अमेरिकी कंपनियों ने 4427 करोड़ रुपये की घूस साइबर अपराधियों को दी, 10 साल का रिकॉर्ड टूटने की ओर

यह आंकड़ा वित्तीय संस्थानों द्वारा 2020 के लिए रिपोर्ट की गई राशि से 42 फीसद ज्‍यादा है. ट्रेजरी विभाग ने कहा कि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो 2021 में 10 वर्षों की तुलना में अधिक रैंसमवेयर-संबंधित लेनदेन का अनुमान है.

अमेरिकी कंपनियों ने 4427 करोड़ रुपये की घूस साइबर अपराधियों को दी, 10 साल का रिकॉर्ड टूटने की ओर

हैक से संबंधित भुगतान का नया डाटा दो दर्जन से अधिक देशों द्वारा रैंसमवेयर से लड़ने का संकल्प लेने के बाद आया है. (प्रतीकात्‍मक)

वाशिंगटन :

अमेरिका (America) के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि साल 2021 की पहली छमाही में रैंसमवेयर (Ransomware ) से जुड़े 4,427 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. शुक्रवार को सामने आए नए आंकड़ों के मुताबिक, साइबर वसूली के मामलों में हुई बढोतरी से पिछले दस सालों का रिकॉर्ड टूटने की ओर है. अमेरिका के ट्रेजरी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा वित्तीय संस्थानों द्वारा 2020 के लिए रिपोर्ट की गई राशि से 42 फीसद ज्‍यादा है. ट्रेजरी विभाग ने कहा कि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो 2021 में पिछले 10 वर्षों की तुलना में अधिक रैंसमवेयर-संबंधित लेनदेन का अनुमान है."

इस अपराध में डाटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए एक इकाई नेटवर्क में तोड़ना शामिल है, फिर फिरौती की मांग करना, आमतौर पर डिजिटल कुंजी के बदले इसे अनलॉक करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान किया जाता है. 

वाशिंगटन ने तेजी से बढ़ते हमलों को रोकने की मांग की है. हाल ही में एक प्रमुख अमेरिकी तेल पाइपलाइन, एक मीट पैकिंग कंपनी और माइक्रोसॉफ्ट एक्सचेंज ईमेल सिस्टम पर डिजिटल लुटेरों के हमले ने अमेरिकी बुनियादी ढांचे की की ओर ध्यान आकर्षित किया. 

रिपोर्ट में हमलों के पीड़ितों की पहचान नहीं की गई, जिसमें कहा गया कि कुछ स्पष्ट फिरौती का भुगतान जनवरी 2021 से पहले किया गया था. 

हैक से संबंधित भुगतान का नया डाटा दो दर्जन से अधिक देशों द्वारा वाशिंगटन के नेतृत्व वाले शिखर सम्मेलन के दौरान सामूहिक रूप से रैंसमवेयर से लड़ने का संकल्प लेने के बाद आया है. 


देशों ने अपने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले रैंसमवेयर संचालन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सभी साधनों पर विचार करेंगे." ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ, इजरायल, केन्या, मैक्सिको और अन्य लगभग 30 देश थे जो बुधवार से गुरुवार तक चलने वाली वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए. 

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)