ब्रह्मांड में ऐसे कई रहस्य हैं, जिनका जवाब दुनियाभर के वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है. स्पेस में सबसे रहस्यमयी इलाका 'ब्लैक होल' को माना जाता है. कुछ साल पहले तक ब्लैक होल की बस थ्योरी ही इंसानों के पास थी. लेकिन अब वैज्ञानिकों के पास इसकी तस्वीरें भी हैं. तमाम वैज्ञानिक और एजेंसियां लगातार ब्लैक होल को और समझने की कोशिश कर रहे हैं. इसी ब्लैक होल के बेहद करीब से ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दुनियाभर के खगोलविदों को हैरान कर दिया है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के 'चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी' और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के 'XMM-Newton' टेलीस्कोप ने मिलकर हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के 'डाउनटाउन' यानी बिल्कुल केंद्र में एक अनोखी चीज ढूंढ निकाली है. वैज्ञानिकों को गैलेक्सी के महाविशाल ब्लैक होल, सैजिटेरियस ए (Sgr A) के बिल्कुल पड़ोस में एक प्राचीन और भयानक तारा विस्फोट (सुपरनोवा) के संभावित अवशेष मिले हैं.
ब्लैक होल के सबसे करीब मिला तारे का मलबा
अगर वैज्ञानिक इसकी पुष्टि कर पाते हैं, तो यह अंतरिक्ष के इतिहास में ब्लैक होल के सबसे करीब पाया गया किसी मरे हुए तारे का मलबा होगा. हैरान करने वाली बात यह है कि करीब 1,700 साल पहले हुआ यह महाविस्फोट आज भी थमा नहीं है. इन नई खोजों के बारे में एक पेपर 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में छपा है. सुपरनोवा रेमनेंट फटे हुए तारों के फैलते हुए अवशेष होते हैं और इन पर लोहा, ऑक्सीजन और सिलिकॉन जैसे तत्व होते हैं, जो ग्रहों के बनने और जीवन के पनपने के लिए जरूरी हैं.

तस्वीर में इस संभावित सुपरनोवा अवशेष की जगह को एक घेरे से दिखाया गया है
Photo Credit: NASA
NASA के अनुसार, खगोलविदों ने चंद्रा और XMM-न्यूटन के डेटा का इस्तेमाल करके मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र के पास तारे बनाने वाले इलाके में एक नया सुपरनोवा रेमनेंट खोजा है.हालांकि अभी इसकी पूरी तरह पुष्टि वैज्ञानिक नहीं कर पाए हैं.
X-रे डेटा से मिले सबूत
पृथ्वी से लगभग 26000 लाइट ईयर दूर स्थित इस नए सुपरनोवा रेमनेंट के सबूत चंद्रा और XMM-न्यूटन के X-रे डेटा से मिले हैं. X-रे डेटा से X-रे एमिशन का एक 'ब्लॉब' यानी धब्बा दिखाई देता है. माना जा रह है कि यह किसी बहुत बड़े तारे के अवशेष से आ रहा हो, जो सुपरनोवा के रूप में नष्ट हो गया था और फैलती हुई गैस के बड़े बादल के अंदर छिपा हुआ था.

सैजिटेरियस C की क्लोज़-अप तस्वीर
Photo Credit: NASA
20 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से फैल रहा मलबा
अगर यह सच में सुपरनोवा का अवशेष है, तो यह लगभग 20 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से फैल रहा है और कम से कम 1700 साल पुराना है. इससे पहले NASA के बंद हो चुके स्ट्रेटोस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी फॉर इन्फ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (SOFIA) मिशन के ऑब्जर्वेशन से सैजिटेरियस C के चारों ओर गैस की एक फैलती हुई परत के सबूत मिले थे. इससे खगोलविदों को संकेत मिला कि उसी जगह पर तारों का कोई विस्फोट हुआ था.
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