US H-1B Visa Fees: अमेरिकी सरकार चाहे H-1B वीजा जल्दी जारी करने के लिए एक लाख डॉलर वसूल रही है, लेकिन इसका क्रेज बना हुआ है. यह वीजा अमेरिका में काम करने के लिए जरूरी है. वित्त वर्ष 2026 में H-1B वीजा के लिए अप्लाई करने वालों में से 2 लाख से अधिक लोगों ने एक लाख अमेरिकी डॉलर की फीस देकर प्राथमिकता के आधार पर अपने अप्लीकेशन का निपटारा कराने का विकल्प चुना है. एक लाख अमेरिकी डॉलर भारतीय रुपए में लगभग 96 लाख के बराबर होता है. अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के मंत्री मार्कवायने मुलिन ने यह जानकारी दी है.
सीनेट की विनियोग उपसमिति के समक्ष मंगलवार को मुलिन ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में DHS को लगभग 2.86 लाख H-1B वीजा के आवेदन प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अमेरिका के ग्रामीण हिस्सों में डॉक्टरों की कमी पर अमेरिकी सीनेटर सुसैन कॉलिन्स के सवाल पर कहा, ‘‘इस साल अब तक हमें एच-1बी वीजा के लिए 2.86 लाख आवेदन मिले हैं. इनमें से दो लाख से अधिक आवेदकों ने एक लाख डॉलर की फीस दी है, क्योंकि इससे उनके आवेदनों का अपेक्षाकृत तेजी से निपटारा किया जा सकता है.''
अमेरिका में डॉक्टरों और टीचरों की किल्लत
अमेरिकी सीनेटर कॉलिन्स ने उपसमिति को बताया कि एक गांव के अस्पताल को विदेश से एक अत्यंत आवश्यक सर्जन नियुक्त करने के लिए यह फीस चुकानी पड़ी है. उन्हें यह विदेशी डॉक्टर जल्द से जल्द चाहिए था. उन्होंने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले संस्थानों के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए जैसा किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में घरेलू वर्कर्स उपलब्ध होने के बावजूद अत्यधिक कुशल पेशेवरों की भर्ती करने वाली कंपनियों के साथ किया जाता है.
कॉलिन्स ने पूछा, ‘‘क्या आप इस बात पर विचार करेंगे कि डॉक्टरों को इस फीस से छूट दी जाए, यदि कोई समुदाय यह साबित कर सके कि वहां कोई जरूरी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है?''
इस पर मुलिन ने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में संभावित समाधान तलाशेंगे और देखेंगे कि क्या ऐसे मामलों में परिस्थितियों के आधार पर कुछ नरमी बरती जा सकती है. कॉलिन्स ने कहा, ‘‘कैलिफोर्निया और सिलिकॉन वैली में काम करने के लिए किसी दूसरे देश से कंप्यूटर एक्सपर्ट लाने और उत्तरी मेन के किसी गांव के हॉस्पिटल के लिए अत्यंत आवश्यक सर्जन लाने में बहुत बड़ा अंतर है.''
वहीं, अलास्का से रिपब्लिकन सीनेटर लीसा मुर्कोव्स्की ने अपने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया. उन्होंने मुलिन से कहा, ‘‘मैं H-1B वीजा के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती से जुड़े उस मुद्दे पर आपसे फिर चर्चा करूंगी, जिसे मैंने पहले उठाया था.''
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