
पाकिस्तान ने मृत्युदंड की सजा पाए चार अन्य कैदियों को बुधवार को फांसी दे दी। दिसंबर में मृत्युदंड पर लगी रोक हटाने के बाद से अब तक देश में कुल 59 लोगों को फांसी दी जा चुकी है।
अब्दुल रज्जाक चौहान और जलील उर्फ जलाल मोरेजो को सिंध प्रांत की सुक्कुर जेल में फांसी दी गई। चौहान ने एक स्थानीय मदरसे में सातवीं कक्षा के एक छात्र की हत्या की थी और उसे 2003 में मृत्युदंड दिया गया था।
मोरेजो को एक पुराने विवाद के कारण 1997 में एक व्यक्ति की हत्या करने का दोषी पाया गया था। अन्य दो अपराधियों शाहबाज अली को सेंट्रल जेल साहीवाल और गुलाम यासीन को सेंट्रल जेल बहावलपुर में फांसी दी गई।
शाहबाज ने भूमि संबंधी विवाद के कारण 1998 में एक लड़के की हत्या कर दी थी और यासीन को 2002 में एक महिला का बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।
पाकिस्तान ने पिछले वर्ष दिसंबर में पेशावर के एक स्कूल में हुए नरसंहार के बाद आतंकवाद संबंधी मामलों में फांसी पर लगी रोक हटा दी थी। इस हमले में करीब 150 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर बच्चे थे।
इसके बाद 10 मार्च को सभी मामलों के संदर्भ में यह रोक हटा दी गई थी। स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों की आलोचना के बावजूद अब तक करीब 60 कैदियों को फांसी दी जा चुकी है। देश की विभिन्न जेलों में 8,000 से अधिक कैदी ऐसे हैं, जिन्हें मृत्युदंड दिया गया है।
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