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गिले-शिकवे भूल 'जय-वीरू' बनने की राह पर सऊदी और UAE, क्यों थी दुश्मनी?

कभी मध्य पूर्व के सबसे करीबी साझेदार रहे सऊदी अरब और UAE के रिश्ते यमन युद्ध, तेल उत्पादन कोटे और क्षेत्रीय नेतृत्व की होड़ के कारण हाल के वर्षों में तनावपूर्ण हो गए थे. लेकिन अब बात फिर से बनती दिख रही है.

गिले-शिकवे भूल 'जय-वीरू' बनने की राह पर सऊदी और UAE, क्यों थी दुश्मनी?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और UAE के शासक मोहम्मद बिन जायद

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मनमुटाव अब कम होता दिख रहा है. रिश्तों पर जमीं बर्फ की ये परतें अब पिघलती नजर आ रही है. दोनों देशों के आला नेताओं ने इसका हिंट दे दिया है. दरअसल, सऊदी अरब के मीडिया मंत्री सलमान अल-दोसरी और UAE के नेशनल मीडिया अथॉरिटी के चेयरमैन अब्दुल्ला बिन मोहम्मद अल-हामेद की ओर से लगभग एक ही वक्त पर एक ही तरह के मैसेज एक्स पर पोस्ट किए गए. 

दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर दोस्ती और एकता के बारे में पोस्ट किया है.  दोनों नेताओं ने मीडिया से ये भी अपील की है कि ऐसी खबरों की कवरेज से बचें जो दोनों देशों की रिश्ते को कमजोर करते हों.

एक साथ, एक जैसा संदेश, क्या है वो वायरल पोस्ट?

रियाद समय के मुताबिक शाम के 7 बजते ही सऊदी अरब के मीडिया मंत्री सलमान अल-दोसरी और UAE की नेशनल मीडिया अथॉरिटी के अध्यक्ष अब्दुल्ला बिन मोहम्मद अल-हामेद ने X पर लगभग एक ही समय पर बेहद मिलते-जुलते संदेश साझा किए.

इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पोस्ट में दोनों देशों के बीच सदियों पुराने गहरे भाईचारे, साझा इतिहास और दोनों मुल्कों के दूरदर्शी नेतृत्व की दिल खोलकर तारीफ की.

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस तस्वीर की हो रही है जो इन पोस्ट्स के साथ शेयर की गई. फोटो में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन-सलमान (जो क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के छोटे भाई हैं) और UAE के उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे, मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं. इस एक तस्वीर ने विश्लेषकों को यह साफ संदेश दे दिया कि दोनों देशों ने अपने मतभेदों को पीछे छोड़ने की शुरुआत कर दी है.

महीनों से क्यों छिड़ी थी तनातनी?

सऊदी अरब और UAE ऐतिहासिक रूप से बहुत करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे मोड़ आए, जब दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे.

सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों से अपनी सुरक्षा को पहली प्राथमिकता मानता है. दूसरी तरफ, UAE यमन के दक्षिणी क्षेत्र में सक्रिय अपने सहयोगी गुटों को समर्थन देता आया है. हितों के इस टकराव के चलते यमन में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध की स्थिति बन गई थी.

तेल उत्पादन के कोटे को लेकर दोनों देशों के रुख में दरार साफ देखी गई. मिडिल ईस्ट में आर्थिक और राजनीतिक बिग ब्रदर बनने की होड़ ने भी दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ाई है.

तनाव इतना बढ़ गया था कि यमन में UAE समर्थित गुटों के मिलिट्री इक्विपमेंट की खेप पर सऊदी अरब की ओर से एयरस्ट्राइक तक कर दी गई थी. इसके अलावा, दोनों देशों के सोशल मीडिया समर्थकों के बीच भी खुला जुबानी जंग जारी था.

मिडिल ईस्ट और दुनिया के लिए इसके क्या मायने हैं?

सऊदी अरब और UAE का एक साथ आना पूरे खाड़ी देश की स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. दोनों देश न सिर्फ तेल और ऊर्जा बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं, बल्कि मिडिल ईस्ट के व्यापक भू-राजनीतिक मामलों में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

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