विज्ञापन

वॉशिंगटन पोस्ट से 300 कर्मचारियों की छंटनी की पूरी कहानी - अब तक हमें जो पता है

वाशिंगटन पोस्ट ने करीब 300 कर्मचारियों, पत्रकारों को छंटनी कर दी है. यह छंटनी स्थानीय ब्यूरो, अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो और स्पोर्ट्स सेक्शन से की गई है. इसमें एडमिन के सदस्य भी शामिल हैं. इसे मीडिया जगत में 'ब्लडबाथ' बताया जा रहा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

वॉशिंगटन पोस्ट से 300 कर्मचारियों की छंटनी की पूरी कहानी - अब तक हमें जो पता है
AFP
  • वाशिंगटन पोस्ट ने लगभग 30% कर्मचारियों को निकाला.
  • लेखकों, संवाददाताओं और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की भारी कटौती की गई है.
  • प्रबंधन का कहना है कि यह ‘दुखद लेकिन आवश्यक’ कदम है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

अमेरिकी समाचार जगत की सबसे प्रतिष्ठित न्यूजपेपर द वाशिंगटन पोस्ट ने बुधवार को एक बड़े पैमाने पर करीब एक-तिहाई कर्मचारियों को नौकरी से निकालने (layoffs) का एलान किया है. यह कटौती इतनी व्यापक और गहरा प्रभाव डालने वाली है कि मीडिया उद्योग में इसे ब्लडबाथ कहा जा रहा है. पत्रकारों, संपादकों, विदेशी संवाददाताओं और कई सेक्शन के कर्मचारियों को अचानक ईमेल और जूम बैठक के जरिए यह सूचना दी गई कि उन्हें या तो निकाला जा रहा है या उनका विभाग बंद हो रहा है. कुल मिलाकर लगभग 30% से अधिक कर्मचारियों पर असर पड़ा है, जिसमें न्यूजरूम, स्पोर्ट्स समेत विदेशी रिपोर्टिंग जैसी यूनिट शामिल हैं.

वाशिंगटन पोस्ट में छंटनी कितनी बड़ी

वाशिंगटन पोस्ट की यह छंटनी ऐतिहासिक है. इसमें 300 से अधिक पत्रकारों की छंटनी की गई है. करीब-करीब इसमें इस प्रतिष्ठित अखबार के 30 प्रतिशत यानी करीब हर तीन में से एक कर्मचारी प्रभावित हुआ है. कई विदेशी ब्यूरो और स्थानीय संवाददातों में भी भारी कटौती की गई है. बिजनेस डेस्क और एडमिन से भी लोगों को हटाया गया है.

वॉशिंगटन पोस्ट के इस बदलाव में स्पोर्ट्स टीम को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और इसके कुछ रिपोर्ट्स को फीचर सेक्शन में भेज दिया गया है. वहीं इंटरनेशनल डेस्क और फॉरेन ब्यूरो में भारी कटौती की गई है. पॉडकास्ट रोक दी गई हैं. बिजनेस डेस्क और एडमिन टीम से भी लोग हटाए गए हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: NDTV

रोजगार में कटौती या स्ट्रैटेजिक रीसेट

वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने कर्मचारियों के बताया कि यह दुखद पर ऐसा किए बगैर अखबार आगे नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा कि मीडिया की खबरों को लेकर पाठकों की रुचि में बदलाव आ गया है जिसे लेकर संगठन को एक नई दिशा देना जरूरी है.  

मैट मरे ने कहा, “हम सबके लिए यह एक मुश्किल दिन है, लेकिन इसे करने की वजह यह है कि हम एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ें जो आज के डिजिटल और बदलते परिवेश में अधिक प्रभावशाली हो.”

मरे ने यह भी कहा कि अब वॉशिंगटन पोस्ट को उन क्षमताओं पर जोर देना चाहिए जहां उसकी ताकत सबसे ज्यादा है- जैसे राजनीति, डिफेंस न्यूज और खोजी पत्रकारिता.

वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे

वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे

कई मीडिया विश्लेषक और समाचार संस्थान इस निर्णय को जेफ बेजोस के नेतृत्व वाले नजरिए का नतीजा बताते हुए इस छंटनी की आलोचना कर रहे हैं. उनके अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट ने पिछले चुनाव में किसी राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया, इससे पुराने पाठकों को निराशा हुई हो सकती है जिसकी वजह से उसके सब्सक्रिप्शन में भारी गिरावट आई. अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक जो सब्सक्रिप्शन 2020 में करीब ढाई लाख थी वो अब घट कर एक लाख के नीचे आ गई है. इसने वाशिंगटन पोस्ट के सामने आर्थिक चुनौतियां पेश की हैं.

कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस लेऑफ से पहले किए जूम मीटिंग में कहा था कि "हम हर किसी के लिए सब कुछ नहीं हो सकते." 

वाशिंगटन पोस्ट गिल्ड की प्रतिक्रिया

इस छंटनी के बाद कई प्रतिक्रियाएं आईं. सबसे पहली प्रतिक्रिया वाशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने दी, जिसमें उन्होंने इन छंटनियों को 'अनिवार्य नहीं' बताया और चेतावनी दी कि इससे अखबार की विश्वसनीयता, पहुंच और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा. यूनियन ने कहा कि अखबार के मूल मिशन 'बिना भय, डर या पक्षपता के सत्ता पर नजर रखने' पर हमला हो रहा है और इसे बचाने के लिए समर्थन जुटाने की अपील की है.
द वाशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है. यूनियन ने बयान जारी कर कहा कि 'अगर वॉशिंगटन पोस्ट का स्टाफ नहीं रहा, तो वॉशिंगटन पोस्ट भी नहीं रहेगा.' 

वहीं कुछ कर्मचारियों ने इसे पुराने जमाने का 'ब्ल्डबाथ' बताया और कहा कि इससे अखबार की स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पहुंच कमजोर होगी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों के मुताबिक यह केवल नौकरी जाने का विषय न होकर पत्रकारिता के आदर्श और अखबार की पहचान खोने का डर भी कर्मचारियों के मन में पैठ कराएगा. कई ने प्रतिक्रिया दी कि इतने बड़े स्तर पर अनुभवी लोगों की छंटनी के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कवरेज, रिपोर्टिंग और स्थानीय समाचारों की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ेगा.

कौन-कौन बड़े नाम हटाए गए?

Ishaan Tharoor– वरिष्ठ लेखाकार और विदेश मामलों के लिए पोस्ट के प्रमुख.
Pranshu Verma– वॉशिंगटन पोस्ट के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख.
Caroline O'Donovan– टेक्निकल रिपोर्टर, जिनके पास Amazon को कवर करने का जिम्मा था.
इन नामों के अलावा कई अनुभवी विदेशी संवाददाता और सेक्शन हेड भी हटाए गए हैं. 

वॉशिंगटन पोस्ट कर्मचारियों की प्रतिक्रियाओं

वहीं इस छंटनी से प्रभावित पत्रकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी.

इशान थरूर- वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय कॉलमनिस्ट और शशि थरूर के पुत्र ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह दिल टूटने के साथ यह घोषणा कर रहे हैं कि उन्हें और अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों में से अधिकांश को निकाल दिया गया है. उन्होंने अपने सहयोगियों के बारे में कहा कि वे बेमिसाल पत्रकार हैं और उनके साथ काम करना सम्मान की बात थी.

विल हॉब्सन- एक खोजी पत्रकार हैं. उन्होंने लिखा, “मैं आज के वॉशिंगटन पोस्ट के layoffs में शामिल रहा हूं… यह 11 वर्षों का एक बेजोड़ सफर था.”

गैरी शिह- येरुसलम के ब्यूरो चीफ थे. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि वह और उनकी पूरी मध्य-पूर्व टीम निकाल दी गई है. यहां काम करना हमारा सौभाग्य और रोमांचक अनुभव रहा है जो हमेशा याद रहेगा.

क्लेयर पार्कर- काहिरा ब्यूरो चीफ थे. उन्होंने लिखा कि पूरी टीम को निकाल दिए जाने को समझना बहुत मुश्किल है, लेकिन वो अपने शानदार सहयोगियों के आभारी हैं.

लिजी जॉनसन- यूक्रेन संवाददाता. उन्होंने बताया कि एक युद्ध क्षेत्र से निकाले जाने की सूचना मिलना सदमा लगने जैसा है.

सैम फोर्टियर भी इस बड़े पैमाने पर हुई छंटनी का हिस्सा रहे और उन्होंने एक्स पर लिखा कि, "मैं वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी का हिस्सा हूं. मैं दुखी हूं, गुस्से में हूं. हम सब काम करते रहना चाहते हैं. लेकिन अभी मैं आज के समय की पत्रकारिता में होने की एक सच्चाई को डॉक्यूमेंट करना चाहता हूं."

दरअसल, आज पत्रकारिता डिजिटल, AI और सोशल मीडिया पर आधारित दिशा में तेजी से बदल रहा है. परंपरागत समाचार संस्थानों के लिए यह परिवर्तन मुश्किल और आर्थिक रूप से खतरनाक साबित हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने पुराने फोकस को बदलने वाले मॉडल की ओर जाने का निर्णय लिया है. उनके मुताबिक यह टेक्निकल डेवलपमेंट की जरूरत हो सकता है लेकिन कई पुराने पाठकों और पत्रकारों के लिए यह दुखद बदलाव है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com