस्ट में डालता है. वो तो डंके की चोट पर हर साल रमजान के आखिरी शुक्रवार को विश्व कुद्स डे मनाते हैं. हाल ही में तेहरान में विश्व कुदुस डे मनाने के लिए लोग घरों से बाहर आए. जब लोग सड़कों पर नारे लगा रहे थे तभी बम धमाके भी हुए.... लेकिन कोई हिला नहीं. नारे लगाते रहे.

तेहरान में कुद्स डे के दिन प्रदर्शन के दौरान हमला हुआ

तेहरान में विश्व कुद्स डे के दिन प्रदर्शन के दौरान हमला हुआ

विश्व कुदुस डे मनाने के 3 कारण

  1. फिलीस्तीन की आजादी को मुद्दा बना कर रखा जाए
  2. इजरायल और जियॉनिज्म का विरोध किया जाए
  3. यरूशलम की मुक्ति के आंदोलन को जिंदा रखा जाए

इसकी शुरूआत 1979 के बाद ईरान से ही हुई थी. इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्लाह रुहेल्लाह खुमैनी ने ही इसकी शुरूआत की थी. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये परंपरा मुख्य रूप से शिया मुसलमानों के बीच में ही ज्यादा प्रचलित है. इसे ईरान की उस महत्वाकांक्षा से जोड़ कर देखा जाता है जिसमें ईरान दुनिया के मुसलमानों का सेनापति बनना चाहता है. दुनिया में इस्लामिक सत्ता को विस्तार देना चाहता है.

ईरान... ईरान के सुप्रीम लीडर... ईरान को चलाने वाले बड़े अधिकारी और IRGC के कमांडर्स पर अमेरिका ने इनाम की घोषणा कर दी. इनाम की राशि करीब 1 अरब रूपए रखी. इस तरह से अमेरिका ने दुनिया को ये बताया कि ये लोग बड़ा खतरा हैं. लेकिन इससे पहले वर्ष 2004 में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने पूरी दुनिया को ये कह कर चौंका दिया था कि इरान अरब देशों के बीच में एक शिया क्रिसेंट तैयार कर रहा है.

शिया क्रिसेंट क्या है?

आइए इसे समझ लेते हैं. इसके लिए सबसे पहले ये जानते हैं कि ईरान और उसके आसपास के इलाके में कितने शिया हैं.

  • पाकिस्तान में 10 से 15%
  • अफगानिस्तान में 10 से 15%
  • ईरान में 90 से 95%
  • अज़रबैजान में 65 से 75%
  • तुर्किए में 10 से 15%
  • सीरिया में 15 से 20%
  • इराक में 65 से 70%
  • साउदी अरब में 10 से 15%
  • यमन में 35 से 40%
  • ओमान में 5 से 10%
  • लेबनान में 40 से 50%
  • जॉर्डन में 1% से कम

इस पूरी आबादी के विस्तार में शियाओं को एक पॉलिटिकल, मिलिट्री, इकोनॉमिक और स्ट्रेटजिक पावर ब्लॉक में बदलने की रणनीति को ही शिया क्रिसेंट कहा जाता है. शिया क्रिसेंट को ठीक से समझने के लिए हम इस इलाके का एक और नक्शा आपके सामने रखते हैं.

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माना जाता है कि ईरान इस पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाना चाहता है. इसकी जरूरत क्यों है उसे समझिए ऐसे कि मिडिल ईस्ट और एशिया के पूरे हिस्से में जहां जहां मुस्लिम हैं वहां पर शिया और सुन्नी का बड़ा भेद माना जाता है. सुन्नी विचारधार का झंडाबरदार साउदी अरब को माना जाता है. जबकि शिया का कर्णधार ईरान है.

ईरान Vs सउदी

ईरान इतिहास में सफवी परंपरा से जुड़ा है. जिसका समय है 1501 से 1736. साउदी अरब वहाबी या सलफी परंपरा से जुडा़ हुआ है. सफवी राजाओं ने ही ईरान में शिया को राजधर्म का दर्जा दिया था. ये बात ओट्टोमन या सुन्नियों से संघर्ष की वजह बनी थी. 1744 में मोहम्मद इब्न सऊद के साथ वहाबी विचारधारा का गठबंधन हुआ. वहाबी सुन्नी इस्लाम में एक कट्टरपंथी सुधार आंदोलन माना जाता है. इसके बाद ईरान और साउदी अरब एक दूसरे के कट्टर विरोधी कहे जाने लगे. ईरान में 1979 में जब इस्लामिक क्रांति सफल हो गयी तो दोनों ओर से इस्लाम के सेनापति बनने की कवायद काफी तेज हुई. यहां ईरान अमेरिका और पश्चिमी दुनिया से दूर होता चला गया जबकि साउदी अरब धीरे धीरे अमेरिका और पश्चिमी दुनिया के करीब आता गया.

सउदी अरब में मुसलमानों का सबसे पवित्र स्थल है. इसलिए माना जाता है कि उसे मुस्लिमों के बीच एक नेचुरल बढ़त है. शायद यही वजह है कि ईरान यरुशलम में कब्जे की लड़ाई का सेनापति बन गया. उसने फिलीस्तीन का खुला समर्थन किया. इजरायल के खिलाफ खुलेआम झंडा फहरा दिया. ऐसा करके उसने ये दावा किया कि वो इस्लाम का सच्चा सिपाही है. लेकिन जब ईरान संकट में फंसा तो किसी बड़े मुस्लिम देश ने अमेरिका इजरायल के खिलाफ उसका समर्थन नहीं किया.

7 अक्टूबर 2023

फिलीस्तीन की आजादी के लिए लड़ने वाले हमास ने इजरायल पर घातक हमला किया था इसे अल अक्सा फ्लड का नाम दिया गया था. 20 मिनट में इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे गए थे. नोवा म्यूजिकल फेस्टीवल में नाचते गाते निहत्थे लोगों पर हमला किया गया. मोटर साइकिल, कार, पैराग्लाइडर से हमलावर आए थे. इसमें करीब 1200 मौत हुईं थीं. 251 बंधक बनाए गए थे. 1973 के योम किप्पुर युद्ध के बाद इजरायल ने फिलीस्तीन पर युद्ध का ऐलान कर दिया. भीषण हमला हुआ. इस दौरान हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर हमला किया. हूती भी एक्टिव हो गया था.

इसके बाद इजरायल ने हर मोर्चे पर प्रहार किए... और यही युद्ध ईरान-इजरायल अमेरिका युद्ध तक खिंच गया. हमास ने पूरे गाजा में जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर सुरंग बना रखी थी. अस्पतालों और स्कूलों के नीचे हमले के अड्डे तैयार किए थे. वहां भी बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया. एयर स्ट्राइक के बाद पैदल सेना ने भी हमला किया. इस दौरान इजरायल ने कई बार अमेरिका की बात भी नहीं मानी. 29 सितंबर 2025 में ट्रंप ने गाजा पीस प्लान का ऐलान किया.

इजरायल पर हमास के हमले को ईरान ने सही ठहराया. अयातुल्लाह खामेनेई ने 10 अक्टूबर 2023 कहा था कि “हम उन लोगों के हाथ चूमते हैं जिन्होंने इस हमले की योजना बनाई…यह एक विनाशकारी भूकंप है जिसने जायोनी शासन की अहम संरचनाओं को नष्ट कर दिया.” उन्होंने ये भी कहा था कि - पिछले साल इसी वक्त अल अक्सा फ्लड का एक्शन उचित था. वो बहुत ही नेचुरल था. फिलीस्तीनियों ने अपने हक की लड़ाई लड़ी.

इसी दौरान इजरायल ने हिजबुल्लाह के कमांडर नसरल्लाह को भी एक एयर रेड में मार डालने का दावा किया था. ईरान पर जब अमेरिका और इजरायल ने 2026 में हमला किया तो भी लेबनान के बेरूत पर भीषण हमले हो रहे हैं वहां पर हिज्बुल्लाह के ऊपर एक्शन जारी है.

हूती

2024 में समुद्र में तीन टैंकर्स पर हमला करने वाले संगठन का नाम हूती है. हूती यमन में ईरान का प्रॉक्सी कहा जाता है. जब हमास नेता हानिया को इजरायल ने खोज कर मार डाला तो राजधानी सना में हूती ने भीषण प्रदर्शन किया था. हूती भी ईरान और हिजबुल्लाह की तरह अपने वो वीडियो जारी करता है जिसमें वो इजरायल के ड्रोन मार गिराने का दावा करता है.

इजरायल लगातार हूती पर हमले करता है. इजरायल ने उसके मिलिट्री चीफ अब्दुल करीम अल घमारी को मार दिया था. अल ताहिर जिले में भीषण बमबारी करके उजाड़ दिया था. यमन के हवाई अड्डे पर बम गिरा कर विमान को जला दिया था. इसके बावजूद हूती का दम खत्म नहीं होता है. वो लगातार ईरान के जियो पॉलिटिक्ल इंट्रेस्ट के लिए ऐसे कदम उठाता है, जो ईरान के दुश्मनो को परेशान करे.

ISIS

2003- इराक में जब सद्दाम हुसैन का अंत हुआ तो ईरान की शह पर शिया प्रधान शासन का उभार हुआ. इसकी वजह से सुन्नी नाराज हो गए. यहां पर AQI नाम का संगठन बना जो बाद में ISIS बन गया. बगदादी के नाम से कुख्यात हुए इस आतंकवादी संगठन का निशाना ईरान भी था. बाद में इरान के मोसूल-फल्लूजा और सीरिया के अल्लेप्पो और रक्का के बीच में एक टेरर कॉरीडोर बन गया.

सीरिया में ईरान समर्थित असद की सरकार थी. उसने अपने विरोधियों के खिलाफ पहले IS को शह दी. बाद में उसी पर भारी पड़ा. असद के विरोधियों के खिलाफ रूस औऱ ईरान ने सीरिया की मदद की लेकिन IS उभरता गया. यहां भी ईरान की राजनीति को हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

कुदुस फोर्स- इस्माइल कानी. ये ईरान की कुदुस फोर्स के चीफ कहे जाते हैं. ये वो फोर्स है जिस पर ईरान के समर्थन से चलने वाले ऐसे संगठनों को मैनेज करने का आरोप है जिन्हें आतंकी कहा जाता है. कुदुस फोर्स के बारे में दावा है कि ये सेना ईरान से बाहर उसके हितों की रक्षा करती है. कुदुस फोर्स को हूती, हिजबुल्लाह, हमास जैसे कई और संगठनों की सप्लाई लाइन कहा जाता है. इस्माइल कानी से पहले कासिम सुलेमानी कुदुस फोर्स के चीफ थे. उन्हें अमेरिका ने इराक के बगदाद हवाई अड्डे के बाहर ड्रोन हमले में मार दिया था.

ईरान के इस प्रॉक्सी स्टाइल को उसके समर्थक अलग तरह की रणनीति मानते हैं और ईरान को इस कला का उस्ताद बताते हैं. दावा किया जाता है कि ईरान अपने ताकतवर दुश्मनों से सीधे लड़ नहीं सकता. लेकिन अपने अस्तित्व और जलवे के लिए वो उनको इंगेज करके रखता है. इसका ऐलान बेन्यामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में पूरी दुनिया के सामने किया था.

2024 में जब सीरिया के अलेप्पो में कियमर्स पुरहाशमी मारा गया तो ईरान ने उसकी जिम्मेदारी ली. इसे IRGC का कमांडर बताया और उसके जनाजे में भारी भीड़ उमड़ कर सड़कों पर आयी. ये सबूत है इस बात का कि ईरान उस पूरे खित्ते में ऐसे संगठनों की मदद करता है जिन्हें आतंकी कहा जाता है. और दुनिया इसे ही आधे चांद की तबाही कहती है.

हिजबुल्लाह

इतिहास और विचार के आधार पर हम आगे बढ़ते हैं तो शिया क्रिसेंट में सबसे बड़ा नाम सामने आता है- हिजबुल्लाह. इस इलाके में हिजबुल्लाह का विस्तार क्षेत्र देखें तो पता चलता है कि मध्य पूर्व में लेबनान, सीरिया, इराक, यमन, बहरीन, फ़िलिस्तीन...अफ्रीका में सिएरा लियोन, सेनेगल, गाम्बिया, आइवरी कोस्ट, कांगो . यूरोप में फंडिंग और लॉजिस्टिक नेटवर्क। लैटिन अमेरिका में भी फंडिंग और क्रिमिनल नेटवर्क के रूप में फुट प्रिंट्स का दावा किया जाता है.

फिलीस्तीन के समर्थन में इजरायल से लड़ने के क्रम में हिजबुल्लाह का नाम लिया जाता है. इसने पूरी दुनिया में रॉकेट हमले की रणनीति को प्रचलित किया. रॉकेट, शिप और एंटी टैंक मिसाइल भी इसके प्रमुख हथियार हैं. इजरायल के घरेलू हिस्सों में लेबनान से छूटने वाले हिजबुल्लाह के रॉकेट बहुत कहर ढाते हैं. इजरायल अक्सर हिजबुल्लाह पर भारी हमले करता है.

हिजबुल्लाह ईरान की “Axis of Resistance” रणनीति में इराक, सीरिया यमन (हूती) फिलिस्तीन (हामास) को ट्रेनिंग, हथियार और सामरिक महत्व देता है. इस आधार पर कहा जाता है कि ईरान इस पूरे इलाके में हिजबुल्लाह की मदद से अपना एजेंडा आगे बढ़ाता है. और इनकी हिंसक गतिविधियों से दुनिया की शांति को चुनौती भी मिलती है.

यह भी पढ़ें: ऐसी क्या ताकत है कि अमेरिका और इजरायल को चुनौती दे रही है ईरान की IRGC

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