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'भारत- ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध, विदेश मंत्री जयशंकर से हुई बात'- ईरान के उप विदेश मंत्री सईद

US-Israel War against Iran: हिंद महासागर में अमेरिका के हमले में तबाह हुए जहाज को लेकर ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि वह जहाज भारत के न्योते पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था और उसपर कोई हथियार भी नहीं था. 

'भारत- ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध, विदेश मंत्री जयशंकर से हुई बात'- ईरान के उप विदेश मंत्री सईद
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने अमेरिकी हमले पर अपनी बात रखी

US-Israel War against Iran: ईरान की अमेरिका और इजरायल से जंग जारी है. ऐसे में ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर बात की है और कहा है कि ईरान और भारत के बीच बहुत पुराने सभ्यतागत संबंध हैं. हिंद महासागर में अमेरिका के हमले में तबाह हुए ईरानी जहाज को लेकर उन्होंने कहा कि वह जहाज भारत के न्योते पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था और उसपर कोई हथियार भी नहीं था. उप विदेश मंत्री सईद ने कहा है कि ईरान के पास अभी अमेरिका और इजरायल की घुसपैठ के खिलाफ वीरता से अपनी रक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि ईरान आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ाई करेगा.

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार सईद खातिबजादेह ने रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान बात की और कहा कि इस समय ईरान पूरी तरह युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है. उन्होंने हिंद महासागर में एक ईरानी जहाज के डूबने की घटना पर भी बात की और इसकी तुलना नाजी जर्मनी की कार्रवाइयों से की.

जहाज पर कोई हथियार नहीं था- सईद

उन्होंने कहा, “वह जहाज हमारे भारतीय दोस्तों के न्योतो पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था. वह केवल औपचारिक तौर पर वहां था. उस पर कोई सामान नहीं था और वह बिना हथियार के था. इतिहास में ऐसा पहले केवल नाजी दौर में हुआ था, जब बिना हथियार वाले जहाजों पर युद्ध क्षेत्र से दूर हमला किया गया था. इसलिए जब अमेरिकियों ने एक सेरेमोनियल, बिना हथियार और खाली जहाज पर हमला किया, तो यह नाजी जर्मनी जैसी कार्रवाई है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस अभ्यास में शामिल कई युवा ईरानी नाविकों की मौत हो गई. जिन्होंने यह किया है, उन्हें बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता.”

जब उनसे अमेरिका के जमीनी हमले की संभावना के बारे में पूछा गया, तो मंत्री ने कहा कि ईरान किसी भी “औपनिवेशिक मिशन” को रोकने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा, “मैं ओवल ऑफिस (अमेरिकी राष्ट्रपति के ऑफिस) में नहीं बैठा हूं, इसलिए मुझे नहीं पता कि वे क्या फैसला करेंगे. वे बाजार और दर्शकों के हिसाब से हर बार अपने लक्ष्य और रणनीति बदलते रहते हैं. लेकिन हम वीर राष्ट्रवादी रक्षा कर रहे हैं. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है, हमें उनकी आक्रामकता को रोकना है और इस क्षेत्र में उनके व्यवहार को बदलना है. वे अपनी सीमा से हजारों मील दूर आकर किसी दूसरे देश की राजनीतिक व्यवस्था बदलने और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने का औपनिवेशिक मिशन नहीं चला सकते.”

भारत के साथ संबंध पर

नई दिल्ली की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत हुई है और भारत और ईरान के बीच “सभ्यतागत संबंध” हैं.

उन्होंने कहा, “मेरी भारत के विदेश मंत्री से थोड़ी बातचीत हुई और यहां कुछ अन्य लोगों से भी मुलाकात हुई. ईरान और भारत के बीच बहुत पुराने सभ्यतागत संबंध हैं. हम इंडो-फारसी संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुए हैं. इसी सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के अनुसार हम ईरान-भारत संबंधों को बहुत महत्व देते हैं.”

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
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