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अंतरिक्ष में चीनी कौन घोल रहा? धरती-सूरज की दूरी से 2 करोड़ गुना दूरी पर मिला 'रसभरी' बादल

आज से पहले तक एस्टेरॉयड में शुगर और शुगर से जुड़े कंपाउंड तो मिले थे लेकिन पहली बार इंटरस्टेलर स्पेस में यह पाया गया है. समझिए यह बड़ी खोज क्यों है?

अंतरिक्ष में चीनी कौन घोल रहा? धरती-सूरज की दूरी से 2 करोड़ गुना दूरी पर मिला 'रसभरी' बादल
Space News: पहली बार अंतरिक्ष में चीनी का पता लगा (फोटो- NDTV)

क्या अंतरिक्ष में भी मिठास घुली हुई है? यह सवाल सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब ऐसा सबूत खोज लिया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है. हमारी धरती से सूरज की दूरी से करीब 2 करोड़ गुना दूर एक विशाल गैस और धूल के बादल में ऐसी प्राकृतिक शर्करा मिली है, जो रसभरी (रैस्पबेरी) जैसे फलों में पाई जाती है. इस अनोखी खोज ने सिर्फ अंतरिक्ष ही नहीं, बल्कि यह उम्मीद भी जगा दी है कि जीवन की शुरुआत के लिए ज़रूरी कई अहम चीजें पहले से ही अंतरिक्ष में मौजूद हो सकती हैं.

वैज्ञानिकों ने क्या पाया?

खगोलविदों (एस्ट्रोनॉमर्स) ने अपने मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र के पास मौजूद धूल और गैस के बादलों में एक नेचुरल शुगर का पता लगाया है. इसमें ऐसी मिठास है जो आमतौर पर रसभरी (रैस्पबेरी) में पाई जाती है. इस मीठी खोज से पहली बार पता चला है कि जीवन के लिए जरूरी कंपाउंड तारों के बीच की विशाल जगह में बन सकते हैं. इससे यह उम्मीद भी जगी है कि जीवन की शुरुआत के लिए जरूरी दूसरे मॉलिक्यूल भी अंतरिक्ष में मिल सकते हैं. यही बात को एलियंस हैं क्या वाले सवाल को पैदा करती है.

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार स्पेन के सेंटर फॉर एस्ट्रोबायोलॉजी के खगोलविदों की एक टीम ने गैलेक्सी के केंद्र के पास G+0.693−0.027 नाम के मॉलिक्यूलर क्लाउड में 'एरिथ्रुलोज' नाम के शुगर का पता लगाया, जो चार कार्बन एटम से बना है. किसी भी जीवित सिस्टम (इंसान हों या बैक्टेरिया) में शुगर अहम भूमिका निभाता है. यह इनर्जी देने, जैविक संरचनाएं बनाने और RNA और DNA जैसे जेनेटिक मटीरियल के हिस्से बनाने में मदद करता है.

रिपोर्ट के अनुसार इस खोज के लिए टीम ने दो रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया. एक टेलीस्कोप स्पेन के मैड्रिड के उत्तर में येबेस ऑब्जर्वेटरी में था और दूसरा दक्षिणी स्पेन के सिएरा नेवादा में 'इंस्टीट्यूट फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी इन द मिलीमीटर रेंज' (IRAM) में था. इनकी मदद से G+0.693−0.027 मॉलिक्यूलर क्लाउड की स्टडी की गई. रिसर्चर्स ने मॉलिक्यूलर क्लाउड से मिले रेडियो वेव डेटा में शुगर के मॉलिक्यूलर सिग्नेचर की तुलना लैब में मापे गए एरिथ्रुलोज के वेवलेंथ पैटर्न से करके इसकी पहचान की.

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यह खोज बड़ी क्यों है?

मैड्रिड में सेंटर फॉर एस्ट्रोबायोलॉजी और स्पेनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल की खगोलविद इजस्कुन जिमेनेज-सेरा ने एक बयान में कहा, "यह खोज ऐसी थी जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी. वजह है कि एस्ट्रोकेमिस्ट्री में आम धारणा यह है कि इंटरस्टेलर मॉलिक्यूल कार्बन एटम के क्रमिक जुड़ाव से आकार में बढ़ते हैं." जिमेनेज़-सेरा इस रिसर्ज की मुख्य लेखिका थीं और यह रिसर्च सोमवार को 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' जर्नल में छपी है.

CNN की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, "हमारी खोज से पता चलता है कि तारे और ग्रह बनने से पहले ही इंटरस्टेलर स्पेस में जटिल (कॉम्प्लेक्स) शुगर बन सकते हैं."

स्टडी में बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने इससे पहले मिल्की वे के इंटरस्टेलर स्पेस में मौजूद पदार्थ और गैसों में 340 से ज्यादा मॉलिक्यूल का पता लगाया है, लेकिन कोई शुगर नहीं मिला था. इंपीरियल कॉलेज लंदन में अर्थ साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर मार्क सेफ्टन ने बताया कि इससे पहले भी एस्टेरॉयड में शुगर और शुगर से जुड़े कंपाउंड मिले हैं. लेकिन अब इंटरस्टेलर स्पेस में इन कंपाउंड की खोज से इस बात को और बल मिलता है कि हमारे सोलर सिस्टम में पहले से मौजूद ऑर्गेनिक कंपाउंड आए हो सकते हैं.

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