नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.5 आंकी गई है. बताया जा रहा है कि भूकंप की वजह से जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है. मिल रही जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है. नेपाल में आए इस भूकंप के झटकों को आसपास के इलाकों में भी महसूस किया गया है.
आपको बता दें कि हिमालय की तलहटी में बसे होने के कारण नेपाल भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाकों में से एक है. यहां पहले भी काफी भयावह भूकंप आ चुके हैं. नेपाल में पिछले साल 28 फरवरी तड़के सुबह भूंकप आया था. उसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 तीव्रता आंकी गई थी. इसका असर बिहार में भी महसूस किया गया था. साथ ही पाकिस्तान में भी रिक्टर पैमाने पर 4.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें भूकंप की गहराई 10 किमी थी.
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तिब्बत की बात करें तो पिछले तीन दिनों के अंदर 5 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उस दौरान भी पिछले एक महीने में जहां नेपाल में आए भूकंपों की संख्या 5 रही है वहीं तिब्बत में यह आंकड़ा 40 था.
भूकंप क्यों आता है?
पहले हम धरती की बनावट को समझते हैं. इसकी बाहरी सतह (जिसमें क्रस्ट और ऊपरी मेंटल आते हैं) 15 बड़ी और छोटी प्लेटों से बनी हुई है. ऐसा नहीं है कि ये प्लेट स्थिर हैं. बल्कि ये बहुत धीरे इधर-उधर घूमती हैं. जब ये प्लेट एक दूसरे के सापेक्ष (आमने-सामने) में मूव करते हुए एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तब भूकंप आता है.
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे की साइट के अनुसार धरती के नीचे मौजूद ये प्लेट हमेशा धीरे-धीरे चलती हैं. घर्षण यानी फ्रिक्शन के कारण वे अपने किनारों पर अटक जाती हैं. इस कारण जब किनारे पर पड़ रहा तनाव फ्रिक्शन के फोर्स से ज्यादा हो जाता है, तो एनर्जी रिलीज होती है. जब यह एनर्जी लहर के रूप में धरती की परत से होकर गुजरती है तो हमें कंपन महसूस होता है. इसी कंपन को भूकंप आना कहते हैं और इसको रिक्टर स्केल पर नापते हैं.
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