- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौता न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है
- ट्रंप ने जिनेवा में हो रही बातचीत में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहने की बात कही , ईरान को बुरे वार्ताकार बताया
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जिनेवा पहुंचे और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के प्रमुख से मुलाकात की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार, 16 फरवरी को ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने परमाणु समझौता नहीं किया तो इसका अंजाम भुगतना होगा. यह चेतावनी अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान के बीच जिनेवा में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत से पहले दी गई है. वॉशिंगटन जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “मैं इन वार्ताओं में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहूंगा.” ट्रंप ने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के अंजाम भुगतना चाहेंगे.”
उन्होंने कहा, "मैं अप्रत्यक्ष रूप से उन वार्ताओं में शामिल रहूंगा. यह बहुत महत्वपूर्ण होगा. ईरान एक कठिन वार्ताकार है, लेकिन मैं कहूंगा कि वे बुरे वार्ताकार हैं, क्योंकि हम उनकी परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए बी-2 (बी-2 बॉम्बर) भेजने के बजाय एक समझौता कर सकते थे. मुझे उम्मीद है कि वे अधिक उचित होंगे. वे एक समझौता करना चाहते हैं... हमारे पास मिडिल ईस्ट में शांति है. आप यहां और वहां कुछ लपटें देखेंगे, लेकिन हमारे पास अनिवार्य रूप से मिडिल ईस्ट में शांति है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमने परमाणु क्षमता पर बी-2 हमला किया. अगर ऐसा नहीं होता तो उनके पास एक महीने के भीतर परमाणु हथियार होता.''
आज होनी है वार्ता
मंगलवार को प्रस्तावित बातचीत ओमान की मध्यस्थता में होनी है. सीएनएन के अनुसार, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर के बैठकों में भाग लेने की उम्मीद है. इसके लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जिनेवा पहुंचे हैं. जिनेवा पहुंचने के बाद अराघची ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी से मुलाकात की.
यह वार्ता ट्रंप द्वारा तेहरान के खिलाफ बार-बार दी गई सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद हो रही है. ट्रंप ने पहले ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर हुई घातक कार्रवाई को लेकर, और हाल में देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बार-बार उसे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. जहां अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों को आशंका है कि ईरान का यह परणामु कार्यक्रम परमाणु बम बनाने के लिए है, लेकिन ईरानी सरकार इस बात से इनकार करती है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को ट्रंप की चेतावनी से पहले कहा कि “ईरान के परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का रुख अब अधिक यथार्थवादी दिशा में बढ़ा है.” गौरतलब है कि वार्ताओं का एक पिछला प्रयास तब विफल हो गया था. ईरान और अमेरिका ने अप्रैल 2025 में मस्कट, ओमान और रोम, इटली में परमाणु वार्ता के पिछले दौर का आयोजन किया था. लेकिन यह प्रयास उस समय विफल हुआ जब इजरायल ने ईरान पर अचानक हमले किए, जिससे 12 दिनों का युद्ध शुरू हुआ था. इसके बाद जंग में अमेरिका भी शामिल हुआ और ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की गई.
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