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UP में पिता की हत्‍या, दिल्ली में बेटा करता रहा UPSC की तैयारी, कातिलों को सजा मिलने से पहले IPS बनकर लौटा

यूपी कैडर के 2023 बैच के आईपीएस बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या मामले में कोर्ट ने 9 दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई है. 2020 में पिता के निधन के बावजूद मां की प्रेरणा से बजरंग ने हिम्मत नहीं हारी और यूपीएससी क्रैक कर आईपीएस अधिकारी बने.

UP में पिता की हत्‍या, दिल्ली में बेटा करता रहा UPSC की तैयारी, कातिलों को सजा मिलने से पहले IPS बनकर लौटा
ips Bajrang prasad success story and father murder case
  • यूपी के अंडर ट्रेनी आईपीएस बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या के नौ दोषियों को दस-दस साल कैद की सजा मिली है
  • बजरंग प्रसाद ने पिता की हत्या के बावजूद यूपी कैडर में 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी बनने में सफलता हासिल की
  • हत्या की वारदात साल 2020 में जमीन विवाद के कारण हुई थी, जब बजरंग प्रसाद यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे

उत्तर प्रदेश में IPS आशुतोष मिश्रा की 95 वर्षीय मां की 16 अगस्‍त 2026 को हुई हत्या के मामले में हर क‍िसी को चौंका द‍िया. वहीं, यूपी में ही एक अंडर ट्रेनी आईपीएस बजरंग प्रसाद के प‍िता की हत्‍या का छह साल पुराना मामला फ‍िर्र चर्चा में है. भारतीय पुलिस सेवा के अफसर बजरंग प्रसाद के पिता राजेश कुमार यादव की हत्या के 9 दोषियों को अदालत ने दस-दस साल के कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 7,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. इस पूरी कहानी की खास बात यह है कि बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या के बाद भी बजरंग प्रसाद ने खुद को टूटने नहीं दिया और यूपी कैडर में साल 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. 

ips Bajrang prasad success story

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में अंडर-ट्रेनी एएसपी के पद पर कार्यरत आईपीएस बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या की वारदात जितनी दर्दनाक है, उतनी ही प्रेरणादायी बजरंग प्रसाद की सफलता की कहानी भी है. इस कठिन दौर में उनकी मां उनके लिए ढाल बनकर खड़ी रहीं, तो बेटे ने भी मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने तीसरे प्रयास में 454वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल करके यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली. 
2 स‍ितंबर 1998 को जन्‍मे बजरंग प्रसाद ने बीएससी तक की पढाई की है.  

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या साल 2020 में एक ज़मीनी विवाद के कारण हुई थी. उस समय बजरंग प्रसाद दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. बेटे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उनकी मां ने उन्हें पिता के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं होने दिया था. 

राजेश कुमार यादव की हत्या कैसे हुई थी?

9 अगस्त 2020 को बस्ती जिले के कलवारी पुलिस थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार, धोबहट गांव में सुबह दिनेश और उमेश खेत में चरी काट रहे थे. इसी दौरान उनका गांव के ही जगदीश से विवाद हो गया और लाठियां चल गईं. जब उमेश और दिनेश के सगे भतीजे यानी बजरंग के पिता राजेश कुमार यादव को इस हमले की जानकारी मिली, तो वे मोटरसाइकिल पर सवार होकर खेत की ओर जाने लगे. रास्ते में पक्के पुल बांध के पास घात लगाए कई लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने राजेश यादव को मृत घोषित कर दिया था. इस मामले में बजरंग के भाई अंबिका प्रसाद की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था. 

बजरंग प्रसाद ने शेयर की पिता की तस्वीर

अपर जिला जज प्रथम कमलेश कुमार की अदालत का फैसला आने के बाद, 14 अगस्त 2026 को आईपीएस बजरंग प्रसाद ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की तस्वीर साझा करते हुए लिखा-"सत्यमेव जयते. आज पिताजी की हत्या के जुर्म में सभी 9 अभियुक्तों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बस्ती द्वारा गैर-इरादतन हत्या के जुर्म में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और उन्हें जेल भेजा गया."    

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