वियतनाम के प्रसिद्ध फु क्वोक द्वीप के पास 32 भारतीय पर्यटकों से भरी स्पीडबोट समुद्र की लहरों में देखते ही देखते पलट गई. इसमें 15 लोगों की मौत हो गई.
हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है वे आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल से ताल्लुक रखते थे. इन भारतीयों की मौत के बाद कुछ बुनियादी सवाल हैं जिनके जवाब अब तक मालूम नहीं हैं. इन सवालों के जवाब मिलने पर ही हादसे के पीछे का कारण समझा जा सकता है
It is with profound grief that we share the list of 15 Indian nationals who have lost their lives in the tragic boat accident near Phuc Quoc Island today. The list has been recieved from the Vietnamese authorities.
— India in Vietnam (@AmbHanoi) July 11, 2026
Our prayers are with the families of the deceased.
The Embassy… pic.twitter.com/2fr2TjXuPp
नाव पलटने के बाद अंदर ही क्यों फंस गए यात्री?
हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय मछुआरों और बचाव दल ने बताया कि ज्यादातर पीड़ित नाव का ढांचा उलटने के बाद उसके बंद केबिन के अंदर ही फंसे रह गए.
स्पीडबोट का केबिन किस तरह से डिजाइन किया गया था. इसपर भी सवाल उठ रहे हैं. आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह या रास्ते थे भी या नहीं. इसके अलावा यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी या नहीं. जांच एजेंसियों को बोट के स्ट्रक्चरल लेआउट की बारीकी से जांच करनी होगी ताकि यह साफ हो सके कि यात्रियों को बाहर निकलने का मौका क्यों नहीं मिला.
A tourist boat sank in Vietnam pic.twitter.com/zxkVKk4JzU
— Surajit (@surajit_ghosh2) July 11, 2026
मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया?
स्थानीय प्रशासन और कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के शुरुआती बयानों में तेज हवाओं और उठती ऊंची लहरों को हादसे की मुख्य वजह बताया गया है. लेकिन घटना के वक्त मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के दावे कहानी का दूसरा पहलू पेश करते हैं. घटना के वक्त स्पीडबोट के आसपास समुद्र में अन्य टूरिस्ट बोट्स भी सामान्य रूप से चल रही थीं और वे बिना किसी हादसे के किनारे लौट आईं.
सवाल उठता है कि क्या 50 वर्षीय अनुभवी कप्तान ने कोस्ट गार्ड की ओर से जारी मौसम की आधिकारिक चेतावनियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया? या फिर नाव किसी ऐसे अचानक उठे समुद्री तूफान की चपेट में आ गई जिसका पहले से अनुमान नहीं था?
मौसम विभाग के उस दोपहर के आंकड़ों और कोस्टगार्ड के अलर्ट सिस्टम से ही यह साबित होगा कि यह कुदरत का कहर था या इंसानी लापरवाही.
क्या क्षमता से अधिक सवार थे यात्री?
जांच अधिकारियों के लिए सबसे प्राथमिक काम नाव के रजिस्ट्रेशन कागजात और उस पर सवार लोगों की संख्या का मिलान करना है. सीरियल नंबर AG 26751 वाली इस स्पीडबोट पर हादसे के वक्त कुल 36 लोग मौजूद थे. 32 भारतीय पर्यटक और 4 स्थानीय क्रू मेंबर्स थे. क्या इस बोट की कानूनी क्षमता वाकई 36 लोगों को ले जाने की थी? इसका जवाब मिलना भी बाकी है.
- क्या बोट में मौजूद लाइफ जैकेट अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप थीं?
- क्या बोट पर सवार होने से पहले भारतीय पर्यटकों को किसी भी तरह का सेफ्टी ब्रीफिंग या इमरजेंसी ड्रिल कराया गया था?
- हादसे के वक्त बोट से तुरंत संकट का संदेश भेजा गया था या नहीं?
- क्या कंपनी नियमित रूप से अपनी बोट्स का मेंटेनेंस और सेफ्टी ऑडिट करवाती थी?
जब किसी स्पीडबोट पर उसकी क्षमता से ज्यादा वजन लाद दिया जाता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण केंद्र बिगड़ जाता है. ऐसी स्थिति में, तेज लहरों का एक जोरदार झटका भी बोट को आसानी से पलटने के लिए काफी होता है.
किसी भी समुद्री यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग्स और आपातकालीन सिग्नल सिस्टम पर निर्भर करती है.
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