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ब्लैक होल जेट पर वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, कल्पना से भी परे है ताकत और स्पीड

ये हर ब्लैक होल में नहीं होते. जेट तभी बनते हैं जब ब्लैक होल तेजी से मैटर खा रहा हो और तेज घूम रहा हो. सीधा समझिए तो ब्लैक होल सब कुछ खाता नहीं है. जो हजम नहीं होता उसे वो सुपरफास्ट जेट के रूप में उगल देता है.

ब्लैक होल जेट पर वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, कल्पना से भी परे है ताकत और स्पीड
ब्लैक होल में हर चीज समा जाता है और फिर वापस नहीं आता.
  • वैज्ञानिकों ने सिग्नस एक्स-1 ब्लैक होल से निकलने वाले जेट की तात्कालिक शक्ति दस हजार सूरजों के बराबर मापी है
  • सिग्नस एक्स-1 में ब्लैक होल व नीला सुपरजायंट तारा एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए गैसों का आदान-प्रदान कर रहे
  • शोध में बताया गया कि ब्लैक होल की ओर गिरने वाली ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत जेट के माध्यम से बाहर निकलती है
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वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्लैक होल से निकलने वाले जेट की तात्कालिक अविश्वसनीय शक्ति को मापा है. एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस अपेक्षाकृत निकट स्थित ब्लैक होल-तारा प्रणाली से निकलने वाले जेट की शक्ति 10,000 सूर्यों के बराबर है. वहीं उसकी गति लगभग 355 मिलियन मील प्रति घंटा (540 मिलियन किलोमीटर प्रति घंटा)है. ये प्रकाश की गति का आधा है.

खासियत हैरान करने वाली

  1. 7,200 प्रकाश वर्ष दूर स्थित, सिग्नस एक्स-1 में न केवल एक ब्लैक होल है, बल्कि एक नीला सुपरजायंट तारा भी है, जो इसका निरंतर साथी है. सिग्नस एक्स-1 को लगभग आधी सदी पहले पहचाना गया था. एक प्रकाश वर्ष लगभग 6 ट्रिलियन मील (9.7 ट्रिलियन किलोमीटर) के बराबर होता है. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के स्टीव प्रबु और उनकी टीम ने वैश्विक दूरबीन नेटवर्क द्वारा प्राप्त 18 वर्षों की उच्च-रिजोल्यूशन रेडियो इमेजिंग के आधार पर अपने निष्कर्ष निकाले हैं. उन्होंने यह शोध ऑस्ट्रेलिया के कर्टिन विश्वविद्यालय में रहते हुए किया था, जिसने नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व किया.
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  2. प्रबु और उनके सहयोगियों ने इन "नृत्य करते जेट" (जैसा कि वे इन्हें कहते हैं) की तीव्र शक्ति को मापने में सफलता प्राप्त की, क्योंकि तारों की हवा द्वारा इन्हें विपरीत दिशाओं में धकेला जा रहा था. समूह ने अपनी गणनाओं को इस आधार पर किया कि तारों की हवा द्वारा जेट कितने मुड़े हुए थे, साथ ही कंप्यूटर मॉडलिंग का भी उपयोग किया. शोधकर्ताओं ने कहा कि अब तक, एक ब्लैक होल की जेट शक्ति का औसत हजारों वर्षों के डेटा के आधार पर निकाला जाता था. प्रबु ने कहा कि एक महत्वपूर्ण खोज यह है कि ब्लैक होल की ओर गिरने वाले पदार्थ द्वारा उत्सर्जित कुल ऊर्जा का 10% जेट द्वारा ले जाया जाता है.
  3. सिग्नस एक्स-1 में स्थित ब्लैक होल अपने साथी तारे से लगातार गैसें खींच रहा है, क्योंकि वे एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हैं. 1960 के दशक में खोजा गया यह बाइनरी सिस्टम हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के सिग्नस, या हंस तारामंडल में स्थित है. प्रबु ने एक ईमेल में बताया कि सुपरजायंट तारा ब्लैक होल को पदार्थ प्रदान करता है, जिससे उसे "खाने और जेट के रूप में बाहर निकालने के लिए कुछ मिलता है." ये जेट वैज्ञानिकों को यह बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं कि ब्लैक होल बड़े पैमाने पर झटकों और अशांति के माध्यम से आकाशगंगाओं और अन्य ब्रह्मांडीय संरचनाओं को आकार देने में कैसे योगदान देते हैं. प्रबु अन्य ब्लैक होल पर भी इसी तरह की तकनीक लागू करने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, "और भी कई प्रणालियों में जेट की शक्ति को मापना रोमांचक होगा."
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ब्लैक होल क्या होता है

ब्लैक होल स्पेस में एक ऐसी जगह है, जहां गुरुत्वाकर्षण इतना तेज होता है कि वहां से कुछ भी बाहर नहीं निकल सकता. यहां तक की रोशनी तक नहीं. तो सवाल ये उठेगा कि आखिर ये कैसे बनता है? तो जवाब भी जान लीजिए. जब बहुत बड़ा तारा अपना सारा ईंधन जला देता है तो वो अपने ही गुरुत्व से ढह जाता है. पूरा द्रव्यमान एक बहुत छोटे बिंदु में सिमट जाता है, जिसे सिंगुलैरिटी कहते हैं. इसके दो मुख्य हिस्से होते हैं. पहला इवेंट होराइजन. ये ब्लैक होल की सीमा है. इसके अंदर जो गया, वो वापस नहीं आता. इसे "पॉइंट ऑफ नो रिटर्न" भी कहा जाता है.अगर गलती से इसमें कोई चला गया तो फिर जिंदा नहीं रह सकता. दूसरा मुख्य हिस्सा है सिंगुलैरिटी. ये सेंटर में वो बिंदु है, जहां घनत्व अनंत हो जाता है और फिजिक्स के नियम काम करना बंद कर देते हैं.

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ब्लैक होल जेट क्या होते हैं

ब्लैक होल जेट बहुत तेज, पतली धाराएं होती हैं जो कुछ ब्लैक होल के ध्रुवों से निकलती हैं. ये लगभग प्रकाश की गति से ट्रैवल करती हैं. अब ये भी जान लीजिए ये बनती कैसे हैं? ब्लैक होल के चारों तरफ गैस और धूल की एक घूमती हुई डिस्क बनती है, जिसे एक्रीशन डिस्क कहते हैं. सारा मैटर ब्लैक होल में नहीं गिरता. कुछ मैटर बहुत गर्म होकर ताकतवर मैग्नेटिक फील्ड में फंस जाता है. ये मैग्नेटिक फील्ड उस गर्म प्लाज्मा को ब्लैक होल के ऊपर और नीचे के ध्रुवों से बाहर फेंक देती है. वही जेट हैं. ये जेट हजारों-लाखों प्रकाश-वर्ष लंबे हो सकते हैं. पूरी गैलेक्सी से भी बड़े. ब्रह्मांड की सबसे ताकतवर चीजों में से एक. ये अपने रास्ते की गैस को धकेलकर नए तारे बनने से रोक सकते हैं. ये हर ब्लैक होल में नहीं होते. जेट तभी बनते हैं जब ब्लैक होल तेजी से मैटर खा रहा हो और तेज घूम रहा हो. सीधा समझिए तो ब्लैक होल सब कुछ खाता नहीं है. जो हजम नहीं होता उसे वो सुपरफास्ट जेट के रूप में उगल देता है.

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