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स्टूडेंट वीजा को लेकर क्यों डरे हैं अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्र? जानें क्या-क्या बदल गया

Student Visa Changes In USA : अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के बीच F-1 और J-1 वीजा नियमों में बदलाव को लेकर चिंता बढ़ी है. जानिए पढ़ाई, स्टूडेंट स्टेटस, दस्तावेजों और अमेरिका में रहने के नियमों में क्या-क्या बदला है.

स्टूडेंट वीजा को लेकर क्यों डरे हैं अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्र? जानें क्या-क्या बदल गया
अमेरिका में विदेशी छात्रों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए इमिग्रेशन और वीजा से जुड़े नियमों को लेकर चुनौतियां बढ़ गई हैं. अब सिर्फ अमेरिका का वीजा हासिल कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि वहां रहते हुए अपने स्टूडेंट स्टेटस को बरकरार रखना भी एक बड़ा टास्क बन चुका है. अमेरिकी प्रशासन (USCIS और Department of State) ने F-1 और J-1 वीजा धारकों की सख्त स्क्रूटनी शुरू कर दी है. तय समय से ज्यादा पढ़ाई रोकना, डाक्यूमेंट्स में गड़बड़ी या फिर वीजा शर्तों को नजरअंदाज करना छात्रों को भारी पड़ सकता है. इसी वजह से हार्वर्ड (Harvard University) समेत कई प्रमुख अमेरिकी यूनिवर्सिटीज ने अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने को कहा है.

नियमों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं?

फुल-टाइम स्टेटस बनाए रखना अनिवार्य: F-1 वीजा पर गए छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान 'फुल-टाइम स्टूडेंट' की शर्त हर हाल में पूरी करनी होगी. अगर कोई छात्र कोर्स बदलता है, गैप लेता है या पढ़ाई बीच में छोड़ता है, तो उसे यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से लिखित अनुमति लेनी होगी.

J-1 वीजा धारकों के लिए सख्त निर्देश: एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (J-1) के तहत अमेरिका गए अभ्यर्थियों को अपने स्पॉन्सर की तय शर्तों का अक्षरशः पालन करना होगा.

सोशल मीडिया स्क्रीनिंग में सख्ती: F, M और J कैटेगरी के नए वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया बैकग्राउंड की गहन जांच हो रही है. अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि आवेदक अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग्स को 'पब्लिक' रखें ताकि वेरिफिकेशन में आसानी हो.

डाक्यूमेंट्स को लेकर रखें ये सावधानियां

1. अपडेटेड पेपर्स: आपका पासपोर्ट, I-20 फॉर्म (F-1 के लिए) या DS-2019 (J-1 के लिए) और यूनिवर्सिटी के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड पूरी तरह सही और अपडेट होने चाहिए.

2. कोर्स ट्रांसफर या एक्सटेंशन: अगर पढ़ाई की अवधि बढ़ानी हो या दूसरी यूनिवर्सिटी में शिफ्ट होना हो, तो इमिग्रेशन नियमों के तहत तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का ही पालन करें.

3. Duration of Status (D/S) में बदलाव: अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस सिस्टम से जुड़ा नया फाइनल रूल जारी किया है. इसलिए हर छोटे-बड़े अपडेट के लिए अपनी यूनिवर्सिटी के 'इंटरनेशनल स्टूडेंट एडवाइजर' से लगातार संपर्क में रहें.

छात्रों को पैनिक होने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत

इन कड़े नियमों का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि अमेरिका में मौजूद सभी भारतीय छात्रों पर गाज गिरने वाली है. बस अब किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश खत्म हो चुकी है. चाहें अमेरिका से बाहर यात्रा करके वापस लौटना हो या पढ़ाई में कोई ब्रेक लेना हो, हर कदम उठाने से पहले नियमों की सही जानकारी जरूर जुटाएं. सतर्कता और सही कागजी प्रक्रिया ही आपके स्टूडेंट स्टेटस को सुरक्षित रखेगी.

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