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ISIS के हमदर्द अमेरिकी सैनिक ने जेल से छूटते ही यूनिवर्सिटी में बहाया खून, एनकाउंटर में ढेर

Virginia University Terrorist Attack: अमेरिकी नेशनल गार्ड के एक पूर्व जवान ने गुरुवार, 12 मार्च को वर्जीनिया राज्य की एक यूनिवर्सिटी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि दो अन्य लोगों को घायल भी कर दिया.

ISIS के हमदर्द अमेरिकी सैनिक ने जेल से छूटते ही यूनिवर्सिटी में बहाया खून, एनकाउंटर में ढेर
ISIS के हमदर्द अमेरिकी सैनिक ने जेल से छूटते ही यूनिवर्सिटी में बहाया खून
सोशल मीडिया

उधर अमेरिका की सेना मिडिल ईस्ट में जंग लड़ रही है तो इधर घर के अंदर एक पूर्व अमेरिकी सैनिक ने आतंकी घटना को अंजाम दे दिया है. अमेरिकी नेशनल गार्ड के एक पूर्व जवान ने गुरुवार, 12 मार्च को वर्जीनिया राज्य की एक यूनिवर्सिटी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि दो अन्य लोगों को घायल भी कर दिया. इस घटना में इस हमलावर की भी एनकाउंटर में मौत हो चुकी है. अब जानकारी आई है कि आर्मी जवान से हत्यारा बना यह हमलावर पहले इस्लामिक स्टेट समूह की मदद करने की कोशिश के लिए जेल जा चुका था. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने यह जानकारी दी है.

यह हमला अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी के दक्षिण में स्थित ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी के कैंपस में हुआ. FBI ने कहा कि वह इस गोलीबारी की जांच “आतंकी हमले” के रूप में कर रही है.

कौन था हमलावर?

अधिकारियों ने हमलावर की पहचान मोहम्मद बेलोर जल्लोह के रूप में की है. वह नेशनल गार्ड का पूर्व सदस्य था और उसने 2016 में इस्लामिक स्टेट को सहायता देने की कोशिश करने का अपराध स्वीकार किया था. FBI के डॉयरेक्टर काश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक बयान में कहा:
“हमलावर अब मर चुका है, क्योंकि बहादुर छात्रों के एक ग्रूप ने आगे बढ़कर उसे काबू कर लिया. उनके इन कदमों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तेज प्रतिक्रिया ने निश्चित रूप से कई लोगों की जान बचाई है.” उन्होंने कहा, “FBI अब इस गोलीबारी की जांच एक आतंकी हमले के रूप में कर रही है.”

जल्लोह को 2017 में जेल की सजा हुई थी और वह 2024 में रिहा हुआ था. FBI के स्पेशल एजेंट डोमिनिक इवांस ने पत्रकारों को बताया कि हमले से पहले हमलावर “अल्लाहु अकबर” चिल्लाया था. इवांस ने कहा कि संदिग्ध “एक आतंकी हमला करना चाहता था, जो टेक्सास के फोर्ट हुड में हुए हमले जैसा हो.”

बता दें कि यह 2009 की सामूहिक गोलीबारी की ओर इशारा था, जिसे अमेरिकी सेना के मनोचिकित्सक निदाल हसन ने अंजाम दिया था. उस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे. रिपोर्टों के अनुसार, उस हमलावर में भी कट्टरपंथ के संकेत दिखाई दिए थे, और उसने भी हत्याओं से पहले “अल्लाहु अकबर” चिल्लाया था.

वर्जीनिया की गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने बताया कि इस हमले में मारे गए व्यक्ति का नाम ब्रैंडन शाह था. वह आरओटीसी में लेफ्टिनेंट कर्नल और ट्रेनर थे. स्पैनबर्गर ने एक्स पर लिखा: “लेफ्टिनेंट कर्नल शाह ने केवल अपने देश की सेवा नहीं की, बल्कि उन्होंने दूसरों को भी उस रास्ते पर चलना सिखाया और नेतृत्व किया.”

बता दें कि अमेरिका में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में गोलीबारी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. यहां लोगों की संख्या से अधिक बंदूकें मौजूद हैं. यहां तो आर्मी स्टाइल की शक्तिशाली राइफलें खरीदने के नियम भी अपेक्षाकृत आसान हैं.

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