- क्रिस्टा पाइक कोbt मौत की सजा मिलने के बाद जहरीला इंजेक्शन लगने के बावजूद बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है
- 18 वर्ष की उम्र में हत्या के आरोप में सजा पाने वाली क्रिस्टा पाइक ने मौत की सजा मिल है
- पाइक की मेडिकल रिकवरी अभूतपूर्व मानी जा रही है, लेकिन उन्हें अभी भी हथकड़ी और बेड़ियों से बांधा गया है
जो अमेरिका के इतिहास में अब तक नहीं हुआ था, वह हो चुका है. अमेरिका में मौत की सजा का इंतजार कर रही हत्या की दोषी क्रिस्टा पाइक को पिछले हफ्ते जहर का दो इंजेक्शन दिया गया था. लेकिन वह कोशिश नाकाम रही और अब वह होश में हैं और बात कर रही हैं. उनके वकीलों ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि 50 साल की क्रिस्टा पाइक को अस्पताल में हथकड़ी लगी हुई है और उन्हें जरूरी मेडिकल केयर मिल रही है. यह अपने आप में बड़ी खबर है क्योंकि माना जाता है कि क्रिस्टा अमेरिका के इतिहास में अकेली ऐसी इंसान है जो जानलेवा इंजेक्शन लगाए जाने के बावजूद जिंदा बच गई है.
मौत को छूकर टक से वापस...
दरअसल क्रिस्टा पाइक को मात्र 18 साल की उम्र में अपने तब के बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर की गई हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. उन्हें एक हफ्ते पहले टेनेसी की जेल में पेंटोबार्बिटल दवा की दो ऐसी डोज दी गईं, जिनसे मौत पक्की मानी जाती है. यह जहरीला इंजेक्शन है. लेकिन वह इंजेक्शन लगने के बाद भी बच गईं. उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां वह बेहोश थीं और गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर थीं. अब उनके वकीलों ने मंगलवार को कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद अब वह होश में हैं, बात कर रही हैं और उन्हें लगातार गंभीर मेडिकल देखभाल मिल रही है.
वकीलों ने एक बयान में कहा, "हाथों में गंभीर चोट लगने के बावजूद, उन्हें अभी भी हथकड़ी और बेड़ियों से बिस्तर से बांधकर रखा गया है... उनकी रिकवरी मेडिकल के नजरिए से अभूतपूर्व है. उनके ठीक होने के बारे में अभी कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता, लेकिन कम से कम हमें उम्मीद है कि उन्हें ठीक होने में लंबा समय लगेगा."
ऐसा पहली बार हुआ है
डेथ पेनल्टी इन्फॉर्मेशन सेंटर अमेरिका में मौत की सजा से जुड़े आंकड़े और एनालिसिस छापता है. उसने कहा कि पाइक ऐसी पहली कैदी हैं जो मौत की सजा वाली जानलेवा दवा का इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी बच गई है. फोर्डहम लॉ स्कूल की प्रोफेसर और क्रिमिनोलॉजिस्ट डेबोरा डेनो ने कहा कि उन्हें यह जानकर बहुत हैरानी हुई कि पाइक होश में हैं और बात कर रहे हैं. डेनो ने BBC को बताया कि ऐसे सात और मामले भी सामने आए हैं जिनमें कैदी तय की गई फांसी या मौत की सज़ा से बच गए, लेकिन उन मामलों में कैदियों की नसों में कोई इंजेक्शन नहीं लगा पाया गया था. यहां तो क्रिस्टा पाइक जहरीला इंजेक्शन लगाए जाने के बावजूद बच गई है.
इंजेक्शन लगाने की तारीख से पहले ही इस मामले ने अमेरिका में लोगों का ध्यान खींचा था, क्योंकि क्रिस्टा पाइक 200 से ज्यादा सालों में टेनेसी राज्य द्वारा मौत की सजा पाने वाली पहली महिला होतीं. तय रात, पत्रकार पाइक के आखिरी शब्द सुनने और उनकी मौत की घटना को रिकॉर्ड करने के लिए इकट्ठा हुए थे. लेकिन इसके बजाय, वे हैरान होकर विटनेस चैंबर से बाहर निकले और बताया कि जानलेवा इजेंक्शन दिए जाने के बाद भी वह सांस ले रही थीं और यहां तक कि खर्राटे भी ले रही थीं. 'डेथ पेनल्टी इन्फॉर्मेशन सेंटर' के अनुसार, 1976 से अब तक अमेरिका में 18 महिलाओं को फांसी दी जा चुकी है.
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