- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया है
- शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था और अगस्त 2024 में देश की कमान ली थी
- राष्ट्रपति का पद बांग्लादेश में औपचारिक होता है, कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास होती हैं
बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे की वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं सेहत से जुड़ी कई दिक्कतों से जूझ रहा हूं." शहाबुद्दीन ने 'द डेली स्टार' से कहा, "इस समय मुझे और कुछ नहीं कहना है." कई सूत्रों ने 'द डेली स्टार' को बताया कि उनके इस्तीफे का पत्र लेकर प्रतिनिधि बंगभवन से संसद के लिए रवाना हो गए हैं.
शहाबुद्दीन अप्रैल 2023 से इस दक्षिण एशियाई देश के राष्ट्रपति हैं. उन्होंने अगस्त 2024 में युवा प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद और कुछ दिनों बाद कार्यवाहक सरकार बनने तक के अस्थिर दौर में देश की कमान संभाली.बांग्लादेश के राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, लेकिन यह पद मुख्य रूप से औपचारिक होता है; कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास होती हैं.
सूत्रों के अनुसार, यह इस्तीफा ऐसी मीडिया रिपोर्टों के बीच आया है, जिनमें कहा गया है कि शहाबुद्दीन ने इस साल मई में इलाज के लिए लंदन यात्रा के दौरान अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बात की थी. शहाबुद्दीन 9 मई को लंदन गए थे और 18 मई को लौटे थे. हसीना अगस्त 2024 से भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं.
कौन हैं शहाबुद्दीन और कैसा रहा कार्यकाल
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल, 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी. उन्हें तत्कालीन स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी ने पद की शपथ दिलाई थी. वह तत्कालीन सत्ताधारी अवामी लीग के उम्मीदवार थे और 13 फरवरी, 2023 को निर्विरोध चुने गए थे, क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया था. एक स्वतंत्रता सेनानी रहे शहाबुद्दीन 2006 में जिला और सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उन्होंने 2011 से 2016 तक भ्रष्टाचार-रोधी आयोग के आयुक्त के रूप में भी काम किया था.
शहाबुद्दीन छात्र लीग की पबना एडवर्ड कॉलेज यूनिट के जनरल सेक्रेटरी और पबना जिला छात्र लीग व जुबो लीग के प्रेसिडेंट थे. वह बांग्लादेश कृषक श्रमिक अवामी लीग की जिला यूनिट के जॉइंट सेक्रेटरी और अवामी लीग की जिला यूनिट के पब्लिसिटी सेक्रेटरी भी थे. शहाबुद्दीन ने अवामी लीग की सलाहकार परिषद में भी काम किया, जिसकी गतिविधियों पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है.
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