- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्हाइट हाउस डिनर पार्टी में गोली चलने का हमला हुआ, जिसमें वे सुरक्षित रहे
- हमलावर कोल टॉमस एलन को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने ट्रंप और उनके अधिकारियों के नाम की सूची बनाई थी
- ट्रंप की सुरक्षा में लगे सीक्रेट सर्विस एजेंटों की तेजी से कार्रवाई के बावजूद सुरक्षा में गंभीर चूक हुई
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स हैं, जिनकी सुरक्षा में सीक्रेट सर्विस के एजेंट तैनात रहते हैं. लेकिन इतनी कड़ी सिक्योरिटी होने के बाद भी ट्रंप पर तीसरी बार हमला हुआ है. 2024 में एक गोली उनके कान को छूकर निकली थी. इसके दो महीने बाद फ्लोरिडा में जब ट्रंप गोल्फ खेल रहे थे, तब भी उन पर हमला हुआ. और अब रविवार को व्हाइट हाउस की डिनर पार्टी में गोली चली है. गनीमत रही कि ट्रंप बच गए.
हुआ ये कि जब अमेरिकी की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के हिल्टन होटल में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन का डिनर प्रोग्राम चल रहा था, उसी दौरान यहां गोली चली. गोलियां चलने की आवाज आने के बाद ट्रंप की सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस के एजेंट तुरंत उन्हें वहां से ले गए.
फायरिंग करने वाले हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है. संदिग्ध हमलावर का नाम कोल टॉमस एलन है, जो 31 साल का है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एलन ने एक लिस्ट बना रखी थी, जिसमें ट्रंप और उनके अधिकारियों के नाम थे. इससे पता चलता था कि उसके निशाने पर कथित तौर पर ट्रंप और उनके अधिकारी थे.
इस हमले के बाद ट्रंप ने संदिग्ध हमलावर की एक तस्वीर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट की. इस तस्वीर में हमलावर बगैर शर्ट के जमीन पर उल्टा लेटा हुआ नजर आ रहा है. उसके हाथ पीछे से बंधे हुए हैं.
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तारीफ कर रहे ट्रंप, लेकिन उठ रहे सवाल
ट्रंप ने अपनी एक और पोस्ट में सीक्रेट सर्विस के एजेंट की तारीफ की. उन्होंने लिखा, 'सीक्रेट सर्विस और लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों ने शानदार काम किया. उन्होंने तेजी और बहादुरी से कार्रवाई की. शूटर को पकड़ लिया गया है.'

अपनी पोस्ट में ट्रंप भले ही सीक्रेट सर्विस की तारीफ कर रहे हों. हमलावर को पकड़ लिया गया हो. लेकिन यह सवाल उठ रहा है कि कोई व्यक्ति बंदूक लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के इतने करीब कैसे पहुंच गया?
बताया जा रहा है कि ट्रंप की सिक्योरिटी में भयानक चूक थी. सवाल होटल में स्क्रीनिंग लेवल को लेकर भी उठ रहे हैं, जहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई बड़े नेता, राजनयिक और पत्रकार इकट्ठा हुए थे.

बीबीसी के रिपोर्टर गैरी ओ'डोनोग्यू ने बताया कि हिल्टन होटल के आसपास की सड़कें तो घंटों तक बंद रखी गई थीं लेकिन वेन्य के अंदर सुरक्षा बहुत कड़ी नहीं थी. उन्होंने दावा किया, 'दरवाजे पर बाहर खड़े एक सुरक्षाकर्मी ने मेरे टिकट पर बस एक सरसरी नजर डाली और वह भी शायद 6 फीट की दूरी से.'
उन्होंने दावा करते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा, 'हम लिफ्ट से नीचे बॉलरूम में गए और एक एजेंट ने मेरी तलाशी ली लेकिन मेरी जैकेट की अंदर वाली जेब में रखी चीजों की वजह से जो बीप की आवाजें आईं, उनमें उसे खास दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने मुझसे अपना सामान बाहर निकालने के लिए नहीं कहा.'
बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि डिनर की टिकटों पर सिर्फ टेबल नंबर लिखे थे, मेहमानों के असली नाम नहीं. होटल में आने वाले मेहमानों की पहचान किसी भी पॉइंट पर चेक नहीं की गई.
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राष्ट्रपति की सिक्योरिटी इतनी खराब क्यों?
पुलिस का कहना है कि हमलावर कोल टॉमस एलन हिल्टन होटल में एक गेस्ट के तौर पर ठहरा हुआ था. शनिवार को कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही होटल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था. होटल में सिर्फ मेहमान और उन लोगों को ही अंदर जाने की इजाजत थी जिनके पास डिनर टिकट थे.
वॉशिंगटन में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत किम डारोक ने सुरक्षा इंतजाम पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा, 'अंगर आप वहां मौजूद होते और इस डिनर में जबरदस्ती घुसने का कोई बुरा इरादा रखते तो आपको सुरक्षा से जुड़ी सिर्फ एक ही रुकावट पार करनी पड़ती और उसके बाद आप सीधे बॉलरूम में पहुंच जाते.'

ट्रंप ने भी बाद में खुद कहा कि हिल्टन कोई 'सिक्योर बिल्डिंग' नहीं थी. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस घटना से व्हाइट हाउस के उस नए बॉलरूम की अहमियत पता चलती है, जो कानूनी विवादों में फंसा हुआ है.
ट्रंप ने दावा किया कि नया बॉलरूम कहीं ज्यादा सुरक्षित है. यह ड्रोन प्रूफ है. बुलेट-प्रूफ शीशे लगे हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह बॉलरूम बन गया होता, तो ऐसी घटना कभी नहीं होती.
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