नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का अपना एक अलग अंदाज है. काली चश्मा और नेपाली टोपी उनका सिग्नेनचर स्टाइल बन गया है. लेकिन कुछ वक्त पहले नेपाली संसद के स्पीकर ने इसपर आपत्ति जताई थी. इसके बाद अब उन्हें संसद में चश्मा में स्पीकर पहन कर आने की अनुमति मिल गई है. दरअसल मेडिकल कारणों के आधार पर प्रधानमंत्री को यह छूट दी गई है.
36 साल के प्रधानमंत्री बालेन शाह शायद ही कभी अपने ट्रेडमार्क काले चश्मे के बिना सार्वजनिक तौर पर दिखाई देते हैं. मार्च में पद संभालने के बाद जारी अपनी आधिकारिक तस्वीर से लेकर चुनावी रैलियों और आधिकारिक कार्यक्रमों तक, वह हर जगह इस काले चश्मे में ही नजर आए हैं.
हालांकि, इस महीने की शुरुआत में संसद के स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने सदन में काला चश्मा पहनने से परहेज करने की सलाह दी थी. स्पीकर का तर्क था कि जनता की ओर से इस बात की आलोचना की जा रही है कि राष्ट्रीय विधायिका जैसे औपचारिक मंच पर ऐसा आईवियर पहनना अनुचित है.
मेडिकल रिपोर्ट के बाद मिली छूट
स्पीकर की सलाह के बावजूद, बालेन शाह चश्मा पहनते रहे हैं. संसद सचिवालय के उप प्रवक्ता अनंत प्रसाद कोइराला ने बताया कि सचिवालय को एक मेडिकल रिपोर्ट सौंपी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए धूप के चश्मे की आवश्यकता के पीछे चिकित्सीय कारणों का जिक्र किया गया है.
प्रवक्ता के अनुसार, यदि तेज रोशनी के कारण स्वास्थ्य संबंधी कारणों से चश्मा पहनना जरूरी है, तो प्रधानमंत्री को संसद सत्र के दौरान भी इसे पहनने की अनुमति दी जाएगी. पद संभालने के बाद से लो-प्रोफाइल रहने वाले बालेन शाह के बुधवार को संसद सत्र में शामिल होने की उम्मीद है.
'बालेन सनग्लासेस' का क्रेज
काला चश्मा और ऑल-ब्लैक कपड़े बालेन शाह की पहचान बन चुका है. साल 2022 में काठमांडू के मेयर बनने के उनके सफल अभियान के बाद से ही यह स्टाइल बेहद लोकप्रिय हुआ था. नेपाल के युवाओं और समर्थकों के बीच इसका क्रेज इस कदर बढ़ा कि दुकानों पर इस खास डिजाइन के चश्मे 'बालेन सनग्लासेस' के नाम से बिकने लगे और लोग उनके इस अनोखे स्टाइल की नकल करते दिखाई दिए.
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