- नेपाल में बालेन के पीएम बनते ही जेनरेशन जेड आंदोलन के दौरान लापरवाही के आरोप में गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं
- पूर्व PM केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को आंदोलन में लापरवाही के कारण गिरफ्तार किया गया
- पहली कैबिनेट बैठक में Gen-Z आंदोलन की जांच आयोग की रिपोर्ट को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया गया
नेपाल में बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते ही एक्शन मोड में आ गए हैं. जेनजी आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने के मामले में गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गुंडू से गिरफ्तार किया गया है. पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों पर उच्च पदों पर रहते हुए भी आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप है. केपी शर्मा ओली को सुबह 3 से 4 बजे के बीच गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी पर केपी शर्मा ओली ने कहा कि उनको प्रतिशोधपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया गया है, वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.

पीएम बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में नवगठित सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में शुक्रवार को पिछले साल सितंबर में हुए जेनरेशन जेड आंदोलन की उच्च स्तरीय जांच आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला लिया गया. बैठक में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल को अपना प्रवक्ता नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया है.
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली गिरफ्तार#Nepal pic.twitter.com/abVPEGGNZj
— NDTV India (@ndtvindia) March 28, 2026
ये भी पढ़ें- नेपाल की Gen-Z सरकार! PM बालेन शाह सहित 15 में 9 मंत्रियों की उम्र मात्र 30 से 40 साल के बीच
केपी ओली को हो सकती है 10 साल की सजा
कैबिनेट बैठक के बाद, प्रवक्ता पोखरेल ने मीडियाकर्मियों को सूचित किया कि कैबिनेट ने पिछले साल के जेनरेशन जेड आंदोलन से संबंधित जांच आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला किया है. जांच आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक सहित अधिकारियों को उच्च पदों पर रहते हुए भी आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने के लिए अधिकतम 10 साल की कैद की सिफारिश की है.
कार्रवाई के लिए होगा दल का गठन
पोखरेल ने मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाली जांच आयोग द्वारा सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाइयों के लिए एक अध्ययन दल का गठन किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि अन्य मामलों में सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाएगा.
उच्च अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश
जांच आयोग ने तत्कालीन नेपाल पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग सहित कई अन्य उच्च अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की थी. सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने जांच आयोग की रिपोर्ट को संघीय संसद सचिवालय के पुस्तकालय अभिलेखागार में रखकर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया था.

नेपाल में कब और क्यों हुआ GEN-Z आंदोलन?
बता दें कि साल 2025 में नेपाल की राजनीति ने एकदम से अलग मोड ले लिया, जब नेपाल के युवा सड़कों पर उतप आए. उन्होंने बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपारदर्शिता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. उनके इस विरोध-प्रदर्शन को Gen Z आंदोलन नाम दिया गया. ये आंदोलन इस कदर बढ़ा कि तत्कालीन पीएम केपी ओली को इस्तीफा देना पड़ा साथ ही संसद भी भंग कर दी गई. जिसके बाद सुशीला कार्की को सर्वसम्मति से अंतरिम पीएम बनाया गया था.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं