- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक मामले के विरोध में अपना इस्तीफा दिया है
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर में छात्र प्रदर्शन और CJP की मांगों के बाद आया है
- प्रधान ने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी ली और स्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा
नीट पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली के जंतर मंतर समेत देशभर में जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया. प्रधान का इस्तीफा नरेंद्र मोदी सरकार में एक दुर्लभ घटना है, क्योंकि इसकी तुलना करें तो हमें तकरीबन 9 साल पहले 2018 में वापस जाना होगा, जब एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री का पद छोड़ा था.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा पेपर लीक के ख़िलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए देशभर में विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी जीत है. सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को मानने का भी भरोसा दिया है.
जैसे -
- NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ का मुआवज़ा देना
- संसद मार्च में शामिल छात्रों के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई न करना
- छात्रों पर हमला करने के लिए दिल्ली पुलिस और आरएफए से माफी की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे. CJP ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बातचीत के अगले दौर के लिए एक शर्त भी बना दिया था, जो आज होनी ही थी.

अपना पद छोड़ने के बाद, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने NEET पेपर लीक की पूरी ज़िम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने मुश्किलें पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की.
विपक्ष के नेता लंबे समय से केंद्र सरकार पर "अहंकार" का आरोप लगाते रहे हैं और कहते हैं कि कई विवादों के बाद भी मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते. उनका दावा है कि यह चलन 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही जारी है.
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