- अमेरिका और दूसरे देशों के प्रतिबंधों के कारण ईरान की लगभग दस लाख करोड़ रुपए की संपत्ति विदेशों में फंसी
- फंसी हुई संपत्ति को फ्रोजन एसेट कहा जाता है, जिसे मालिक बिना अनुमति के इस्तेमाल या बेच नहीं सकता
- ईरान खराब आर्थिक स्थिति और प्रतिबंधों के कारण वह अपनी फंसी संपत्ति वापस पाने की कोशिश कर रहा है
US Iran War and Tehran's frozen assets: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी हो रही है. इसके बीच एक बहुत बड़ा मुद्दा सामने आया है- ईरान के 10 लाख करोड़ रुपए के खजाने का, जो दूसरे देशों में दबा पड़ा है. यानी ईरान की वह संपत्ति (एसेट) जो दूसरे देशों में जब्त की गई है. कई सालों से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिसके कारण उसका बहुत सारा पैसा बाहर ही रुका हुआ है. ईरान चाहता है कि यह पैसा उसे वापस मिल जाए, ताकि उसकी खराब अर्थव्यवस्था सुधर सके. लेकिन यह मामला आसान नहीं है, क्योंकि इसमें राजनीति, सुरक्षा और भरोसे से जुड़े कई बड़े सवाल शामिल हैं.
चलिए आपको इस एक्सप्लेनर में 6 सवालों का जवाब देकर इससे जुड़ी हर बात बताते हैं. शुरुआत इसी को समझने से करते हैं कि फ्रोजन एसेट क्या होती है.
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सवाल नंबर 1- फ्रोजन एसेट (जमी हुई संपत्ति) क्या होती है?
जब किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी देश के केंद्रीय बैंक का पैसा, संपत्ति या निवेश (जैसे शेयर) किसी दूसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है, तो उसे “फ्रोजन एसेट” कहा जाता है. इसका मतलब है कि मालिक इन चीजों को बेच या इस्तेमाल नहीं कर सकता. यह आमतौर पर प्रतिबंध, कोर्ट के आदेश या नियमों के कारण होता है. इसे ऐसे समझिए कि किसी ने आपकी संपत्ति जब्त कर ली है और मंजूरी मिलने के बाद ही उसे वापस दिया जाएगा.
सवाल नंबर 2- ईरान की कितनी संपत्ति फंसी हुई है?
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार सटीक रकम पता नहीं है, लेकिन ईरान की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशों में ईरान की 100 अरब डॉलर (भारतीय करेंसी में एक लाख करोड़ रुपए के आसपास) से ज्यादा संपत्ति फंसी हुई है. मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के विशेषज्ञ फ्रेडरिक श्नाइडर के अनुसार, यह रकम ईरान की एक साल की तेल कमाई से लगभग तीन गुना है. उन्होंने यह भी कहा कि यह साफ नहीं है कि अगर अमेरिका यह पैसा वापस देता है, तो क्या वह इसके इस्तेमाल पर शर्त लगाएगा या नहीं.
सवाल नंबर 3- ईरान की संपत्ति क्यों फ्रीज हुई?
अमेरिका के रिकॉर्ड के अनुसार, पहली बार 1979 में अमेरिका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ईरान की संपत्ति फ्रीज की थी. उन्होंने कहा था कि ईरान अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. उस समय तेहरान में अमेरिकी दूतावास में 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया था. आगे 1981 में अल्जीयर्स समझौता हुआ, जिसमें अमेरिका ने कुछ संपत्ति वापस कर दी, बदले में ईरान ने 52 बंधकों को छोड़ दिया. इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के रिश्ते खराब होते गए. अमेरिका और इज़राइल ने कई बार आरोप लगाया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम बढ़ा रहा है. इसी कारण अमेरिका और यूरोप ने ईरान पर कई बार सख्त प्रतिबंध लगाए और जब्त की गई संपत्ति का दायरा बढ़ता गया.
सवाल नंबर 4- कौन-कौन से देशों में ईरान की संपत्ति फंसी है?
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की संपत्ति कई देशों में फंसी हुई है:
- जापान: लगभग 1.5 अरब डॉलर
- इराक: लगभग 6 अरब डॉलर
- चीन: कम से कम 20 अरब डॉलर
- भारत: लगभग 7 अरब डॉलर
- अमेरिका: लगभग 2 अरब डॉलर
- यूरोप : लगभग 1.6 अरब डॉलर
- कतर: लगभग 6 अरब डॉलर
सवाल नंबर 5- ईरान के लिए यह पैसा क्यों जरूरी है?
ईरान की अर्थव्यवस्था जंग से पहले ही बहुत खराब हालत में थी. अब तो वह और भी बदतर हो गई है. कई सालों से लगे प्रतिबंधों की वजह से उसका तेल निर्यात कम हो गया है और देश में निवेश भी नहीं आ रहा. 2015 में जब बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका से उसका समझौता हुआ था, तब लगभग 100 अरब डॉलर की संपत्ति वापस देने और तेल व्यापार पर लगी पाबंदियां हटाने की बात हुई थी. आतंकवाद, मानवाधिकार और मिसाइल से जुड़े कुछ प्रतिबंध बने रहे थे. लेकिन फिर जब ट्रंप राष्ट्रपति बने तो यह समझौता उन्होंने रद्द कर दिया.
सवाल नंबर 6- ट्रंप के लिए ईरान की जब्त संपत्ति को लौटाना मुश्किल क्यों है?
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के सामने राजनीतिक दिक्कत है. 2015 में तो खुद मार्को रुबियो (जो अभी ट्रंप की सरकार में विदेश मंत्री हैं) ने कहा था कि अगर ईरान को पैसा मिल गया, तो वह अपनी सैन्य ताकत बढ़ाएगा और क्षेत्र में सबसे मजबूत शक्ति बन सकता है. इससे अमेरिका के लिए ईरान का मुकाबला करना और मुश्किल और महंगा हो जाएगा.
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