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अमेरिका और ईरान में क्‍या अब फिर छिड़ जाएगी जंग... बातचीत फेल, अब आगे क्या होगा, एक्‍सपर्ट्स से जानिए

US and Iran Talk: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत में कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन दूसरे दौर की वार्ता की संभावना बनी हुई है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि ये ईरान और अमेरिका के बीच जारी बातचीत का डेड एंड नहीं है. अभी कई राउंड की बातचीत और हो सकती है.

अमेरिका और ईरान में क्‍या अब फिर छिड़ जाएगी जंग... बातचीत फेल, अब आगे क्या होगा, एक्‍सपर्ट्स से जानिए
  • अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता में कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है, लेकिन दूसरा दौर संभव है
  • होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा जारी है, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर खुलवाना चाहता है, जिससे तनाव बढ़ा है
  • ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने से साफ इनकार किया है और अमेरिका पर भरोसा कम कर दिया है
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इस्‍लामाबाद:

अमेरिका और ईरान के बीच इस्‍लामाबाद में हुई शंति वार्ता पर दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है, अब आगे क्‍या होगा? होर्मुज स्‍ट्रेट पर ईरान का कब्‍जा कायम है. अमेरिका किसी भी कीमत पर होर्मुज को खुलवाना चाहता है. ऐसे में क्‍या अब ईरान और अमेरिका के बीच फिर जंग छिड़ जाएगी? ये सवाल आज दुनियाभर के लोगों के जेहन में उठ रहा होगा. हालांकि, एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि निराश होने की जरूरत नहीं है, जल्‍द ही दोनों देशों के बीच दूसरे राउंड की बातचीत हो सकती है. कई बाद ऐसा होता है कि पहले दौर की बातचीत सफल नहीं होती, तो दूसरे दौर की बातचीत होती है. फिर ईरान और अमेरिका के बीच विवाद 45 साल से भी ज्‍यादा पुराना है. इसलिए इस्‍लामाबाद की बातचीत को 'डेड एंड' नहीं समझना चाहिए. अमेरिकी उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस इस्‍लामाबाद से जाते-जाते ईरान के साथ एक प्रपोजल भी छोड़कर गए हैं. इसलिए ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत कहां होगी. कहां होगी, अब ये देखना दिलचस्‍प होगा.   

"ये डेड एंड नहीं, ईरान के सामने प्रपोज छोड़ गए हैं जेडी वेंस"

लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी (रिटायर्ड ) ने NDTV से कहा, "किसी पर 2 बार से ज्‍यादा भरोसा मत करो. पहली बार भरोसा चेतावनी होती है और दूसरी बार भरोसा सब्र होता है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम से नीचे नहीं आएगा. अमेरिका ने 2 बार ईरान से धोखा किया है. दोनों बार ऐसा हुआ है, जब बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया है. हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच इस्‍लामाबाद हुई बातचीत को 'डेड एंड' नहीं मानना चाहिए." 

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लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी ने कहा, "जब भी जंग के बीच इस तरह की बातचीत होती हैं, तो वो जरूरी नहीं होता कि पहले राउंड में किसी हमल पर देश पहुंच जाएं. फिर अमेरिका और ईरान के बीच तो मामला काफी पेचीदा है. इनमें बीच पिछले 47 साल से विवाद चला रहा है, जब से ईरान में इस्लामी क्रांति (1971) शुरू हुई थी. इस दौरान अमेरिका ने कई बार वहां सत्‍ता परिवर्तन कराने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हो पाया है. हालांकि, एक उम्‍मीद अभी ये बाकी है. जेडी वेंस इस्‍लामाबाद से जाते-जाते ये कह गए हैं कि वे ईरान के सामने एक प्रपोजल छोड़कर गए हैं. सीजफायर खत्‍म होने में अभी 10 दिन बाकी हैं, इसलिए मुझे उम्‍मीद है कि आने वाले समय में इस प्रपोजल पर बातचीत के लिए ईरान और अमेरिका फिर बैठ सकते हैं." 

राउंड-1 हुआ है, 2 भी जरूर होगा...

ईरान जंग के बीच बातचीत की टेबल पर अमेरिका के साथ आ तो गया था, लेकिन उसे भरोसा नहीं था. ऐसे में बातचीत के फेल होने की आशंका पहले दिन से जताई जा रही थी. NDTV से बातचीत में भारत के पूर्व राजनायिक प्रभु दयाल ने बताया, "ईरान की अमेरिका पर भरोसा न करने की कई वजह थीं. पिछले साल जून में जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही थी, तब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर हमला कर दिया था. इस साल भी बातचीत चल रही थी, अमेरिका की ओर से कहा जा रहा था कि अच्‍छे नतीजे आ रहे हैं, तभी अमेरिका ने फिर हमला कर दिया. ऐसे में ईरान कहता है कि अमेरिका पर उसे विश्‍वास नहीं है, तो वह जायज है."

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भारत के पूर्व राजनायिक ने कहा, "जहां तक इस्‍लामाबाद की बातचीत विफल रहने की बात है, तो ऐसे मसले इतनी जल्‍दी नहीं सुलझते हैं. ईरान और अमेरिका के बीच अभी राउंड-1 की बातचीत हुई है. 40 दिन की जंग के बाद राउंड वन का होना ही अपने आप में बड़ी बात है. अब राउंड-2 की बातचीत हो सकती है, इसमें कुछ मुद्दों पर सहमति बन सकती है. फिर राउंड-3 की बातचीत भी हो सकती है. मुझे ऐसा लगता है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जरूर होगी, क्‍योंकि ऐसे मसले दो देशों के बीच वार्ता के जरिए ही सुलझते हैं."
         
वैसे एक्‍सपर्ट्स की मानें तो अभी तक ईरान का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. अमेरिकी की बातचीत के लिए हड़बड़ी से ये साफ नजर आ रहा है. पाकिस्‍तान के जरिए बातचीत करने का निर्णय भी अमेरिका ने लिया. इधर, होर्मुज स्‍ट्रेट पर ईरान का कब्‍जा कायम है, जिसे अभी खोला नहीं गया है. ऐसे में दुनियाभर में ऊर्जा संकट फिर गहरा सकता है. ऐसे में अमेरिका पर दबाव और बढ़ रहा है. हालांकि, सीजफायर को अभी 10 दिन अभी बाकी हैं.

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