भारत ने आज जी-7 (सात औद्योगिक देशों का समूह) द्वारा प्रस्तावित रूसी तेल पर मूल्य सीमा के बारे में अपनी चिंता जताई. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ एक बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमारी प्रति व्यक्ति 2,000 डॉलर की अर्थव्यवस्था है. हम तेल की कीमत को लेकर चिंतित हैं. तेल की कीमत हमारी कमर तोड़ रही है. यह हमारी बड़ी चिंता का विषय है." समाचार एजेंसी एएनआई ने यह खबर दी है.
बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने मूल्य सीमा पर "संक्षिप्त चर्चा" की, जिस पर विकासशील देशों की गहरी चिंता है.
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यूरोपीय संघ के देश विवादास्पद मुद्दे को लेकर एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर उन्हें कई सदस्य देशों के प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ रहा है. बाइडेन प्रशासन जी-7 देशों द्वारा कैप को लागू करने पर जोर देने का विरोध करने की कोशिश कर रहा है. वैश्विक बाजार में रूस के तेल की उपलब्धता रखते हुए, उसके खिलाफ प्रतिबंधों के हिस्से के रूप में तेल की बिक्री पर रूस के राजस्व को सीमित करने का विचार है.
ब्लिंकन ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं ताकि तेल राजस्व से यूक्रेन के युद्ध को बढ़ावा न मिले."
जयशंकर अपने समकक्ष ब्लिंकन सहित कई मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय परामर्श के लिए अमेरिका के दौरे पर हैं. बाद में उन्होंने कहा कि चर्चा राजनीतिक समन्वय और क्षेत्रीय व वैश्विक चुनौती के आकलन पर थी.
आज द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी दोहराई कि "यह युद्ध का युग नहीं है." चर्चा के दौरान टिप्पणी का हवाला देते हुए ब्लिंकन ने कहा, "हम और अधिक सहमत नहीं हो सके."
इससे पहले आज जयशंकर ने पेंटागन में अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के साथ चर्चा की. भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के रुख की ओर इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा, "मैं आपके साथ साझा करता हूं कि इस वर्ष (विभिन्न कारणों से) वैश्विक स्थिति कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है, विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक में."
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