विज्ञापन

अमेरिका-ईरान की 60 दिन की डील आज खत्म, अब क्या होगा? EXPLAINED

US-Iran agreement expire: 17 जून को अमेरिका और ईरान ने 14 प्वाइंट वाले MoU पर साइन किया था. 60 दिनों के अंदर दोनों देश अंतिम समझौते के लिए बातचीत करने वाले थे. लेकिन न जंग रुकी न मिडिल ईस्ट में शांति आई.

अमेरिका-ईरान की 60 दिन की डील आज खत्म, अब क्या होगा? EXPLAINED
तेहरान में जम्हूरी स्ट्रीट पर एक बड़े बिलबोर्ड पर अमेरिका से बदला लेने की कसम खाई गई है
  • ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को हुआ अंतरिम समझौता आज समाप्त हो रहा है. आगे बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं
  • ईरान ने बातचीत फिर शुरू करने का कोई फैसला नहीं किया है और अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है
  • दोनों देशों के बीच मतभेद और हमलों के कारण समझौता विफल रहा है और स्थायी समाधान अभी नजर नहीं आ रहा है

मिडिल ईस्ट में जारी जंग को खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच जो अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, वह सोमवार, 17 अगस्त को खत्म होने वाला है. दोनों देशों की तरफ से अभी तक इस समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर कोई साफ संकेत नहीं मिला है. इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर बातचीत करके अंतिम समझौते तक पहुंचना था, परमाणु समझौता करना था. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव और लड़ाई फिर बढ़ गई है. सवाल उठ रहा है कि अब MoU के खत्म होने के बाद दोनों के बीच बातचीत का क्या होगा.

ईरान ने कहा- बातचीत फिर शुरू करने का फैसला नहीं हुआ

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRIB को दिए इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थों के जरिए मैसेज भेजा और रिसीव किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इसका मतलब बातचीत बिल्कुल नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया है और इसके बाद दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई.

ईरान और ओमान के बीच इस समय बातचीत चल रही है. इसका मकसद होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक नया रास्ता तय करना है. अराघची ने कहा, “हम फिलहाल एक अस्थायी रास्ता तैयार कर रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी रास्ते में बदल जाएगा.”

इस अंतरिम समझौते में क्या था?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 17 जून को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) यानी अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसका मकसद तीन महीने से ज्यादा समय से चल रही जंग को रोकना था. इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हुई थी और खाड़ी के रास्ते होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था. खासकर तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा था, जिस पर दुनिया के कई देश निर्भर हैं.

14 बिंदुओं वाले इस समझौते में दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे कई बड़े और मुश्किल मुद्दों को बाद में सुलझाने की बात कही गई थी. लेकिन तात्कालिक रूप से इसका मकसद कूटनीति के जरिए युद्ध रोकना और लेबनान में चल रहा संघर्ष खत्म करना था. समझौते में कहा गया था कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों पर तुरंत और स्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई बंद करेंगे. इसमें लेबनान भी शामिल था.

  • समझौता 60 दिनों का हुआ था और इसके अंदर परमाणु समझौते के लिए बातचीत करने का लक्ष्य रखा गया था. 
  • समझौते के तहत अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के अंदर अमेरिका को ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी खत्म करनी थी.
  • अमेरिका को ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण और विकास पैकेज तैयार करने पर भी काम शुरू करना था.
  • इसके अलावा अमेरिका को ईरान पर लगी पाबंदियां हटानी थीं, ईरान के तेल निर्यात के लिए छूट देनी थी और विदेशों में फंड़ी ईरान की अरबों डॉलर की रकम तक उसकी पहुंच बहाल करनी थी.
  • दूसरी तरफ, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटानी थीं और 60 दिनों तक जहाजों को बिना किसी टोल के गुजरने देना था.
  • ईरान ने यह भी दोहराया था कि वह परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही बनाएगा और मौजूदा स्थिति को बनाए रखेगा.

समझौता कितना सफल रहा?

समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन के अंदर ही अमेरिका और ईरान के बीच इसके मतलब को लेकर मतभेद सामने आने लगे. दोनों देशों ने समझौते की अलग-अलग भाषा इस्तेमाल की. खास तौर पर इस बात पर मतभेद था कि यह सिर्फ सीजफायर यानी युद्ध रोकने का समझौता है या ज्यादा स्थायी शांति की ओर कदम है. साथ ही यह भी साफ नहीं था कि किस पक्ष को क्या-क्या करना है. समझौते के करीब दो हफ्ते बाद ही दोनों देशों ने एक-दूसरे पर इसकी शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया.

इसके बाद होर्मुज के नियंत्रण को लेकर दोनों तरफ से हमले हुए. ट्रंप ने इलाके में ईरान के हमलों को समझौते का बेवकूफी भरा उल्लंघन बताया. वहीं, ईरान ने कहा कि अमेरिका के हमलों ने समझौते के पहले अनुच्छेद का उल्लंघन किया है.

7 जुलाई को ट्रंप ने कहा कि यह समझौता “खत्म हो चुका है”. अमेरिका ईरान पर हमले करता रहा. इनमें ऐसे ठिकाने भी शामिल थे, जिन्हें ईरान ने नागरिक ढांचा बताया था. इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका से साथी देशों पर हमले किए. होर्मुज में फिर से नाकेबंदी शुरू हो गई.

अब आगे क्या होगा?

समझौता खत्म होने का असल मतलब क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप यह सवाल अमेरिका से पूछ रहे हैं या ईरान से. दोनों ही देश इस युद्ध में अपनी जीत का दावा कर चुके हैं. लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है. वहीं, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका के हथियारों का भंडार खतरनाक रूप से कम होता जा रहा है. CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में ट्रंप के सामने अमेरिका को एक और ऐसी जंग में फंसाने का खतरा है, जिसे खत्म करना बेहद मुश्किल हो सकता है और जिसे “फॉरएवर वॉर” यानी कभी खत्म न होने वाली जंग कहा जा सकता है.

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालना अमेरिका की मौजूदा रणनीति का हिस्सा है. वहीं ईरान अपने रुख पर कायम है. ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल अपने युद्ध के शुरुआत में तय किए गए किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं पूरे दिल से कहता हूं कि हमने यह युद्ध जीत लिया है.”

यह भी पढ़ें: सुलह के लिए ईरान के सबसे ताकतवर गुट से अमेरिका ने की थी चुपके से बात! लेकिन ट्रंप का प्लान B भी फेल

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
US Iran War, US Iran MoU, US Iran War News Update
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com