पाकिस्तान में एक बार फिर ईरान और अमेरिका वार्ता की मेज पर आए हैं. लेकिन संशय के बादल अब भी मंडरा रहे हैं कि ये वार्ता कितनी सफल होगी. खासकर तब जब ईरान की ओर से कह दिया गया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा. ऐसे में पाकिस्तान को डाकिया की भूमिका निभानी होगी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच कोई मीटिंग प्लान नहीं है. उन्होंने X पर एक मैसेज में लिखा कि ईरान इसके बजाय पाकिस्तानी अधिकारियों के ज़रिए अपनी बात बताएगा. उन्होंने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद में सीनियर पाकिस्तानी नेताओं के साथ बातचीत के लिए गए हैं.
अमेरिका की ओर से कौन है डेलिगेशन का हिस्सा?
अमेरिका की ओर से इसबार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस डेलिगेशन के हिस्सा नहीं होंगे. राष्ट्रपति ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि ईरान के साथ शांति वार्ता में यूनाइटेड स्टेट्स के दो लीड नेगोशिएटर जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ होंगे.उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस मीटिंग से पॉजिटिव डेवलपमेंट होंगे. अपडेट्स के लिए ट्रंप, जेडी वेंस उनका यूनाइटेड स्टेट्स में इंतजार करेंगे."
ईरान की ओर से भी डेलीगेशन नहीं आए गालिबाफ
गौरतलब है कि ईरान की ओर पिछली बार ईरानी संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ बातचीत को लीड कर रहे थे. इस बार की शांति वार्ता में वह नहीं आए हैं. हालांकि दोनों देश एक बार फिर से बातचीत की मेज पर हैं, ये इस बात का संकेत भी है कि दोनों देशों में भले ही कड़वाहट हो लेकिन जंग को रोकने की कूटनीतिक कोशिशें अब भी जारी हैं.
जंग का अहम मोड़ है ये वार्ता
ईरान और अमेरिका के लिए इस्लामाबाद में दूसरे राउंड की बातचीत बेहद अहम है. खासकर ऐसे वक्त में जब अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप सीजफायर को आगे बढ़ाने के बाद दबाव में हैं. अगर इस्लामाबाद वार्ता के दूसरे राउंड में भी बात नहीं बनती तो मध्य पूर्व एक बार फिर से जंग की आग में झुलस सकता है और शांति दूर की कौड़ी लग सकती है.
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