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वॉर पावर्स एक्ट की डेडलाइन नजदीक, क्या रिपब्लिकन पार्टी के संरक्षण में युद्ध जारी रखेंगे राष्ट्रपति ट्रंप?

अमेरिकी सेना ने युद्ध अभियानों के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की है, जिसने राजनीतिक और आर्थिक बहस को और तेज कर दिया है. इस भारी सैन्य खर्च का असर आम अमेरिकी मतदाताओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है.

वॉर पावर्स एक्ट की डेडलाइन नजदीक, क्या रिपब्लिकन पार्टी के संरक्षण में युद्ध जारी रखेंगे राष्ट्रपति ट्रंप?
  • ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने के साथ होर्मुज में नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने का आदेश दिया है
  • वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत राष्ट्रपति को संसद की अनुमति के बिना अधिकतम 60 दिन सेना तैनात करने का अधिकार है
  • साठ दिनों की सीमा समाप्त होने को है लेकिन रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति की युद्ध नीति का विरोध नहीं कर रही
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्धविराम को बढ़ाने का ऐलान किया है. लेकिन होर्मुज में नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने का आदेश भी दिया. इधर, राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध से जुड़ी एक अहम कानूनी समय सीमा से मात्र एक सप्ताह दूर हैं. तो अब सवाल है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की नई मंजूरी के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं? वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लग रहा है कि युद्ध के मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी उन्हें खुली छूट देती नजर आ रही है.

अमेरिका के 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' के तहत राष्ट्रपति को संसद की अनुमति के बिना अधिकतम 60 दिनों तक ही सेना तैनात करने का अधिकार होता है. यह 60 दिन की अवधि अब समाप्ति की ओर है, लेकिन इसके बावजूद रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति की युद्ध नीति पर खुलकर सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि कैपिटल हिल पर अब भी राष्ट्रपति को राजनैतिक संरक्षण मिल रहा है.

रिपब्लिकन पार्टी की लोकप्रियता में भी भारी गिरावट

हालांकि, देश के भीतर हालात तेजी से बदल रहे हैं. ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर आम जनता का समर्थन धीरे‑धीरे कम होता जा रहा है. युद्ध के कारण बढ़ते खर्च और लंबी सैन्य मौजूदगी पर चिंता जाहिर की जा रही है. इसका सीधा असर राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर भी पड़ता दिख रहा है. सर्वे और राजनीतिक संकेतों के अनुसार, कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी की लोकप्रियता में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है.

इस बीच अमेरिकी सेना ने युद्ध अभियानों के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मांग की है, जिसने राजनीतिक और आर्थिक बहस को और तेज कर दिया है. इस भारी सैन्य खर्च का असर आम अमेरिकी मतदाताओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. देश में महंगाई बढ़ रही है और पेट्रोल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, युद्ध की शुरुआत से ही कैपिटल हिल पर मौजूद अधिकांश रिपब्लिकन सांसद राष्ट्रपति के साथ खड़े रहे हैं. वे न तो युद्ध की वैधता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं और न ही कानूनी समय सीमा को लेकर कोई ठोस कदम उठाते नजर आ रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा टकराव पैदा कर सकता है, खासकर तब जब कानूनी सीमा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और जनता का दबाव और बढ़ेगा.

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