पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे के भीतर सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती की गोली मारकर हत्या कर दी गई. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, हमलावर गुरुद्वारे में घुसे और दंपति पर गोलीबारी कर दी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार, यह घटना बाबू मोहल्ला इलाके में हुई, जो खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर से करीब 60 किलोमीटर दूर मर्दान जिले में स्थित है. इस घटना के बाद दुनिया भर के सिख समुदाय में गहरा आक्रोश है. सोशल मीडिया पर भी लोग इस वारदात के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारत से भी उठ रहे सवाल
भारत में भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है. उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के एक गुरुद्वारे के भीतर हुई यह निर्मम हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी असुरक्षा, भय और उत्पीड़न की एक और भयावह याद दिलाती है.
आरपी सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है, तब मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर चुनिंदा मौन स्वीकार नहीं किया जा सकता. मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता कोई चुनिंदा सिद्धांत नहीं, बल्कि सार्वभौमिक मूल्य हैं.
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे के भीतर बहाया गया यह खून पाकिस्तान के उन दावों पर गहरा कलंक है, जिनमें वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करता है. उनके अनुसार, दुनिया इस मामले में जवाब चाहती है और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए.
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी जताई चिंता
वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी घटना पर गहरी चिंता जताई है. बुधवार देर शाम जारी एक बयान में एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि आरोपियों ने एक पवित्र धार्मिक संस्थान की मर्यादा का उल्लंघन किया है, क्योंकि उन्होंने धार्मिक सेवा में लगे एक निर्दोष दंपति को निशाना बनाया. धामी ने कहा, “गुरुद्वारे के अंदर एक सिख दंपति की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर हमला है.”
उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में सिख समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एसजीपीसी प्रमुख ने पाकिस्तान सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने और उन्हें कड़ी सजा देने की मांग की.
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