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शारजाह के सुल्तान का बड़ा फैसला: खोर फक्कन बनेगा 'ऑक्सीजन सिटी', चारों तरफ से जंगलों से घिरा होगा

शारजाह के सुल्तान को बागवानी से बहुत प्यार है. उन्होंने बागवानी को लेकर ऐसे-ऐसे टिप्स दिए हैं कि प्लांट लवर्स के लिए ये गिफ्ट से कम नहीं हैं.

शारजाह के सुल्तान का बड़ा फैसला: खोर फक्कन बनेगा 'ऑक्सीजन सिटी', चारों तरफ से जंगलों से घिरा होगा
शारजाह के शासक ने अपने बचपन का जिक्र भी किया.
  • सुल्तान अल कासिमी ने खोर फक्कन को वृक्षों के जंगलों से घिरे शहर में बदलने की योजना का खुलासा किया है
  • गुलाब के पौधों के लिए शुद्ध पहाड़ी मिट्टी और आंशिक छाया का प्रयोग करना आवश्यक होता है ताकि फूल सुंदर रहें
  • कसद का पौधा रेगिस्तानी क्षेत्रों में उगने वाला कांटेदार वृक्ष है, जिसका फल खाने योग्य और लाल रंग का होता है
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शारजाह के सर्वोच्च परिषद सदस्य और शासक शेख सुल्तान बिन मोहम्मद अल कासिमी ने खोर फक्कन शहर को वृक्षों के जंगलों से घिरे शहर में बदलने की चल रही योजना का खुलासा किया. इन जंगलों में ऑक्सीजन का स्तर उच्च, कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम और सकारात्मक इलेक्ट्रॉनों की मात्रा अधिक होगी, जिससे निवासियों को सुकून और शांति मिलेगी. उन्होंने फूल प्रेमियों को प्लांटेशन संबंधी जानकारी भी दी, जिसमें उपयुक्त मिट्टी का चयन, आवश्यक रौशनी और छंटाई के समय के बारे में बताया गया.

कौन सी मिट्टी लेनी चाहिए

शारजाह के शासक ने शारजाह ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी के महानिदेशक मोहम्मद हसन खलफ की तरफ से आयोजित डायरेक्ट लाइन कार्यक्रम में फोन पर बातचीत के दौरान कहा, "कृषि और फूलों के बारे में बात करना हमारी भावनाओं को झकझोर देता है. गुलाब का पौधा बहुत संवेदनशील होता है. अगर हम इसे थोड़ी सी भी रेत वाली मिट्टी में लगाते हैं, तो इससे इसके ऊपर उगने वाले फूल के आकार पर असर पड़ेगा, क्योंकि इसकी जड़ संवेदनशील होती है और उसे सूखने नहीं देना चाहिए. अगर यह सूख जाती है, तो फूल में खराबी आ जाएगी और वह टेढ़ा-मेढ़ा, मुड़ा हुआ या अपूर्ण आकार का हो जाएगा."

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कैसे सूर्य की रौशनी दें

इसका कारण मिट्टी है. उपयुक्त मिट्टी प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छी जगह पहाड़ों की तलहटी, ढलानों के नीचे का क्षेत्र है, जहां बिना रेत वाली शुद्ध पहाड़ी मिट्टी पाई जाती है. फूल लगाते समय, हम कपड़े की बनी छतरियां लगाते हैं, जिससे धूप अंदर आ सके, ताकि फूलों को पूरी छाया नहीं, बल्कि आंशिक छाया मिले. इस तरह, हम फूलों को सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में लाए बिना उन तक प्रकाश पहुंचाते हैं. हम घर पर फूल लगाने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को सलाह देते हैं कि वे पहाड़ों की तलहटी से शुद्ध मिट्टी प्राप्त करें और बताए गए तरीके से छतरियों का उपयोग करें, ताकि फूलों को तेज धूप से बचाते हुए उन तक प्रकाश पहुंच सके. पौधों की छंटाई मार्च की शुरुआत से पहले करनी चाहिए, क्योंकि गुलाब सख्त जड़ों पर नहीं उगते; वे नई, कोमल शाखाओं पर खिलते हैं.

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कसद के पौधे से बचपन आया याद

शारजाह के शासक ने कसद के पौधे के बारे में कहा, "कसद का पौधा एक विशाल, कांटेदार, घना और दीर्घायु वृक्ष है. इसकी पहचान इसकी आपस में गुंथी हुई शाखाओं और छोटे पत्तों से होती है, और इसकी ऊंचाई लगभग दो मीटर तक होती है. यह रेगिस्तानों और शुष्क क्षेत्रों में उगता है और कठोर जलवायु परिस्थितियों को सहन कर सकता है. इसके फल छोटे, गोल और गूदेदार होते हैं, जो पकने पर हरे से लाल हो जाते हैं और खाने योग्य होते हैं. कुछ देशों में इसे 'अवसाज' कहा जाता है."

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कौवों से होड़ लगाते थे

यह पेड़ अल मदम इलाके में हुआ करता था, जहां 'सईह अल कसद' नाम का एक मैदान है. इस पेड़ से जुड़ी हमारी बचपन की कई खूबसूरत यादें हैं, क्योंकि हम इसके स्वादिष्ट लाल फल इकट्ठा करके खाते थे. हम कौवों से होड़ लगाते थे क्योंकि वे भी इन स्वादिष्ट फलों को चुनते थे. मैंने अपने लोगों को एक ऐसी जगह के बारे में बताया, जहां कसद के पेड़ थे और उनसे वहां खोजने को कहा. जब वे गए, तो उन्हें पेड़ सूखे मिले, इसलिए मैंने उनसे वहां से थोड़ी रेत लाने को कहा.

अब लाखों पौधे

मैंने इसे लगाया, लेकिन कुछ भी नहीं उगा. बाद में, अल बदी जाते समय, मुख्य सड़क पर प्रवेश करने से पहले, मैंने दूर से एक पेड़ देखा और उसे पहचान लिया. मैंने उन्हें तुरंत रुकने के लिए कहा, और वास्तव में, हमने पाया कि यह एक कसद का पेड़ था. सौभाग्य से, मैंने प्लांटेशन के लिए इसकी कलम ले ली, लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि यह सूखा है और सफल नहीं होगा. हालांकि, अल्लाह की कृपा से, हमने विकास हार्मोन का प्रयोग किया, और प्लांटेशन सफल रहा. अब यह हमारे नर्सरी में है, सुंदर, कोमल, लहराती और फलदार शाखाओं वाला. अल्लाह की कृपा से, अल बदी पैलेस नर्सरी लाखों चयनित पेड़ों से भरी हुई है, इस हद तक कि सभी नगर पालिकाएं इससे पौधे लेती हैं, क्योंकि नगर पालिका की नर्सरियां अब पर्याप्त नहीं हैं.

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खोर फक्कन प्लान

शारजाह के शासक ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, "हम अब खोर फक्कन के पहाड़ों पर वृक्षारोपण का काम कर रहे हैं. विशेषज्ञ कंपनियां पहाड़ों से नीचे उतरने वाली घाटियों के रास्तों के किनारे गड्ढे खोद रही हैं, ताकि पानी इन गड्ढों में डाला जा सके, जहां हम पेड़ लगाएंगे और उन्हें इसी पानी से सींचा जाएगा, बजाय इसके कि पानी बड़ी घाटियों से बहकर समुद्र में मिल जाए. ईश्वर की कृपा से, खोर फक्कन शहर वृक्षों के जंगलों से घिरा शहर बन जाएगा. यह शहर उच्च ऑक्सीजन स्तर, कम कार्बन डाइऑक्साइड और बढ़े हुए सकारात्मक इलेक्ट्रॉनों से सुकून और शांति का अनुभव करेगा. मैंने पहले भी खोर फक्कन के लोगों को संबोधित किया था, जब हमने इसकी परियोजनाओं का उद्घाटन किया था, और मैंने उनसे कहा था, 'अपने दिलों को इस समुद्र की तरह खोलें, जिसमें अगर हम सड़ांध भी फेंक दें, तो भी वह गंदा नहीं होगा.'"

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