विज्ञापन

Reporter's Diary: आसमान से दिखी त्रिशूली नदी घाटी की खौफनाक तस्वीर, नेपाल में जंग से भी बदतर तबाही

त्रिशूली घाटी को आसमान से देखने पर सामने आई तबाही की ऐसी तस्वीर, जहां कभी घर और बाजार थे वहां अब मीलों तक फैली कीचड़ की चादर दिखाई देती है.

Reporter's Diary: आसमान से दिखी त्रिशूली नदी घाटी की खौफनाक तस्वीर, नेपाल में जंग से भी बदतर तबाही
नेपाल फ्लैश फ्लड के बाद NDTV की ग्राउंड जीरो से रिपोर्टर की डायरी
NDTV
  • त्रिशूली नदी घाटी में बाढ़ ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और इमारतों को पूरी तरह मिटा दिया.
  • कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों, मलबे में फंसे लोगों को बेहद कम उम्मीदों के बीच अब भी तलाशा जा रहा है.
  • दूर-दूर तक फैला कीचड़ दिखाई दे रहा है. कीचड़ और गाद राहत कार्यों में मुश्किलें पैदा कर रही हैं.

सोमवार दोपहर करीब 3 बजे के कुछ देर बाद मैं अपने साथियों अश्विनी, जो हमारे सीनियर कैमरा पर्सन हैं, और हमारे सीनियर हिंदी संवाददाता मनोज्ञा लोईवाल के साथ आठ साल पुराने कैलाश एयरवेज के एयरबस एच125 हेलिकॉप्टर में सवार हुआ.

हेलिकॉप्टर मिलना आसान नहीं था. कई दिनों से हम नेपाल सरकार से इसकी अनुमति लेने की कोशिश में लगे थे. इन इलाकों में दर्जनों हेलिकॉप्टर राहत कार्य और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं, लिहाजा हमारी कोशिश थी कि नेपाल सरकार से हमारे इस अनुरोध की वजह से प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए.

आखिरकार, जब हमारी उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, तभी एक व्हाट्सएप्प मैसेज ने सब कुछ बदल दिया: मैसेज था- "हां, आप आगे बढ़ सकते हैं." कई एजेंसियों की मंजूरी के साथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी हमारी उड़ान को आधिकारिक मंजूरी दे दी.

भारी बारिश ने हमारा रास्ता रोकने की कोशिश की

हमारी योजना करीब एक घंटे की उड़ान भरने की थी. हमें काठमांडू से उड़ान भरकर त्रिशूली नदी की घाटी के ऊपर से रसुवागढ़ी तक जाना था. चीन की सीमा से ठीक पहले हमें इस संकरी घाटी में हेलिकॉप्टर को मोड़कर वापस लौटना था.

पिछले कई दिनों से मैं जमीन पर बिदुर, देवघाट, बट्टार और त्रिशूली बाजार जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रिपोर्टिंग कर रहा था. इसलिए मुझे लगा था कि मैं इस तबाही का पैमाना समझ चुका हूं. लेकिन जब मैंने उसी तबाही को आसमान से देखा, तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी. वहां से इस त्रासदी की भयावहता कहीं ज्यादा साफ और झकझोर देने वाली नजर आ रही थी.

जैसे ही हमने काठमांडू को घेरने वाली पहली पहाड़ी को पार किया, हम तेज बारिश से घिर गए. कुछ ही देर में विजिबिलिटी तेजी से घटने लगी.

Latest and Breaking News on NDTV

हमारे पायलट नेपाली सेना के रिटायर्ड अनुभवी अधिकारी कर्नल रवींद्र बस्नेत थे. इस भारी बारिश में उन्हें एक बड़ा फैसला लेना था कि क्या वो आगे बढ़ेंगे या काठमांडू वापस लौट जाएंगे?

ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के अपने लंबे अनुभव पर यकीन करते हुए कर्नल बस्नेत ने आगे बढ़ने का फैसला किया.

उड़ान भरने के सिर्फ 15 मिनट बाद हम बिदुर के ऊपर मंडरा रहे थे. न्यूज रिपोर्टिंग के दौरान सड़क पर जिस दूरी को हम करीब तीन घंटे में कवर किया करते थे उसे हमने हेलिकॉप्टर से महज 15 मिनट में तय कर ली.

Latest and Breaking News on NDTV

बिदुर इस इलाके में हेलिकॉप्टर ऑपरेशंस का एक अहम केंद्र है. पिछले कई दिनों से दर्जनों हेलिकॉप्टर इस घाटी में लगातार आ-जा रहे हैं. हम खुद जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान इस लगातार चल रहे राहत अभियान को देख चुके थे.

लेकिन हवा से देखने पर यहां का भारी हवाई ट्रैफिक बेहद चौंकाने वाला था. हमने एक ही समय में कम से कम छह हेलिकॉप्टरों को बिदुर में उतरते और उड़ान भरते देखा.

इतनी संकरी जगह में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पायलटों के लिए सख्त नियम हैं. उत्तर की ओर जाने वाले हेलिकॉप्टर घाटी के बाईं तरफ उड़ते हैं, जबकि दक्षिण की ओर जाने वाले हेलिकॉप्टर दाईं तरफ से उड़ते हैं.

उत्तर की ओर जाने की मंजूरी मिलने के बाद हमने बिदुर से उड़ान भरी और त्रिशूली-3A सुरंग के रेस्क्यू साइट की तरफ बढ़े.

Latest and Breaking News on NDTV

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की तबाही का मंजर

इस पूरे इलाके में नदी के बहाव पर आधारित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बड़ी संख्या में हैं. नदी तंत्र के किनारे ऐसे एक दर्जन से ज्यादा प्रोजेक्ट हैं और बाढ़ ने इनमें से लगभग सभी को या तो पूरी तरह तबाह कर दिया है या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचाया है.

इसका नेपाल के पावर ग्रिड पर बेहद गंभीर असर पड़ा है. नेपाल में आमतौर पर जरूरत से ज्यादा बिजली उपलब्ध रहती है, लेकिन इन बड़े बिजली संयंत्रों के तबाह होने से यह अतिरिक्त बिजली क्षमता तेजी से खत्म हो गई है.

हालांकि, हवा से इस इलाके को देखने का मेरा मुख्य मकसद सिर्फ आर्थिक नुकसान को समझना नहीं था. मैं यह अपनी आंखों से देखना चाहता था कि बाढ़ अपने पीछे किस तरह की मानवीय और भौतिक तबाही छोड़ गई है.

कुछ ही मिनटों में हम त्रिशूली-3A सुरंग के रेस्क्यू साइट के ऊपर पहुंच गए. यह उन रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिन्हें इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है.

यहां, और इस आपदा से प्रभावित बाकी सभी बिजली संयंत्रों में भी, बचावकर्मी समय के खिलाफ एक बेहद मुश्किल दौड़ लड़ रहे हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

अब भी सुरंगों में फंसे हैं लोग?

वे जमीन के नीचे बनी सुरंगों और बुनियादी ढांचे की भूलभुलैया के अंदर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई व्यक्ति जिंदा तो नहीं फंसा है.

हर गुजरते घंटे के साथ किसी को जिंदा खोज निकालने की उम्मीद कम होती जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सुरंगों के रास्ते भारी मात्रा में कीचड़ और गाद से पूरी तरह भर गए हैं.

जब हमारा हेलिकॉप्टर साइट पर उतरा, तो मैं बाहर निकला और एक जियोटेक्निकल एक्सपर्ट से बात की.

उन्होंने बताया कि अभी तक अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने में कोई सफलता नहीं मिली है.

Latest and Breaking News on NDTV

कीचड़ और मलबे ने बदला इलाके का भूगोल

कीचड़ हटाने का काम चल रहा था और एक एक्सकेवेटर लगातार खुदाई करके इस कीचड़ को बाहर निकाल रहा था.

लेकिन इस कीचड़ की असली भयावहता को समझना जरूरी है. यह बेहद गहरा और बहुत मोटा है.

त्रिशूली नदी के किनारे जमीन पर रिपोर्टिंग के दौरान हमने खुद देखा था कि अगर कोई सावधानी से कदम न रखे तो वह देखते ही देखते घुटनों तक कीचड़ में धंस जाता था.

पिछले हफ्ते जब बाढ़ का सैलाब आया, तो पानी करीब तीन मंजिल तक ऊपर उठ गया था.

उसने पूरे इलाके की इमारतों को पूरी तरह डुबो दिया और तबाह कर दिया.

नदी के साथ बहकर आए कीचड़ और मलबे की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि उसने इस पूरे इलाके के भूगोल को ही बदल दिया है.

हेलिकॉप्टर से अलग दिखा तबाही का मंजर 

हम जल्दी से दोबारा हेलिकॉप्टर में बैठे और बेत्रावती, धारापानी, घूमती बाजार, रामचे, धुंचे और टिमुरे के ऊपर से उड़ते हुए चीन की सीमा से ठीक पहले स्थित रसुवागढ़ी की तरफ बढ़ने लगे.

जैसे-जैसे हम उत्तर की तरफ आगे बढ़े, हवा से दिखाई देने वाली तस्वीर जमीन से की गई हमारी बिदुर और देवघाट की रिपोर्टिंग से बिल्कुल अलग थी.

कई जगहों पर तबाह हुई इमारतें तक नजर नहीं आ रही थीं.

न तो टूटी हुई इमारतों के ढांचे बचे थे, न ही पूरी तरह ध्वस्त नींव दिखाई दे रही थी.

जिन इलाकों में कुछ ही दिन पहले तक लोग रहते थे और जिनकी बस्तियां पूरी तरह आबाद थीं, वहां अब कुछ भी नहीं बचा था.

सिर्फ दूर-दूर तक फैले, खाली और सपाट कीचड़ के मैदान नजर आ रहे थे, जैसे वे अचानक कहीं से पैदा हो गए हों.

जहां सिर्फ एक हफ्ते पहले दर्जनों घर, दुकानें, सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं, वहां आज पूरी तरह खाली जमीन थी.

अगर पायलट ने मुझे यह नहीं बताया होता कि हम उन कस्बों के ऊपर से उड़ रहे हैं जहां कभी लोग रहते थे, तो मुझे लगता कि त्रिशूली नदी के दोनों किनारों पर फैले ये कीचड़ के मैदान नदी के तल का प्राकृतिक हिस्सा हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: NDTV

चीन से सटे बॉर्डर पर क्या दिखा?

कुछ देर बाद कर्नल बस्नेत ने हमें बताया कि अब हम नदी घाटी के आखिरी हिस्से के करीब पहुंच रहे हैं और हमें दक्षिण की तरफ लौटना होगा, क्योंकि रसुवागढ़ी में चीन की सीमा अब आगे ही थी.

सीमा से कुछ पहले हमने हेलिकॉप्टर से एक-दो चक्कर लगाए.

इस दौरान मुझे इस महत्वपूर्ण सीमा चौकी पर बाढ़ से हुई तबाही को कैमरे में कैद करने का मौका मिला.

जो जगह कभी एक व्यस्त और फलता-फूलता बॉर्डर क्रॉसिंग थी, वहां अब बाढ़ की विनाशकारी ताकत के निशान दिखाई दे रहे थे.

हेलिकॉप्टर का ईंधन लगातार कम हो रहा था, यानी काठमांडू लौटने का समय आ गया था.

कर्नल बस्नेत को यह भी सुनिश्चित करना था कि हमारे पास पर्याप्त ईंधन बचा रहे, ताकि रास्ते में मौसम खराब होने पर हेलिकॉप्टर को कुछ देर हवा में रोकना पड़े या रास्ता बदलकर उड़ान भरनी पड़े तो कोई समस्या न हो.

Latest and Breaking News on NDTV

प्रकृति की विभिषिका

घाटी से वापस नीचे की ओर उड़ते हुए मेरे दिमाग में पिछले कई वर्षों की रिपोर्टिंग की यादें दौड़ने लगीं.

अपने करियर में मैंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं को कवर किया है. इनमें जापान के सेंदाई में आई सुनामी, ग्रेट निकोबार द्वीप से भारतीय महासागर की सुनामी, भुज का भूकंप, 2015 का नेपाल भूकंप और बिहार की विनाशकारी बाढ़ शामिल हैं.

कई मायनों में प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्टिंग आधुनिक युद्ध की रिपोर्टिंग से कहीं ज्यादा भयावह होती है.

आधुनिक युद्ध में अक्सर इस बात की कोशिश की जाती है कि आम लोगों और दूसरी गैर-सैन्य संपत्तियों को कम से कम नुकसान पहुंचे.

लेकिन प्रकृति किसी को नहीं बख्शती.

जब कोई नदी पूरी ताकत के साथ उफान पर होती है और 200 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से विशाल चट्टानों, पत्थरों और मलबे को अपने साथ बहाकर नीचे लाती है, तो उसके रास्ते में आने वाली हर चीज मिट जाती है.

इस तबाही में कोई भेदभाव नहीं होता.

यह बहुत बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेती है और इसमें होने वाली मौतों की संख्या अक्सर युद्ध के मैदानों में होने वाली मौतों से भी कहीं ज्यादा हो सकती है.

Latest and Breaking News on NDTV

मृतकों की संख्या अभी और बढ़ेगी

जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए उस दुख का अंत और अपने प्रियजनों के बारे में अंतिम जानकारी मिलना आसान नहीं होगा.

उनके अपनों के शवों को निकालने में हफ्ते या महीने लग सकते हैं.

कई शव इतने ज्यादा कीचड़ के नीचे दबे हो सकते हैं कि शायद वे कभी मिल ही न पाएं.

एक बात अब बेहद साफ है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ेगी.

सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, हजारों लोग अब भी लापता हैं और किसी को वास्तव में नहीं पता कि अंतिम आंकड़ा कब सामने आएगा.

फिलहाल, त्रिशूली घाटी के बाढ़ से पूरी तरह उजड़े किनारों के बीच उन तमाम परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में अंतिम जवाब का इंतजार है.

लेकिन जिस अंतिम जवाब और सुकून के लिए ये परिवार प्रार्थना कर रहे हैं, वह अभी भी बेहद दूर नजर आ रहा है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nepal Floods 2026, Nepal Flood Rescue Operation, Trishuli River Flood, Trishuli River Flooding, NDTV Exclusive
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com