Ukraine War: UNGA ने फिर से बुलाया दूसरा आपातकालीन विशेष सत्र, 22 देशों ने की थी मांग

Ukraine War: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा कि वह 23 मार्च को महासभा में आपातकालीन विशेष सत्र बुलाएंगे. 22 सदस्य देशों ने एक पत्र भेजा था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा के 11वें आपातकालीन विशेष सत्र को फिर से शुरू करने की मांग की गई थी.

Ukraine War: UNGA  ने फिर से बुलाया दूसरा आपातकालीन विशेष सत्र, 22 देशों ने की थी मांग

Ukraine Russia मुद्दे पर एक बार फिर UNGA का आपात सत्र बुलाने की मांग की गई थी

यूक्रेन (Ukraine) पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का आपातकालीन विशेष सत्र बुधवार को फिर से शुरू होगा. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा कि वह 23 मार्च को महासभा में आपातकालीन विशेष सत्र बुलाएंगे. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 22 सदस्य देशों ने बैठक बुलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यीय निकाय के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद को पत्र लिखा था. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 28 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता पर एक दुर्लभ आपातकालीन सत्र बुलाया था.शाहिद ने 28 फरवरी से दो मार्च तक चले सत्र की अध्यक्षता की थी. 1950 के बाद से यह महासभा का 11वां आपातकालीन सत्र था. शाहिद को 22 सदस्य देशों ने एक पत्र भेजा था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा के 11वें आपातकालीन विशेष सत्र को फिर से शुरू करने की मांग की गई थी.

सत्र को फिर से शुरू करने के लिए शाहिद को पत्र लिखने वाले देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, पोलैंड, तुर्की, यूक्रेन, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.

महासभा ने दो मार्च को सत्र सम्पन्न होने से पहले यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए मतदान किया था और यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़ी निंदा की थी.

भारत सहित 34 अन्य देशों ने इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया था. प्रस्ताव को 141 मतों से पारित किया गया था, जबकि इसके खिलाफ पांच सदस्य देशों ने वोट दिया था.

प्रस्ताव में राजनीतिक वार्ता, बातचीत, मध्यस्थता और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के तत्काल शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह किया गया है.

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महासभा के अध्यक्ष की प्रवक्ता पॉलिना कुबियाक ग्रीर ने बताया कि यूक्रेन और अन्य सदस्य देशों द्वारा प्रायोजित एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है और उस पर गौर किया जा रहा है.