विज्ञापन

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अगर टैरिफ को अवैध घोषित किया तो क्या होगी ट्रम्प की अगली चाल?

जिस कानून के तहत ट्रंप ने टैरिफ लगाया उसमें 'टैरिफ' शब्द ही नहीं. क्या सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप का फैसला पलटने वाला है. अगर ट्रम्प के लगाए टैरिफ रद्द हो गए तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर होगा. पर क्या होगी ट्रंप की अगली चाल?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अगर टैरिफ को अवैध घोषित किया तो क्या होगी ट्रम्प की अगली चाल?
AFP
  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रम्प के टैरिफ वैधता पर फैसला करेगी, जो व्यापार और आर्थिक नीति को प्रभावित कर सकता है.
  • अगर टैरिफ रद्द हुए तो अमेरिकी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों को रिफंड देना पड़ सकता है.
  • पर राष्ट्रपति ट्रम्प ने पहले ही नया टैरिफ प्लान तैयार कर रखा है ताकि नीति में अचानक किसी बदलाव से बचा जा सके.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सत्ता में लौटे एक साल पूरे हो गए हैं और उनकी दूसरी पारी के पहले ही वर्षगांठ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट एक अहम फैसला सुनाने जा रहा है. दरअसल 2025 में वापसी के बाद से ही ट्रंप ने दुनिया भर के विभिन्न देशों पर जबरदस्त टैरिफ लगाए हैं. जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रम्प ने जो टैरिफ लगाए हैं, वे संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध हैं या नहीं. अगर कोर्ट ट्रम्प के टैरिफ को अवैध करार देता है, तो इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और न केवल अमेरिका बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संतुलन पर भी पड़ेगा.

टैरिफ का इतिहास: ट्रम्प की आर्थिक रणनीति

ट्रम्प ने जनवरी 2025 में सत्ता में लौटते ही इंटरनैशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला देकर दुनिया के बड़े अमेरिकी बिजनेस साझेदारों पर भारी टैरिफ लगा दिया था.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट
Photo Credit: AFP

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल (20 जनवरी 2025) आज ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण किया था. सत्ता में लौटते ही अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) का हवाला देकर दुनिया के बड़े अमेरिकी बिजनेस साझेदारों पर भारी टैरिफ लगा दिया था. ट्रंप ने इसे अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने, घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देने से जोड़ा और जानकारों ने इसे विदेशी देशों को दबाव में लाने की नीति से- खास कर अमेरिका के सबसे बड़े सप्लायर्स चीन, मैक्सिको, कनाडा और यूरोपीय देशों को.

आलोचक कहते हैं कि ट्रम्प ने कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के बिना ये टैरिफ लगाए, जिससे उनकी वैधता पर सवाल उठने लगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार और अमेरिका की आर्थिक नीति के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता है.

ये भी पढ़ें: फ्रांस ने नहीं दिया भाव तो बौखलाए ट्रंप ने दिया घाव! फ्रेंच शैंपेन और वाइन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी

क्या ट्रम्प के पास अधिकार था?

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सवाल यह है कि क्या ट्रम्प की टैरिफ नीति अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) जैसी 1977 की शक्तियों के तहत लागू की जा सकती है. अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) मूल रूप से राष्ट्रीय आपात स्थिति में विदेशी संपत्तियों और लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई थी, न कि सभी देशों पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए.

ट्रंप की टैरिफ को चुनौती देने वाले राज्यों और निजी समूहों के वकीलों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) 1977 का वो कानून है जिसका इस्तेमाल ट्रंप प्रशासन ने सबसे अधिक टैरिफ लगाने के लिए किया था, पर उसमें 'टैरिफ' शब्द का जिक्र ही नहीं है. उनका तर्क है कि अमेरिकी संविधान के तहत केवल कांग्रेस (अमेरिकी संसद) ही टैक्स लगा सकती है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कोर्ट टैरिफ रद्द कर देता है, तो इसका मतलब होगा कि राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की अनुमति के ऐसे बड़े आर्थिक कदम उठाने का अधिकार नहीं है.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

ट्रम्प की प्रतिक्रिया और चेतावनी

टैरिफ पर फैसले से पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर चेतावनी दी कि अगर टैरिफ रद्द हुए तो अमेरिका को पूरी तरह अस्त-व्यस्त स्थिति का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि शुल्कों को वापस करना हजारों अरब डॉलर में हो सकता है और इसे संभालना लगभग असंभव होगा.

हाल के आंकड़ों के मुताबिक IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से 130 बिलियन डॉलर से अधिक अमेरिका में आए हैं. जो हर तरह के टैरिफ के आधे से भी अधिक है. हालांकि यह अमेरिकी सरकार के अर्जित किए जाने वाले कुल राजस्व का महज एक छोटा सा हिस्सा है. लेकिन ट्रंप के मुताबिक अगर रिफंड करना पड़ा तो यह अमेरिका के लिए यह लगभग असंभव होगा.

ट्रम्प ने यह भी कहा कि रिफंड प्रक्रिया जटिल होगी और वैश्विक कंपनियों के लिए संकट पैदा कर सकती है. उनके अनुसार, यह केवल अमेरिकी खजाने के लिए समस्या नहीं बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए भी खतरा है.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर ट्रंप के एक साल पूरे, दुनिया हिलाने वाले इन 10 फैसलों में देखिए रिपोर्ट कार्ड

ट्रंप का बैकअप प्लान, अब अगली चाल क्या है?

ट्रम्प प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के नकारात्मक फैसले के लिए तैयारी कर रखी है. नैशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हसेट ने कहा है कि अगर पुराने टैरिफ रद्द हुए तो ट्रम्प नया टैरिफ प्लान तुरंत लागू करेंगे. उनके मुताबिक नया प्लान ट्रेड ऐक्ट की धारा 122 के तहत लगभग 10% टैरिफ लगाने का है. इसका उद्देश्य अस्थायी रूप से नीति को बनाए रखना और अमेरिकी उद्योगों को तुरंत राहत देना है. प्रशासन अन्य स्थायी उपायों पर भी काम कर रहा है.

वैश्विक प्रतिक्रियाएं और आर्थिक प्रभाव

टैरिफ को रद्द करने या बदलने से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ेगा. स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव, कंपनियों की लागत में बदलाव और निवेश निर्णयों पर प्रभाव होगा. अन्य देशों के निर्यातकों को लाभ हो सकता है, लेकिन वैश्विक व्यापार के विश्वास और समझौतों पर सवाल उठेंगे.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि अगर व्यापार युद्ध बढ़ता है तो यह वैश्विक आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.

राजनीतिक और कानूनी नजरिया

सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल टैरिफ पर नहीं, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों के संतुलन पर भी असर डालेगा. आलोचक कहते हैं कि ट्रम्प ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संकट का हवाला देकर लागू किया, जबकि यह व्यापार घाटा का मामला है.

कांग्रेस की अनुमति के बिना प्रशासन ने जो कदम उठाए, वह अब न्यायपालिका के सामने है. यह मामला अमेरिका की आर्थिक नीति और वैश्विक कूटनीति दोनों पर असर डाल सकता है.

ये भी पढ़ें: India-US Trade Talks: 'अमेरिकी दालों पर दरियादिली दिखाए भारत', टैरिफ पर अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप से लगाई गुहार

Latest and Breaking News on NDTV

आगे क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट से प्रतिकूल फैसला आने के बाद ट्रम्प प्रशासन के पास विकल्प हैं. पुराने टैरिफ रद्द हुए तो वे तुरंत नए तरीके से टैरिफ लागू करेंगे.

इसमें मौजूदा कानून शामिल हो सकता है जो राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है.

इस मामले का असर केवल व्यापार शुल्क पर नहीं, बल्कि अमेरिका की शक्ति, गठबंधन नीति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रणनीति पर होगा. अमेरिका और दुनिया दोनों के लिए यह फैसला अहम साबित होगा.

सबसे अधिक टैरिफ किस देश पर?

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में आने के बाद से उन्होंने सबसे अधिक टैरिफ ब्राजील पर लगाया है, जो करीब 50% तक है. यह सबसे अधिक दर्ज की गई दरों में से एक है और कई अन्य देशों की तुलना में बहुत अधिक है. कई देशों पर अलग‑अलग दरें लागू हैं, लेकिन ब्राजील जैसे छोटे व्यापार साझेदारों पर बहुत ऊंचे शुल्क का बोझ डाला गया है. 

भारत पर औसतन 26% का दर है, जबकि चीन पर लगभग 34% शुल्क लागू है, जो अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है.

दरअसल ट्रंप ने 10% बेसलाइन टैरिफ लगभग सभी देशों पर लागू किया है, जो कि न्यूनतम टैरिफ दर है. ट्रंप की टैरिफ नीति मुख्य रूप से विभिन्न देशों के साथ व्यापार संतुलन या शुल्क नीति के आधार पर तय की जाती है. इसी आधार पर कुछ देशों पर यह टैरिफ दर 30 से 40 फीसद या उससे भी अधिक है. ट्रंप जिन देशों के बारे में यह मानते हैं कि वो अमेरिका को बड़े व्यापार घाटे में रखते हैं वो उन पर टैरिफ दर अधिक-से-अधिक लगाने की नीति पर अमल कर रहे हैं.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण मिलेगा, व्यापार घाटा कम होगा, और आत्मनिर्भर उत्पादन बढ़ेगा. आलोचक इसका आरोप लगाते हैं कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com