- अमेरिका में 2025-26 में भारतीय छात्रों के कॉलेज आवेदन में 15 प्रतिशत की कमी देखी गई है
- विदेशी छात्रों के कुल आवेदन में दस प्रतिशत की गिरावट आई है जो अब तक की सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है
- अमेरिका में विदेशी छात्रों की संख्या घटने से अर्थव्यवस्था में योगदान भी घटकर करीब 38 अरब डॉलर रह सकता है
अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीतियों का असर वहां पढ़ाई करने की चाहत रखने वाले भारतीय छात्रों पर भी दिख रहा है. 2025-26 में अमेरिका के कॉलेजों में एडमिशन के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत कम हुई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक गैर-लाभकारी संगठन यानी NGO की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
रिपोर्ट में क्या पता चला?
‘कॉमन ऐप' ने यह रिपोर्ट जारी की है. यह 1,000 से ज्यादा कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों के लिए एडमिशन की सुविधा देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 के नए शैक्षणिक सत्र में ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए कुल आवेदन बढ़े हैं. लेकिन 1 मार्च तक विदेशी छात्रों के आवेदनों में 10 प्रतिशत की कमी आई है. यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या 15 प्रतिशत कम हुई है. अमेरिका में पढ़ाई करने आने वाले विदेशी छात्रों में सबसे ज्यादा छात्र भारत से होते हैं.
इससे पहले शिक्षाविदों के एक संगठन की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि सख्त वीजा नियमों और नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण 2026 के नए शैक्षणिक सत्र में अमेरिकी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में विदेशी छात्रों की संख्या करीब 1.1 लाख कम हो सकती है. ‘नाफ्सा' (एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स) और रिसर्च संस्था ‘जेबी इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 में अमेरिका में विदेशी छात्रों की संख्या करीब 11.69 लाख थी. 2026-27 में यह संख्या घटकर करीब 10.57 लाख रह सकती है.
ऐसा क्यों हो रहा?
जुलाई में अमेरिकी सरकार ने वीजा से जुड़े नए नियम भी जारी किए हैं. इनके तहत छात्र और विजिटर वीजा के लिए पहले तय की जाने वाली रहने की अवधि में बदलाव किया गया है. अब इसकी अधिकतम अवधि चार साल रखी गई है. आमतौर पर यह अवधि छात्र के शैक्षणिक कोर्स की सामान्य अवधि के बराबर होती है. इसके अलावा, अमेरिका उन विदेशी छात्रों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने पर भी विचार कर रहा है, जो ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करना चाहते हैं और इसके लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम का इस्तेमाल करना चाहते हैं.
इसी से जुड़ी एक और नई खबर है. डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हर साल तय सीमा के अंदर आने वाले सभी H-1B वीजा आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर यानी करीब 99 लाख रुपये की अलग फीस लगाई जा सकती है. इसमें उन लोगों के लिए रखे गए 20,000 अतिरिक्त H-1B वीजा भी शामिल होंगे, जिनके पास किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री या उससे ज्यादा की डिग्री है.
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