- ईरान ने अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत में प्रगति का दावा किया है, जबकि युद्ध की आशंकाएं बनी हुई हैं.
- ईरान के सेना प्रमुख ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत जारी रहने की पुष्टि की और ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत भी दिए.
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच ईरान ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हो रही है. ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को कहा कि मीडिया में चल रही अटकलों और युद्ध के माहौल के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. हालांकि, इसी बीच ईरान के सेना प्रमुख ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को किसी भी सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणामों की चेतावनी भी दी है.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक ढांचागत व्यवस्थाएं आगे बढ़ रही हैं और इस संबंध में जानबूझकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है. लारीजानी का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब एक दिन पहले ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मॉस्को में हुई बैठक की जानकारी दी थी, जिसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
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ट्रंप ने की दोनों देशों के बीच बातचीत की पुष्टि
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत भी दिए. ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि ईरान अमेरिका से बात कर रहा है और देखा जाएगा कि क्या कोई समाधान निकलता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान के पास तैनात किया जा रहा है.
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई के बाद ट्रंप ने हस्तक्षेप की धमकी दी थी. इसके बाद अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत के नेतृत्व में युद्धपोतों को ईरान के तटों के पास तैनात कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
दोनों के हित में नहीं होगा संघर्ष: पेजेशकियान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी युद्ध की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि व्यापक संघर्ष ईरान और अमेरिका दोनों के हित में नहीं होगा. उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल‑सिसी से फोन पर बातचीत में कहा कि ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा और न ही वह किसी भी स्थिति में युद्ध का समर्थन करता है. उनका कहना था कि युद्ध न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा.
क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं. कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने तेहरान में अली लारीजानी से मुलाकात कर हालात पर चर्चा की और तनाव घटाने के प्रयास किए.
अब भी बनी हुई सैन्य टकराव की आशंका
हालांकि, सैन्य टकराव की आशंका अब भी बनी हुई है. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला किया गया तो वह अमेरिकी ठिकानों, नौसैनिक जहाजों और उसके सहयोगियों खासतौर पर इजरायल को निशाना बना सकता है. ईरान के सेना प्रमुख अमीर हतामी ने साफ कहा कि ईरान की सेनाएं पूरी तरह सतर्क और रक्षात्मक रूप से तैयार हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी गलत कदम का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ेगा.
ईरान ने यह भी दोहराया है कि उसकी परमाणु तकनीक और विशेषज्ञता को खत्म नहीं किया जा सकता. ईरान का कहना है कि वह परमाणु वार्ता के लिए तभी तैयार होगा, जब उसकी मिसाइल और रक्षा क्षमताओं को बातचीत से बाहर रखा जाएगा.
इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अभ्यास कर रही है, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. इस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे अपनी संप्रभुता में दखल करार दिया है.
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