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'हमें दे दो यूरेनियम...', ईरान-अमेरिका जंग में रूस ने दिया शांति का नया फार्मूला

क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि रूस ईरान के यूरेनियम को सुरक्षित चक्र में बदलने को तैयार है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

'हमें दे दो यूरेनियम...', ईरान-अमेरिका जंग में रूस ने दिया शांति का नया फार्मूला

Iran US Tension: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मची वैश्विक हलचल के बीच रूस ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए हैं. क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक पुराना लेकिन बेहद अहम प्रस्ताव दोहराया है. रूस ने कहा है कि वह ईरान के समृद्ध यूरेनियम अपने पास रखने और उसे प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ किया कि रूस का यह प्रस्ताव काफी समय से मेज पर है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.रूस का मानना है कि अगर ईरान अपना अतिरिक्त यूरेनियम रूस को सौंप देता है, तो इससे न केवल परमाणु हथियारों की होड़ की चिंता कम होगी, बल्कि क्षेत्र में जारी तनाव को भी कम करने में बड़ी मदद मिलेगी.

यूरेनियम वापस लौटा देगा रूस?

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हो रही अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में रूस हमेशा से एक प्रमुख खिलाड़ी रहा है. रूस की योजना केवल यूरेनियम को जब्त करने की नहीं, बल्कि उसे एक सुरक्षित और उपयोगी चक्र में ढालने की है. रूस ने बार-बार यह प्रस्ताव दिया है कि ईरान अपने पास मौजूद सीमा से अधिक समृद्ध यूरेनियम को रूस निर्यात कर दे. इसके बाद, रूस अपनी उन्नत तकनीक से उसे प्रोसेस करेगा और उसे वापस ईरान को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए 'परमाणु ईंधन' के रूप में लौटा देगा.

इस फॉर्मूले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ईरान को अपनी बिजली जरूरतों के लिए ईंधन मिल जाएगा, लेकिन उसके पास इतना उच्च-स्तर का यूरेनियम नहीं बचेगा जिससे परमाणु बम बनाया जा सके.रूस का कहना है कि वह इस संकट को खत्म करने के लिए हर संभव कूटनीतिक और तकनीकी सहायता देने के लिए तत्पर है.

ईरान क्या चाहता है?

हैरानी की बात यह है कि रूस की ओर से बार-बार मिल रहे इस सुरक्षित विकल्प के बावजूद ईरान ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है. ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अपना संप्रभु अधिकार मानता आया है और यही वजह है कि वह अपने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजने के मामले में अब तक कड़ा रुख अपनाए हुए है.

फिलहाल, गेंद ईरान और अमेरिका के पाले में है. अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और ईरान इस बात पर सहमत होते हैं, तो रूस की यह पेशकश सालों से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकती है. 

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