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टूरिस्ट को खाने में जहर! नेपाल में एवरेस्ट चढ़ाने वाले गाइड ही बना रहे शिकार, 190 करोड़ का घोटाला खुला

Nepal's Mount Everest Insurance Fraud: ट्रेकिंग एजेंसियों के गाइड पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिलाकर उन्हें बीमार कर देते थे. फिर उन पर दबाव डालकर महंगे इमरजेंसी हेलीकॉप्टर से उन्हें निकालने (एवैक्यूएशन) के लिए राजी कराया जाता था.

टूरिस्ट को खाने में जहर! नेपाल में एवरेस्ट चढ़ाने वाले गाइड ही बना रहे शिकार, 190 करोड़ का घोटाला खुला
Nepal: माउंट एवरेस्ट चढ़ाने की जगह 'जहर' खिला रहे हैं गाइड

दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ते समय जिन लोगों को आप अपना गाइड माने, अंतिम सहारा माने, अगर वे ही पैसों की खातिर आपकी जान के दुश्मन बन जाएं तो क्या होगा. नेपाल में ठीक यही हो रहा है. माउंट एवरेस्ट के गाइडों पर आरोप है कि वे पर्यटकों के खाने में चुपचाप चीज मिलाकर उन्हें बीमार कर देते थे, ताकि महंगे हेलीकॉप्टर रेस्क्यू कराए जा सकें. यह लगभग 2 करोड़ डॉलर का इंश्योरेंस ब्लेम यानी बीमा घोटाला बताया जा रहा है.

मार्च के दूसरे हफ्ते में नेपाल की पुलिस ने इस साजिश से जुड़े 32 लोगों पर संगठित अपराध और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में ट्रेकिंग कंपनियों के मालिक, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल के अधिकारी शामिल हैं.

कैसे होता था यह जानलेवा स्कैम

पुलिस ने बताया कि ट्रेकिंग एजेंसियों के गाइड पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिलाकर उन्हें बीमार कर देते थे. इससे पर्यटकों का पेट खराब हो जाता था, जो देखने में ऊंचाई की बीमारी (Altitude sickness) या फूड पॉइजनिंग जैसी लगती थी. जब पर्यटक बीमार हो जाते थे, तो उन पर दबाव डालकर महंगे इमरजेंसी हेलीकॉप्टर से उन्हें निकालने (एवैक्यूएशन) के लिए राजी कराया जाता था. अधिकारियों के अनुसार हेलीकॉप्टर कंपनियां नकली मेडिकल और फ्लाइट दस्तावेज बनाकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनियों से पैसे वसूलती थीं.

इस रिपोर्ट के अनुसार जब रेस्क्यू हेलीकॉप्टर को बुलाया जाता था, तब असली पैसे कमाने की योजना शुरू होती थी. एक ही हेलीकॉप्टर में कई यात्रियों को ले जाया जाता था. लेकिन हर यात्री की बीमा कंपनी को अलग-अलग पूरा किराया दिखाकर बिल भेजा जाता था, जैसे हर यात्री के लिए अलग हेलीकॉप्टर उड़ाया गया हो. उदाहरण के लिए, 4,000 डॉलर की हेलीकॉप्टर फ्लाइट को 12,000 डॉलर का बीमा क्लेम बना दिया जाता था.

इसके लिए नकली फ्लाइट रिकॉर्ड और लोड शीट तैयार की जाती थीं. अस्पताल में मेडिकल अधिकारी उन मरीजों के डिस्चार्ज समरी बनाते थे जिन पर सीनियर डॉक्टरों के डिजिटल सिग्नेचर लगाए जाते थे, जबकि वे डॉक्टर उस केस में शामिल ही नहीं होते थे. कुछ मामलों में यह काम डॉक्टरों की जानकारी के बिना किया गया. कई बार ऐसे पर्यटकों के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने के नकली रिकॉर्ड बनाए गए, जो वास्तव में इलाज नहीं करा रहे थे. कुछ दर्ज मामलों में तो पर्यटक उस समय अस्पताल की कैफेटेरिया में बीयर पी रहे थे, जबकि कागजों में लिखा होता था कि वे इलाज ले रहे हैं.

इन गलत तरीकों से कमाए गए पैसे बाद में गाइडों, हेलीकॉप्टर कंपनियों, ट्रेकिंग एजेंसियों और उन अस्पतालों के बीच बांटे जाते थे, जहां पर्यटकों को नकली इलाज के लिए ले जाया जाता था.

इस मामले की जांच जनवरी में शुरू हुई थी, जब तीन प्रमुख पर्वतीय रेस्क्यू कंपनियों के छह अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार इन समूहों ने धोखाधड़ी करके कम से कम 2 करोड़ डॉलर का बीमा भुगतान हासिल किया.

डराने वाली बात यह है कि ऐसा पहली बार नहीं है जब नेपाल के पर्यटन उद्योग में ऐसा घोटाला सामने आया हो. यह उद्योग देश में सीधे या परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है. पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती धोखाधड़ी के कारण कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों को बीमा कवर देना बंद कर दिया है. 2018 में नेपाल सरकार ने दावा किया था कि उसने पर्यटकों के लिए आपातकालीन हेलीकॉप्टर रेस्क्यू की व्यवस्था करने वाले सभी “बिचौलियों” को हटा दिया है और ट्रिप के दौरान पर्यटकों की जिम्मेदारी सीधे ऑपरेटरों पर डाल दी है.

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