- अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने RSS नेताओं पर बैन लगाने, मोहन भागवत को राजनयिक सम्मान न देने की मांग की
- RSS प्रमुख मोहन भागवत कुछ हफ्ते में ही अमेरिका का दौरा करने वाले हैं
- भारत ने इस आयोग की रिपोर्ट को चुनिंदा आलोचना और संदिग्ध स्रोतों पर आधारित बताते हुए पूरी तरह खारिज किया था
अमेरिका में धार्मिक आजादी से जुड़े एक सलाहकार आयोग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने अमेरिकी सरकार से यह भी कहा है कि RSS के नेताओं को राजनयिक सम्मान न दिया जाए और उनके साथ बड़े स्तर की बैठकें न की जाएं. यह मांग उस समय उठाई जा रही है जब RSS प्रमुख मोहन भागवत कुछ हफ्ते में ही अमेरिका का दौरा करने वाले हैं. इस आयोग को भारत ने पहले भी जवाब दिया है कि यह संगठन लगातार भारत की तस्वीर को तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा तरीके से पेश करता रहा है.
नोट- मोहन भागवत अमेरिका के साथ कनाडा भी जा सकते हैं. वहां भी कुछ सांसदों ने मोहन भागवत को कनाडा आने से रोकने और उन्हें देश में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग कार्नी सरकार से कर रहे हैं. दूसरी तरफ कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों ने मोहन भागवत के सपोर्ट में कार्नी सरकार को लेटर लिखा है.
मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में होने वाले ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस' कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अमेरिका जाएंगे. यह कार्यक्रम अमेरिकन हिंदूज फॉर इंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने आयोजित किया है. ऐसे में अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने यह मांग की है. उन्होंने यह दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं. उन्होंने RSS को एक ऐसा बड़ा संगठन बताया, जिसके अलग-अलग समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप हैं.
USCIRF ने महमूद और मिल्स की इन बातों को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया.

USCIRF अध्यक्ष ने क्या कहा?
महमूद ने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य हैं. यह भारत का एक बड़ा संगठन है, जिसके अलग-अलग समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं, पर हमले करने के आरोप हैं. अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आने की योजना बना रहे हैं.”
बता दें कि मार्च में USCIRF की सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक आजादी के कथित उल्लंघनों की आलोचना की गई थी. रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) जैसे संगठनों और लोगों पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया गया था. रिपोर्ट में इन्हें धार्मिक आजादी से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार बताया गया था.
USCIRF को भारत का जवाब
भारत ने USCIRF की इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. भारत ने कहा था कि यह संगठन लगातार देश की “तस्वीर को तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा तरीके से” पेश करता रहा है. भारत ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट “संदिग्ध स्रोतों और विचारधारा से जुड़ी बातों” पर आधारित होती है.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा था कि USCIRF को भारत की “चुनिंदा आलोचना” जारी रखने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और हमलों की “परेशान करने वाली घटनाओं”, भारत को चुनकर निशाना बनाने और अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि इन मामलों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.
(इनपुट - न्यूज एजेंसी पीटीआई)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं