US Iran Ceasefire Deal: मिडिल ईस्ट में जंग को रोकने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच हुआ सीजफायर समझौता एक दिन के अंदर ही बहुत कमजोर स्थिति में दिखाई देने लगा है. ईरान ने लेबनान में इजरायल की भारी बमबारी के विरोध में फिर से हॉर्मुज को बंद कर दिया है. जबकि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने मांग की है कि इस समुद्री रास्ते को फिर से खोला जाए. इसी रास्ते से आमतौर पर दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. अमेरिका चाहता है कि शांति वार्ता जारी रहे. इस समय लेबनान को छोड़कर पूरा मिडिल ईस्ट एक हद तक शांत नजर आ रहा है लेकिन लेबनान में जो तबाही मची है, वो इस शांति को किसी भी वक्त जंग के भयावह रूप में बदल सकती है.
इजरायल ने लेबनान में लेबनान में मौजूद हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले तेज कर दिए और पूरे देश में व्यापारिक और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. आम लोग मर रहे हैं. सीजफायर के बाद इजरायल ने लेबनान पर उस स्तर का हमला किया जो पूरे जंग में नहीं देखने को मिला. सवाल है कि लेबनान में जंग क्यों नहीं रुकी है.
लेबनान में तबाही
बुधवार की दोपहर लेबनान की राजधानी बेरूत के रिहायशी इलाकों में कम से कम पांच लगातार हमले हुए. इजरायल की सेना ने कहा कि उसने युद्ध का सबसे बड़ा कोऑर्डिनेटेड हमला शुरू किया है. इजरायल ने दस मिनट के अंदर बेरूत, बेका घाटी और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के 100 से अधिक कमांड सेंटर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. लेबनान की सिविल डिफेंस सेवा के अनुसार एक दिन के अंदर पूरे लेबनान में 254 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. सबसे ज्यादा मौतें बेरूत में हुईं, जहां 91 लोग मारे गए.
इजरायली सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि लितानी नदी के दक्षिण का इलाका अब लेबनान से अलग हो गया है. इजरायल का कहना है कि वह इस इलाके को “बफर जोन” के रूप में कब्जा करना चाहता है. इजरायल ने वहां अस्पतालों और बिजलीघरों पर भी हमले किए हैं. वहां अभी भी रह रहे हजारों लेबनानी नागरिकों का कहना है कि उन्हें खाने और दवाइयों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
इज़राइल ने लेबनान के लगभग 15 प्रतिशत इलाके में लोगों को जगह खाली करने का आदेश दिया है. इनमें ज्यादातर क्षेत्र दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी उपनगर हैं. अब तक लेबनान में 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं. कई लोगों को उम्मीद थी कि युद्धविराम होने पर वे अपने घर वापस जा सकेंगे. बुधवार के हमलों से पहले ही, लेबनान में इजरायल के हवाई और जमीनी अभियान में 1,500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके थे, जिनमें 130 से अधिक बच्चे भी शामिल थे.
क्या सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं था?
लेबनान में नई हिंसा ने उस सीजफायर डील को खतरे में डाल दिया जिसे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने “बहुत नाजुक समझौता” कहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि लेबनान में युद्ध खत्म करना भी सीजफायर समझौते का हिस्सा था. लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता.
जब यह समझौता घोषित किया गया था, तब बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह समझौता “हर जगह लागू होगा, जिसमें लेबनान और अन्य स्थान भी शामिल हैं.” अब ईरान ने कहा है कि सीजफायर की 10 शर्तों में से 3 को 24 घंटे के अंदर तोड़ दिया गया है जिसमें लेबनान में हमला नहीं करना भी शामिल है. ऐसे में न तो सीजफायर का मतलब है और न ही बातचीत का कोई मतलब है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं