- यूक्रेन के सैनिक महीनों तक उचित भोजन और पानी के बिना मोर्चे पर तैनात रहे, जिससे वे बेहद कमजोर हो गए हैं
- एक सैनिक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर भूख और पानी की कमी की तस्वीरें साझा कर युद्ध की सच्चाई उजागर की
- यूक्रेन की 14वीं मशीनीकृत ब्रिगेड के सैनिक कुपियांस्क के पास कठिन हालात में फंसे हुए हैं और भूख से जूझ रहे हैं
यूक्रेन के राष्ट्रपति फिलहाल सऊदी अरब दौरे पर हैं. वहां वो मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सौदा करने गए हैं. ईरान युद्ध में जेलेंस्की भी अपने हथियारों को बेचकर कमाई का जरिए ढूंढ रहे हैं. इस बीच यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने एक शीर्ष कमांडर को बर्खास्त कर दिया है. कारण बहुत ही भयानक है. दरअसल, यूक्रेन के सैनिकों की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. ये सैनिक महीनों से बिना उचित भोजन और पानी के मोर्चे पर तैनात हैं और बेहद कमजोर हो चुके हैं. यह विवाद तब सामने आया जब एक सैनिक की पत्नी अनास्तासिया सिलचुक ने इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया. तस्वीरों में चारों सैनिक पीले और कुपोषित दिख रहे थे, उनकी पसलियां उभरी हुईं थीं और बांहें पतली थीं. उनके रिश्तेदारों ने बताया कि ये सैनिक आठ महीने से उत्तर-पूर्वी यूक्रेनी शहर कुपियांस्क के पास, ओस्किल नदी के बाएं किनारे पर स्थित एक छोटे से भूभाग की रक्षा कर रहे थे. यहां भोजन और दवाओं की आपूर्ति केवल ड्रोन के माध्यम से ही की जा सकती थी.
सिलचुक ने दुनिया को दिखाई जंग की असलियत
द गार्जियन के अनुसार, सिलचुक ने पोस्ट किया, “जब जवान मोर्चे पर पहुंचे थे, तब उनका वजन 80-90 किलो से ज्यादा था, लेकिन अब उनका वजन लगभग 50 किलो है.” उन्होंने बताया कि एक बार खाना पहुंचाने के बाद 10 दिनों तक कोई खाना नहीं आया. सैनिकों को जिंदा रहने के लिए बारिश का पानी और पिघली हुई बर्फ पीनी पड़ी. उन्होंने कहा, “सबसे लंबे समय तक वे 17 दिनों तक बिना खाने के रहे. रेडियो पर उनकी बात नहीं सुनी गई, या शायद कोई सुनना ही नहीं चाहता था. मेरे पति चिल्लाते और गिड़गिड़ाते रहे कि खाना-पानी नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि यह समस्या सिर्फ एक मामले से कहीं ज्यादा बड़ी है.

एक अन्य रिश्तेदार, इवाना पोबेरेज़्न्युक ने कहा कि 14वीं अलग मशीनीकृत ब्रिगेड के सैनिक बेहद मुश्किल हालात में फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा, “भूख से सैनिक बेहोश हो रहे हैं.” उन्होंने बताया कि उनके पिता को वहां से निकाल लिया गया है, लेकिन बाकी लोग अभी भी वहीं फंसे हुए हैं.
रूस की निगाह हर जगह
2022 की शुरुआत में व्लादिमीर पुतिन के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से, दोनों पक्षों के बीच का अस्पष्ट क्षेत्र बढ़ गया है. दोनों पक्ष निगरानी और बख्तरबंद वाहनों और पैदल सेना को निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोनों का उपयोग करते हैं. सैनिकों को अपनी अग्रिम चौकियों तक पहुंचने के लिए 10-15 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. हाल के महीनों में, यूक्रेन ने असुरक्षित क्षेत्रों में आपूर्ति पहुंचाने और घायल सैनिकों को निकालने के लिए मानवरहित जमीनी रोबोटों का अधिकाधिक उपयोग किया है. कुपियांस्क क्षेत्र में, रूस ने ओस्किल नदी पर बने पुलों को नष्ट कर दिया है, ताकि यूक्रेनी सेना को नदी के बाएं किनारे से अलग-थलग किया जा सके.

यूक्रेन की सेना ने क्या कहा
यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने कहा कि उन्होंने सैनिकों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार कमांडर को बदल दिया है. ब्रिगेड ने रसद संबंधी समस्याओं को स्वीकार किया और कहा कि आपूर्ति केवल हवाई मार्ग से ही संभव है, क्योंकि उनका स्थान दुश्मन की सीमा रेखा के बेहद करीब है. एक प्रवक्ता ने कहा: “सब कुछ ड्रोन द्वारा किया जाता है. रूसी भोजन, गोला-बारूद और ईंधन की आपूर्ति की पूरी निगरानी करते हैं. वे यथासंभव ड्रोनों को रोकते और मार गिराते हैं. कभी-कभी वे वास्तव में हमारे सैन्य उपकरणों से अधिक रसद में रुचि रखते हैं.” यूक्रेन के सैन्य कमान ने कहा कि उसने जांच शुरू कर दी है. इसमें आगे कहा गया है, “यह उल्लेखनीय है कि हाल ही में 14वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के ठिकाने पर भोजन की एक और खेप पहुंचाई गई है. यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो हमारे सैनिकों को तुरंत निकाला जाएगा.”
पत्नी ने की अपील
सिलचुक ने शुक्रवार को कहा कि मामला सामने आने के बाद से हालात में सुधार हुआ है. उन्होंने पोस्ट किया, “एक नया कमांडर आया है. उसने हमें फोन किया और कहा कि स्थिति सुधर रही है. और यह सचमुच सुधर रही है. मेरे पति ने मुझे लिखा कि उन्होंने पिछले आठ महीनों में जितना खाया है, उससे कहीं अधिक खाया है.” उन्होंने आगे कहा, “लड़के इस समय थोड़ा-थोड़ा करके खा रहे हैं. उनका पेट सिकुड़ गया है, और उन्हें नहीं पता कि उन्हें कल खाना मिलेगा या नहीं. मेरा मानना है कि इस स्थिति को सार्वजनिक करना आवश्यक था. सैनिकों की अदला-बदली होनी चाहिए; जवानों को चिकित्सा उपचार की आवश्यकता है.”
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