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एक तो बैलिस्टिक मिसाइल, ऊपर से क्लस्टर बम लगा रखा! 13 साल की बेटी के साथ नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किस तैयारी में लगे?

North Korea:बार-बार हो रहे परीक्षण दिखाते हैं कि नॉर्थ कोरिया अपने कम दूरी के हथियारों को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, जिनमें विवादित क्लस्टर बम का इस्तेमाल होता है.

एक तो बैलिस्टिक मिसाइल, ऊपर से क्लस्टर बम लगा रखा! 13 साल की बेटी के साथ नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किस तैयारी में लगे?
नॉर्थ कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है, जिनमें क्लस्टर वारहेड लगे हैं

इधर अमेरिका और ईरान जंग में उलझे हैं और उधर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह भविष्य की किसी भी जंग के लिए तैयारियों में लगे हैं. नॉर्थ कोरिया ने सोमवार, 20 अप्रैल को पुष्टि की कि उसने एडवांस टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है, जिनमें क्लस्टर वारहेड लगे हैं. इस परीक्षण की निगरानी खुद किम जोंग उन ने की है. उनके साथ उनकी 13 साल की बेटी किम जू ऐ भी मौजदू थी. क्लस्टर बम दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है क्योंकि इसे बमों का रक्तबीज माना जाता है.

कलस्टर बम एक प्रकार का घातक सैन्य हथियार है, जो हवा में या जमीन के ऊपर फटकर अपने अंदर से सैकड़ों छोटे-छोटे विस्फोटक (submunition) एक बड़े इलाके में बिखेर देता है. यानी एक बम में सैंकड़ों बम छिपे होते हैं और दूर तक तबाही मचाते हैं. नॉर्थ कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के अनुसार रविवार के अभ्यास में कुल पांच “ह्वासोंगपो-11 Ra सतह से सतह पर मार करने वाली टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलें लगभग 136 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर गिरीं.”

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इस नए हथियार प्रदर्शन को पड़ोसी देशों ने भी नोटिस किया, लेकिन शुरुआत में लॉन्च प्लेटफॉर्म को लेकर अलग-अलग राय थी. जहां नॉर्थ कोरिया ने कहा कि ये मिसाइलें जमीन से दागी गई थीं, वहीं जापान और साउथ कोरिया के अधिकारियों ने कहा कि कुछ कम दूरी की मिसाइलें सिनपो क्षेत्र से छोड़ी गई थीं. साउथ कोरिया की सेना ने यह भी कहा कि ये हथियार “संभवतः पनडुब्बी से दागे गए हो सकते हैं,” क्योंकि लॉन्च साइट समुद्र के किनारे थी.

क्योदो न्यूज ने सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य “क्लस्टर बम वारहेड और फ्रैगमेंटेशन माइन वारहेड की क्षमता और ताकत को जांचना था, जो टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल में लगाए गए हैं.”

यह परीक्षण इसी महीने की शुरुआत में हुए एक और परीक्षण के बाद किया गया है, जब नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि उसने “ह्वासोंगपो-11 Ka बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसमें क्लस्टर वारहेड लगा था.” बार-बार हो रहे ये परीक्षण दिखाते हैं कि नॉर्थ कोरिया अपने कम दूरी के हथियारों को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, जिनमें विवादित सबम्यूनिशन का इस्तेमाल होता है.

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इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का कारण बना हुआ है, क्योंकि ये हथियार बड़े इलाके में छोटे-छोटे बम फैलाते हैं, जिनमें से कई बिना फटे रह जाते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि नॉर्थ कोरिया उस अंतरराष्ट्रीय समझौते “कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशंस” का हिस्सा नहीं है, जो ऐसे हथियारों के इस्तेमाल, उत्पादन, ट्रांसफर और भंडारण पर पूरी तरह रोक लगाता है. दुनिया के 120 से ज्यादा देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन नॉर्थ कोरिया, ईरान, इजरायल और अमेरिका जैसे बड़े देश इसमें शामिल नहीं हैं.

आखिर नॉर्थ कोरिया ऐसा क्यों कर रहा?

नॉर्थ कोरिया द्वारा इन हथियारों का लगातार विकास उसकी सेना को आधुनिक (मॉडर्न) बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. यह प्रयास 2019 में किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु बातचीत टूटने के बाद और तेज हो गया. उस बातचीत के टूटने के बाद, नॉर्थ कोरिया ने आधुनिक हथियारों पर ध्यान बढ़ा दिया है, जैसे कई वारहेड वाली परमाणु मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइलें और पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें.

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इन तकनीकों को मिलाकर इस्तेमाल करना एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है, ताकि अमेरिका और साउथ कोरिया की मिसाइल डिफेंस सिस्टम को पार किया जा सके और उन पर भारी दबाव बनाया जा सके.

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