
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो पहले 25 प्रतिशत था.
- अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ का मानना है कि यह कदम अमेरिका के लिए खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है
- ट्रंप के इस कदम से ब्रिक्स देशों को पश्चिमी आर्थिक प्रभुत्व का विकल्प बनने का अवसर मिल रहा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत वाला टैरिफ बम फोड़ा है और इसका विरोध उन्हें अपने घर में भी झेलना पड़ रहा है. पहले उन्हें अमेरिकी संसदीय कमेटी के डेमोक्रट्स सदस्यों ने घेरा तो अब वहां के अर्थशास्त्री भी बता रहे हैं कि उनका यह कदम क्यों बैकफायर कर सकता है. अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि अमेरिका भारत के खिलाफ "दुनिया के सबसे सख्त आदमी" की तरह काम कर रहा है, लेकिन वह केवल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है. इसकी वजह है कि अमेरिका अपने इस कदम से ब्रिक्स को पश्चिम का आर्थिक विकल्प बनने का मौका दे रहा है.
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत अब पृथ्वी पर सबसे बड़ा (आबादी वाला) देश है. संयुक्त राज्य अमेरिका का भारत को यह बताना कि क्या करना है, एक चूहे द्वारा हाथी पर अपना मुक्का मारने जैसा है."
Economist RIchard Wolff tells RT that America is "hothousing" BRICS with its aggressive tariff threats.
— Margarita Simonyan (@M_Simonyan) August 28, 2025
"If you shut off the US to India by big tariffs, it will have to find new places to sell its exports.
Just like Russia found new markets, India will sell its exports not to… pic.twitter.com/xEO4lGp0zS
रूस टुडे के साथ एक इंटरव्यू में, वोल्फ ने कहा कि अगर अमेरिका भारत के लिए रास्ता बंद कर देता है तो भारत अपने निर्यात को बेचने के लिए अन्य स्थान ढूंढ लेगा, और यह कदम केवल ब्रिक्स देशों को मजबूत करेगा. उन्होंने कहा, "लेकिन जैसे रूस को अपनी ऊर्जा बेचने, खरीदने के लिए एक और जगह मिल गई, वैसे ही भारत अपना निर्यात अब संयुक्त राज्य अमेरिका को नहीं, बल्कि बाकी के ब्रिक्स देशों को बेचेगा."
ब्रिक्स एक समूह है जिसमें दस देश शामिल हैं - ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात. इस ब्लॉक का लक्ष्य पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व का मुकाबला करना है और कहा जाता है कि यह डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए विकल्प तलाश रहा है.
वोल्फ ने पॉडकास्ट में कहा, "यदि आप चीन, भारत, रूस और ब्रिक्स को लेते हैं, तो उन देशों द्वारा उत्पादित विश्व उत्पादन का कुल हिस्सा 35% है. जबकि G7 लगभग 28% के साथ कम है."
वोल्फ एक अमेरिकी मार्क्सवादी अर्थशास्त्री हैं. उन्होंने ब्रिक्स ब्लॉक को पोषण देने वाले ट्रंप टैरिफ के बारे में चेतावनी दी, "और आप जो कर रहे हैं वह आपका हॉटहाउस फैशन है, ब्रिक्स को पश्चिम के लिए एक बड़ा, अधिक एकीकृत और सफल आर्थिक विकल्प के रूप में विकसित करना. हम एक ऐतिहासिक क्षण देख रहे हैं."
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